


सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर मकरोनिया की सड़कें तब भक्ति के सागर में डूब गईं, जब ‘श्री रामभक्त संगठन’ द्वारा आयोजित श्री हनुमंत पालकी यात्रा अपने पूरे वैभव के साथ निकली। सिद्धेश्वरी चिंता हरण हनुमान जी मंदिर से प्रारंभ हुई इस दिव्य यात्रा ने आध्यात्मिकता का ऐसा समागम प्रस्तुत किया, जिसने समूचे क्षेत्र को ‘हनुमानमय’ कर दिया। सिद्धेश्वरी मंदिर, मकरोनिया थाने के पास से श्री राम दरबार, दीनदयाल नगर तक आयोजित इस शोभायात्रा में जन-सैलाब का आलम यह था कि श्रद्धालुओं की पलकें अपने आराध्य की एक झलक पाने को आतुर दिखीं। मार्ग में जगह-जगह भव्य स्वागत द्वार बनाए गए थे, जहाँ दीप आरती और पुष्प वर्षा के साथ पालकी का अभिनंदन किया गया। विशेष रूप से युवाओं की ऊर्जा और जय श्री राम के उद्घोषों ने वातावरण में अभूतपूर्व प्राण फूँक दिए। नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया के सानिध्य में आयोजित इस महोत्सव में उनकी गहरी आस्था देखते ही बन रही थी। विधायक श्री लारिया ने स्वयं पुष्प वर्षा कर पालकी की आगवानी की और संकटमोचन के चरणों में शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने इस आयोजन को सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति का गौरव बताया। शास्त्रों में हनुमान जी को ‘कलयुग का जाग्रत देवता’ माना गया है। आज के इस तनावपूर्ण और अनिश्चित युग में, हनुमान जी साहस, अटूट भक्ति और संकटों से मुक्ति के प्रतीक हैं। मकरोनिया में प्राकट्योत्सव पर उमड़ा यह हुजूम सिद्ध करता है कि लोग अपने आंतरिक भय और बाधाओं को दूर करने के लिए हनुमान जी की शरण में आते हैं। हनुमान जी ‘सेवक’ और ‘रक्षक’ दोनों हैं, यही जुड़ाव भक्तों को भावुक कर देता है। भक्तों का विश्वास है कि हनुमान जी की कृपा से ही जीवन में भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति संभव है। इस प्रकार के सामूहिक आयोजनों में सहभागिता मात्र एक यात्रा नहीं, बल्कि एक साधना है। पालकी यात्रा से जुड़ने पर आध्यात्मिक लाभों की अनुभूति होती है। जब हजारों लोग एक साथ सिर झुकाते हैं, तो व्यक्तिगत अहंकार समाप्त होता है और सामूहिक चेतना जागृत होती है। ढोल-नगाड़ों, मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन के बीच चलने से मन के नकारात्मक विचार नष्ट होते हैं। सामूहिक प्रार्थना में जो शक्ति होती है, वह व्यक्तिगत बाधाओं को दूर कर जीवन में नई दिशा प्रदान करती है। मकरोनिया की यह पालकी यात्रा केवल एक शोभायात्रा नहीं थी, बल्कि यह भक्ति की पराकाष्ठा और सनातन संस्कृति की विजय का जीवंत प्रमाण थी। “कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहीं होय तात तुम पाहीं।” (संसार में ऐसा कौन सा कठिन कार्य है, जो हे हनुमान जी, आपके द्वारा संभव न हो।






