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धार्मिक महत्व, वास्तुकला की दृष्टि से उत्कृष्ट, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मंदिरों मे से एक है – रतनपुर का महामाया मंदिर

13 Oct 2026, 12:17 PM • Vande Bharat Live TV News
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धार्मिक महत्व, वास्तुकला की दृष्टि से उत्कृष्ट, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मंदिरों मे से एक है - रतनपुर का महामाया मंदिर - गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, छत्तीसगढ़

शारदीय नवरात्रि में हम छत्तीसगढ प्रदेश के देवी मंदिरों के विषय में बताने जा रहें हैं , आज हम बता रहें है, छत्तीसगढ प्रदेश के बिलासपुर जिले के अंतर्गत मां महामाया देवी मंदिर रतनपुर के बारे में । प्रिय दर्शकों/ पाठकगणों, दक्षिण पूर्वी भारत क्षेत्र के सबसे अधिक धार्मिक महत्व वाले ,वास्तुकला की नजर से उत्कृष्ट, सांस्कृतिक रूप से समृद्धशाली, मंदिरों में एक देवी मंदिर है, रतनपुर की श्री महामाया देवी माता।

आज हम इसी मंदिर के विषय में बता रहें, श्री महामाया देवी मंदिर छत्तीसगढ प्रदेश की न्यायधानी .बिलासपुर जिले के अंतर्गत रतनपुर नामक एक छोटे से शहर में स्थित है। मां महामाया देवी का यह मंदिर दशकों से देवी के भक्तजनों, इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है।

देवी मां महामाया रतनपुर का यह मंदिर, सुंदर हरे भरे पहाड़ो के घिरा हुआ, सुंदर तालाबों से युक्त यह रतनपुर शहर, वर्ष के दोनों( चैत्र वासंतीय, और अश्विन मास शारदीय नवरात्र) के दौरान यहां पर हर वर्ष हजारों- लाखों की संख्या में देवी मां के श्रद्धालु भक्तजनों भरा हुआ रहता है। भक्तगण यहां प्रतिवर्ष नवरात्रि के समय देवी माता के दिव्य त्रिमूर्ति के दर्शन के लिए पहुंचतें हैं ,और देवी के दर्शन पा कर अपने आप को धन्य मानते हैं।

छत्तीसगढ प्रदेश की न्यायाधानी बिलासपुर शहर से मात्र पच्चीस किमी. की दूरी पर बिलासपुर- अंबिकापुर राजमार्ग पर स्थित यह देवी महामाया जी का मंदिर और मंदिर के आसपास के कई अन्य छोटे बड़े मंदिर, गुबंदों, महलों,किले, जो कि अब जीर्ण शीर्ण भी हो चुकें हैं, अपनी एक कहानी को दर्शाते हैं।

कलचुरी कालीन राजाओं की राजधानी रहे, इस रतनपुर शहर का इतिहास करीब करीब एक सहस्राब्दी पुरातन है। देवी महामाया का यह मंदिर, नागरशैली वास्तुकला से निर्मित है।.यह.मंदिर सोलह स्तंभों पर टिका हुआ करीब 12वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास निर्मित माना जाता है।

देवी महामाया मंदिर रतनपुर के मुख्य परिसर में महाबली हनुमान, भगवान शिव, भैरव, भगवान विष्णु, सूर्यदेव, भद्रकाली, महाकाली आदि की छोटी मूर्तियां भी यहां विराजमान हैं। माना जाता है कि देवी महामाया की सर्वप्रथम पूजा अभिषेक कलिंग के राजा रत्नदेव ने 1050 ईस्वी में इसी जगह पर किया था, और जब रत्नदेव ने अपनी राजधानी को तुफान से रत्नपुर( रतनपुर का का तत्कालीन नाम) स्थानांतरित किया था।.रत्नदेव और उनके वंशजों ने रत्नपुर को अपनी राजधानी बनाया,और महल किले, मंदिर भी बनवाए, जिनके जीर्ण शीर्ण अवशेष अभी भी वहां पर देखे जा सकतें हैं।

मां महामाया जी का मुख्य मंदिर परिसर में प्रसिद्ध कांची देवल मंदिर, और मंदिर के मुख्य तालाब के सामने महामाया जी की दो भव्य प्रतिमाएं स्थित हैं। मंदिर की आगे वाली प्रतिमा को महिषासुर मर्दिनी और पीछे वाली प्रतिमा को देवी सरस्वती की प्रतिमा माना जाता है।

मंदिर में आमतौर पर देखने वालों को पीछे वाली प्रतिमा पर नजर नहीं जाता है। चैत्र वासंतीय और अश्विन शारदीय नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु भक्तगण देश परदेश से भी देवी मां के दर्शन पूजा वंदना के लिए यहां पर पहुंचतें हैं।

महामाया देवी मुख्य मंदिर के चारों तरफ की हाॅल भी बने हुए हैं, जहां पर मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालु भक्तगणों की ओर से अखंड ज्योति कलश प्रज्वलित किए जातें हैं, और यह अखंड ज्योति कलश नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिनों तक प्रज्वलित रहतें हैं, इन्हें अखंड मनोकामना नवरात्रि ज्योति कलश भी कहतें हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां पर देवी महामाया के मंदिर में किए गए व्रत पूजा अनुष्ठान कभी निष्फल नहीं जाते हैं।

देवी महामाया मंदिर के और आसपास कई अनेक मंदिर भी है, जिनका कि ऐतिहासिक, पुरातात्विक महत्व समान रूप से अधिक है। इन सबके महत्वपूर्ण है, महामृत्युंजय पंचमुखी शिव का मंदिर और कांची देवल।

पंचमुखी शिव मंदिर लाल रंग के पत्थर से बना हुआ एक भव्य वास्तुकला है,और ऐसा माना जाता है कि यहीं से महामाया देवी की प्रतिमा का उद्गम स्थल भी है। कांची देवल मंदिर अष्टकोणीय आकर का है।

देवी मां महामाया के भक्तजन नवरात्रि के दौरान यहां पर अखंड मनोकामना दीप ज्योति कलश प्रज्वलित करवा सकतें हैं। अखंड मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित करने के ऑनलाइन, किसी भी बैंक एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा का उपयोग करके भी किया जा सकता है।

देवी महामाया मंदिर रतनपुर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे-स्टेशन बिलासपुर है, यहां से बस, ऑटोरिक्सा के माध्यम से रतनपुर आसानी के साथ पहुंचा जा सकता है। ईश्वर में आस्था, विश्वास श्रद्धा रखने वालों को एकबार यहां महामया देवी मंदिर जरूर आना चाहिए।

देवी महामाया मंदिर रतनपुर पहुंचने के लिए छत्तीसगढ प्रदेश का सबसे नजदीकी रेलवे-स्टेशन बिलासपुर है, यहां से बस ,ऑटोरिक्सा के माध्यम से आसानी से रतनपुर पहुंचा जा सकता है। , आशा है कि यह जानकारी आपके काम आयेगी।

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