जिला रिपोर्टर सुरेश चौहान आगर मालवा मध्य प्रदेश शारदीय नवरात्रि विशेष *एक शिला में विराजीं तीन देवियां, नलखेड़ा के मां बगलामुखी धाम की महिमा निराली!* आस्था, तंत्र साधना और शक्ति उ

आलेख : जगदीश मालवीय, आगर मालवा
*आगर-मालवा(नलखेड़ा)।* लखुंदर नदी का शांत तट, मंदिर में गूंजते मां के जयकारे और दर्शन के लिए उमड़ती श्रद्धालुओं की कतारें… शारदीय नवरात्रि में नलखेड़ा का मां बगलामुखी धाम भक्ति और शक्ति के अनूठे रंग में रंग जाता है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मालवा की धार्मिक आस्था, प्राचीन मान्यताओं और साधना परंपरा का ऐसा केंद्र है, जिसकी ख्याति देशभर में फैली है। दस महाविद्याओं में शामिल मां पीताम्बरा के इस सिद्धपीठ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां एक ही शिला में मां बगलामुखी, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती के दर्शन होते हैं। यही अद्भुत स्वरूप इस धाम को विशिष्ट पहचान देता है। अब सिंहस्थ-2028 को देखते हुए यहां देवी लोक विकसित करने की तैयारी भी धार्मिक पर्यटन के लिहाज से नई उम्मीदें जगा रही है।
*एक शिला, तीन देवियां… यही है नलखेड़ा धाम की सबसे बड़ी पहचान*
मंदिर के गर्भगृह में विराजित मां बगलामुखी का स्वरूप श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एक ही स्वयंभू शिला में मध्य में मां बगलामुखी, दाईं ओर मां लक्ष्मी और बाईं ओर मां सरस्वती विराजमान हैं। शक्ति, समृद्धि और ज्ञान के इस त्रिशक्ति स्वरूप के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं। मां पीताम्बरा की आराधना में पीले रंग का विशेष महत्व है। श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करते हैं और खड़ी हल्दी अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर परिसर में दक्षिणमुखी हनुमान, उत्तरमुखी गोपाल और पूर्वमुखी भैरव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। सिंहमुखी मुख्य द्वार मंदिर की भव्यता को और बढ़ाता है।
*सतयुग की कथा से महाभारत की मान्यता तक जुड़ी है महिमा*
मां बगलामुखी धाम की महिमा से जुड़ी अनेक पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि सतयुग में विनाशकारी तूफान से सृष्टि पर संकट आया, तब भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र में हरिद्रा सरोवर के तट पर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर चतुर्दशी तिथि पर मां बगलामुखी प्रकट हुईं और सृष्टि की रक्षा की। महाभारत काल से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर धर्मराज युधिष्ठिर ने कौरवों पर विजय की कामना से यहां मां की आराधना की थी। इन मान्यताओं ने इस धाम की धार्मिक प्रतिष्ठा को विशेष पहचान दी है।
मंदिर के इतिहास में संवत 1816 में जीर्णोद्धार का उल्लेख मिलता है। परिसर का 16 स्तंभों वाला सभामंडप और सामने स्थित लगभग 80 फीट ऊंची दीपमालिका इसकी स्थापत्य विरासत के आकर्षक उदाहरण हैं।
*तंत्र साधना से विशेष हवन तक, दूर-दूर तक है धाम की ख्याति*
मां बगलामुखी धाम की पहचान शक्ति उपासना और तंत्र साधना की परंपराओं से भी जुड़ी है। यहां श्रद्धालु जीवन की कठिनाइयों, शत्रु बाधा और न्यायालयीन मामलों जैसी परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं। मां की आराधना से साहस और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का संबल मिलने की मान्यता है। मंदिर में निर्धारित व्यवस्थाओं के अनुसार हवन और विशेष अनुष्ठान कराए जाते हैं। मिर्ची हवन जैसे विशिष्ट अनुष्ठानों के कारण भी नलखेड़ा धाम देशभर के श्रद्धालुओं और साधकों के बीच चर्चित है।
*सामान्य दिनों में हजारों, नवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धा की लहर*
तहसीलदार नलखेड़ा एवं मंदिर प्रबंध समिति के प्रबंधक प्रियंक श्रीवास्तव के अनुसार, सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि, मां बगलामुखी जयंती तथा प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को यह संख्या 40 से 50 हजार या इससे अधिक तक पहुंच जाती है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु और साधक दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तिमय माहौल बन जाता है और मां के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है।
*सिंहस्थ-2028 से पहले 68 करोड़ के देवी लोक पर नजरें*
नलखेड़ा धाम की बढ़ती धार्मिक महत्ता के बीच इसके विकास को लेकर भी उम्मीदें बढ़ी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा करीब 68 करोड़ रुपये की लागत से देवी लोक के प्रथम चरण के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया की गई है। प्रस्तावित विकास से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। मंदिर का प्रबंधन मध्यप्रदेश शासन के धर्मस्व विभाग और स्थानीय प्रबंध समिति के माध्यम से किया जाता है। गर्भगृह में स्वर्ण एवं चांदी की सज्जा भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
*दर्शन, हवन, भंडारा और सुरक्षा… नवरात्रि के लिए विशेष इंतजाम*
नवरात्रि में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति द्वारा विभिन्न व्यवस्थाएं किए जाने की जानकारी दी गई है। कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना के मार्गदर्शन में दर्शन, सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधाओं पर ध्यान दिया गया है। मंदिर में सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन की व्यवस्था रहेगी। निर्धारित शुल्क पर हवन-अनुष्ठान, नवीन यज्ञशाला और 200 से अधिक हवन कुंडों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी पैदल पुल, धर्मशाला, भोजनशाला और पेयजल के लिए वाटर कूलर सहित अन्य इंतजाम किए गए हैं। वाहनों की पार्किंग के लिए चार बड़ी पार्किंग बनाई गई हैं, जहां सीसीटीवी से निगरानी की व्यवस्था है। सुरक्षा के लिए 50 गार्ड और स्वच्छता के लिए 40 सफाईकर्मियों की व्यवस्था किए जाने की जानकारी है। लखुंदर नदी के तट पर स्नान घाट भी मौजूद हैं। वहीं, मां पीताम्बरा सेवा समिति नलखेड़ा द्वारा नवरात्रि में श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क भंडारे का आयोजन किया जाता है।
*सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं श्रद्धालु*
आगर-मालवा जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित नलखेड़ा का मां बगलामुखी धाम सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। उज्जैन, इंदौर, भोपाल और कोटा सहित आसपास के प्रमुख शहरों से यहां आने की सुविधा है। इंदौर की दूरी लगभग 158 किलोमीटर और उज्जैन की दूरी करीब 100 किलोमीटर बताई जाती है। निकटवर्ती प्रमुख रेलवे स्टेशनों में उज्जैन और आलोट शामिल हैं, जबकि निकटतम हवाई अड्डा इंदौर है।
आस्था की अटूट डोर, शक्ति साधना की प्राचीन परंपरा और एक शिला में त्रिदेवी के दर्शन—नलखेड़ा का मां बगलामुखी धाम इन विशेषताओं के कारण मालवा की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। शारदीय नवरात्रि में यहां उमड़ती श्रद्धा की लहर और सिंहस्थ-2028 से पहले प्रस्तावित देवी लोक की तैयारी इस सिद्धपीठ के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद जगाती है।
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