
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨सिस्टम की ‘सेहत’ खराब, भ्रष्टाचार की फाइल पर 05 माह से कुंडली मारकर बैठा विभाग🚨
⭐कैबिनेट मंत्री के आदेश को ‘ठेंगा’, क्या बस्ती में ‘अंगद के पैर’ की तरह जमे भ्रष्टाचार को उखाड़ पाएंगी डीएम कृतिका ज्योत्सना?
⭐”डीएम कृतिका ज्योत्सना की साख दांव पर: क्या आउटसोर्सिंग भर्ती के ‘महाघोटाले’ पर चलेगा चाबुक या फिर रफा-दफा होगी फाइल?”
⭐”जीरो टॉलरेंस की उड़ी धज्जियां: बस्ती स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का ‘सिंडिकेट’, मंत्री के निर्देश को भी अफसरों ने माना रद्दी!”
⭐”बस्ती: भ्रष्टाचार की ‘अजेय’ सहायिका! 150 दिन, 2 मंत्री-पत्र और शून्य कार्रवाई; आखिर किसका संरक्षण?”
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
बस्ती। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को ठेंगा दिखाने का एक बड़ा मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय बस्ती में सामने आया है। यहाँ तैनात वरिष्ठ सहायिका कनिज फातिमा के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच पिछले पांच महीनों से फाइलों और विभागीय सांठगांठ के दलदल में फंसी हुई है। हैरत की बात यह है कि खुद प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर के कड़े निर्देश के बावजूद अब तक निष्पक्ष जांच तो दूर, विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ‘लीपापोती’ के खेल में जुटे नजर आ रहे हैं।
💫भ्रष्टाचार का ‘कॉकटेल’: 20% कमीशन और आउटसोर्सिंग का खेल
शिकायती पत्रों और चर्चाओं के अनुसार, कनिज फातिमा वर्षों से एक ही पटल पर ‘अंगद’ की तरह पैर जमाए बैठी हैं। आरोप है कि उनके कार्यालय में बिना 20 प्रतिशत कमीशन लिए कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। सबसे गंभीर आरोप वर्ष 2024 में ‘अवनी परिधि’ कंपनी के माध्यम से हुई आउटसोर्सिंग भर्तियों को लेकर है। चर्चा है कि जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर फर्जी नियुक्तियां की गईं, जिसने सरकार की पारदर्शी छवि पर गहरा दाग लगाया है।
💫जांच के नाम पर ‘मैच फिक्सिंग’?
जब मामला कैबिनेट मंत्री तक पहुँचा, तो पूर्व जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने 16 अक्टूबर 2025 को एडी स्वास्थ्य (AD Health) डॉ. अश्विनी कुमार को जांच सौंपी थी। लेकिन आरोप है कि एडी स्वास्थ्य ने जांच करने के बजाय उसे ‘रफा-दफा’ करने में अधिक रुचि दिखाई।
बड़ा सवाल: क्या एडी स्वास्थ्य पूर्व जिलाधिकारी के आदेशों को दरकिनार कर कनिज फातिमा को ‘क्लीन चिट’ देने की स्क्रिप्ट पहले ही लिख चुके थे? 05 माह बीतने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होना विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
💫कैबिनेट मंत्री का दोबारा चाबुक, डीएम ने फिर सौंपी जांच
मामले की गंभीरता और पहली जांच में हुई लीपापोती को देखते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने दोबारा 05 मार्च को जिलाधिकारी बस्ती को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की। इसी क्रम में वर्तमान जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्सना ने 18 मार्च 2025 को पुनः एडी हेल्थ को जांच के निर्देश दिए हैं।
💫 क्यों नहीं हो पाती कार्रवाई?
अखबार की पड़ताल में कुछ अहम बिंदु सामने आते हैं:
🔥पटल परिवर्तन का अभाव: आखिर क्या वजह है कि गंभीर आरोपों के बावजूद फातिमा से चिकित्सा पूर्ति भुगतान एवं आउटसोर्सिंग का चार्ज वापस नहीं लिया गया?
🔥विभागीय सिंडिकेट: क्या एडी स्वास्थ्य कार्यालय और सीएमओ कार्यालय के बीच कोई ऐसा ‘अदृश्य समझौता’ है जो जांच की आंच को रसूखदारों तक पहुँचने से रोक रहा है?
🔥सरकार की छवि पर प्रहार: एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं, वहीं बस्ती का स्वास्थ्य विभाग मंत्रियों के आदेशों को भी रद्दी की टोकरी में डालने का दुस्साहस कर रहा है।
💫अब जनता की नजरें डीएम पर
शहर के चौक-चौराहों पर चर्चा है कि क्या जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्सना इस बार इस ‘सिंडिकेट’ को तोड़ पाएंगी? क्या कनिज फातिमा के खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या एक बार फिर ‘लेन-देन’ का खेल जांच की धार को कुंद कर देगा?
बस्ती की जनता और पीड़ित कर्मचारी अब न्याय की उम्मीद में कलेक्ट्रेट की ओर देख रहे हैं। देखना यह है कि इस बार ‘भ्रष्टाचार की फाइलों’ का दहन होता है या फिर जांच अधिकारी के दराज में एक और रिपोर्ट दफन हो जाती है।
👉यहाँ समझिए कि कैसे एक गंभीर भ्रष्टाचार की जांच को फाइलों के जाल में उलझाया गया:
⭐16 अक्टूबर 2025: कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर की शिकायत पर तत्कालीन डीएम रवीश गुप्ता ने एडी हेल्थ डॉ. अश्विनी कुमार को जांच सौंपी।
⭐अक्टूबर 2025 – फरवरी 2026: जांच के नाम पर महीनों की खामोशी। आरोप है कि इस दौरान साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और ‘लेन-देन’ का खेल पर्दे के पीछे चलता रहा।
⭐05 मार्च 2026: निष्पक्ष जांच न होने पर कैबिनेट मंत्री ने दोबारा कड़ा पत्र जिलाधिकारी बस्ती को भेजा।
⭐18 मार्च 2026: वर्तमान डीएम कृतिका ज्योत्सना ने कड़ा रुख अपनाते हुए एडी हेल्थ को फिर से जांच के आदेश दिए।
📢वर्तमान स्थिति: 05 माह बीतने के बाद भी वरिष्ठ सहायिका कनिज फातिमा अपने पद पर बरकरार हैं और जांच अभी भी ‘शून्य’ पर खड़ी है।
“क्या पटल परिवर्तन न होना जांच को प्रभावित करने की सोची-समझी रणनीति है?” — यह सवाल आज बस्ती के स्वास्थ्य महकमे में गूँज रहा है।
👉एक नज़र आरोपों के ‘कॉकटेल’ पर:
⭐पटल का मोह: वर्षों से एक ही सीट पर कब्जा।
⭐कमीशन का गणित: हर फाइल पर 20% ‘सेवा शुल्क’ का आरोप।
⭐भर्ती घोटाला: ‘अवनी परिधि’ कंपनी के जरिए आउटसोर्सिंग में चहेतों को रेवड़ियाँ बांटना।
ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती।



















