
*कवर्धा में ‘चूहे’ डकार गए 7 करोड़ का धान राजेश मुकर्जी*

तिलक राम पटेल संपादक महासमुन्द वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़ चैनल समृद्ध भारत अखबार
किसान कांग्रेस के कोषाध्यक्ष श्री राजेश मुकर्जी ने कहा की चूहें इतने भूखे की धान का छिलका भी खा गये चुकी
कवर्धा में ‘चूहे’ डकार गए 7 करोड़ का धान: भ्रष्टाचार हुआ है वह सब जनता के सामने है छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से धान खरीदी और संग्रहण में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के संग्रहण केंद्रों से लगभग 26 हजार क्विंटल धान गायब है, जिसकी कीमत करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है। विभाग के अधिकारी इस भारी कमी का ठीकरा ‘चूहों, दीमक और मौसम’ के सिर फोड़ रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत में फर्जीवाड़े और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की बू आ रही है।
जिला विपणन अधिकारी (DMO) अभिषेक मिश्रा का इस मामले पर तर्क बेहद चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि धान की यह कमी प्राकृतिक कारणों, मौसम के प्रभाव और चूहों-कीड़ों द्वारा नुकसान के चलते हुई है। अधिकारी ने अपनी सफाई में यहाँ तक कह दिया कि प्रदेश के अन्य 65 संग्रहण केंद्रों की तुलना में कवर्धा की स्थिति फिर भी बेहतर है। सवाल यह है कि क्या अन्य जिलों की खराब स्थिति कवर्धा में हुए 7 करोड़ के नुकसान को जायज ठहराती है?
फर्जी बिल और गायब CCTV फुटेज
कवर्धा के ही ‘बाजार चारभाठा’ संग्रहण केंद्र में गड़बड़ी के जो सबूत मिले हैं, वे विभाग के ‘चूहे-दीमक’ वाले दावों की हवा निकाल रहे हैं। जांच में सामने आया है कि:
फर्जी बिलिंग: गायब धान की भरपाई करने के लिए ‘डैमेज धान’ खरीदी के फर्जी बिल बनाए गए।
कागजी मजदूर: मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर राशि का गबन किया गया।
साक्ष्यों को मिटाना: केंद्र में लगे CCTV कैमरों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई ताकि अवैध परिवहन या हेराफेरी पकड़ी न जा सके।
जांच पर सवाल: निलंबन और FIR में ढिलाई क्यों?
विभागीय नियमों के अनुसार, यदि संग्रहण केंद्र में 2 प्रतिशत से अधिक धान कम पाया जाता है, तो संबंधित प्रभारी को तत्काल निलंबित कर जांच के बाद FIR दर्ज कराने का प्रावधान है।
अब जनता और जानकार यह सवाल पूछ रहे हैं:
अगर धान वाकई चूहों ने खाया है, तो प्रभारी को पद से क्यों हटाया गया?
यदि सब कुछ पारदर्शी था, तो CCTV कैमरों से छेड़छाड़ की जरूरत क्यों पड़ी?
फर्जी आवक-जावक की एंट्री और फर्जी बिल किसने और किसके शह पर बनाए?
निष्कर्ष
अधिकारियों का यह कहना कि “बाकी जगह स्थिति और खराब है”, सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को सामान्य मानने जैसा है। 26 हजार क्विंटल धान का गायब होना सिर्फ ‘प्राकृतिक क्षति’ नहीं, बल्कि एक सुनियोजित घोटाला प्रतीत होता है। क्या प्रशासन इन ‘सफेदपोश चूहों’ पर कार्रवाई करेगा या मामले को फाइलों में ही दबा दिया जाएगा मुकर्जी ने कहा की सरकार इस पर जल्द से जल्द कार्यवाही करे




