
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। बस्ती: सरोज गैस एजेंसी की मनमानी से फूटा उपभोक्ताओं का गुस्सा, रोती बिलखती महिला ने खोली पोल ।।
🔥 “बस्ती में ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’: सिलेंडर मिला नहीं और रसीद कट गई, सरोज गैस एजेंसी में उपभोक्ताओं की जेब पर डाका!”
बस्ती (यूपी): जिले के विक्रमजोत स्थित सरोज इंडियन गैस एजेंसी इन दिनों अपनी तानाशाही और उपभोक्ताओं के उत्पीड़न को लेकर सुर्खियों में है। आपदा में अवसर तलाशने के खेल में एजेंसी के मालिक और कर्मचारी इस कदर मशगूल हैं कि उन्हें आम जनता की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं रह गया है। सोमवार को एजेंसी पर उपभोक्ताओं का सब्र उस वक्त टूट गया जब कई दिनों से भटक रहे ग्राहकों ने कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
💫 महीनों का इंतज़ार और कर्मचारियों की बदसलूकी
एजेंसी पर गैस लेने आई फरीदा नाम की महिला की हालत देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। फरीदा गैस न मिलने की हताशा में जमीन पर बैठकर फूट-फूट कर रोने लगी। उसने बताया कि, “मैंने 6 फरवरी को गैस बुक की थी, आज 16 मार्च हो गया है, लेकिन चूल्हा जलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।” फरीदा का आरोप है कि जब वह एजेंसी आती है, तो कर्मचारी न केवल टालमटोल करते हैं, बल्कि अभद्रता पर भी उतारू हो जाते हैं।
💫 गैस मिला नहीं, पर पोर्टल पर दिखा दिया ‘डिलीवर’
उपभोक्ता अनीता सिंह, गंगोत्री और वसीम ने एक बड़े घोटाले की ओर इशारा किया है। उन्होंने बताया कि एजेंसी की मनमानी का आलम यह है कि बिना सिलेंडर दिए ही मोबाइल पर ‘गैस रिसीव’ होने का मैसेज आ जाता है। पोर्टल पर डिलीवरी दिखाकर कालाबाजारी की आशंका जताई जा रही है। सवाल यह उठता है कि जब उपभोक्ता को गैस मिली ही नहीं, तो वह रिसीव कैसे हो गई?
💫 190 रुपये की पाइप का जबरन बोझ
पीड़ित उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी के कर्मचारी सीधे मुंह बात नहीं करते और गैस देने के बदले जबरन 190 रुपये की पाइप थमा दे रहे हैं। जो ग्राहक पाइप लेने से मना करता है, उसे बिना सिलेंडर के ही वापस लौटा दिया जाता है। यह ‘जबरिया वसूली’ खुलेआम जारी है, लेकिन स्थानीय जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
“विक्रमजोत में स्थित इस एजेंसी की अगर प्रशासन निष्पक्ष जांच करे, तो कागजों में हो रही हेराफेरी और उपभोक्ताओं के हक पर डाका डालने का बड़ा खेल उजागर हो सकता है।” — सूत्र
💫 प्रशासन की रडार पर ‘अवसरवादी’ मालिक
बताया जा रहा है कि इस मामले की गूंज अब प्रशासनिक गलियारों तक पहुँच चुकी है। आपदा और किल्लत के नाम पर ग्राहकों को लूटने वाले गैस एजेंसी मालिकों पर प्रशासन की कड़ी नजर है। अब देखना यह है कि क्या फरीदा जैसी बेबस महिलाओं को उनका हक मिलता है या सरोज गैस एजेंसी के कर्मचारियों की गुंडागर्दी और मनमानी यूँ ही बरकरार रहेगी।
😇 अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल: “हैरानी की बात यह है कि उपभोक्ता सड़कों पर रो रहे हैं और संबंधित विभाग चैन की नींद सो रहा है। क्या जिला प्रशासन किसी बड़े हंगामे का इंतज़ार कर रहा है?”
😇 कर्मचारियों का व्यवहार: “एजेंसी के कर्मचारियों का अहंकार सातवें आसमान पर है, जहाँ ग्राहक को भगवान नहीं बल्कि एक मूक शिकार समझा जा रहा है।”




















