
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। दरोगा से प्रधान बने राम सुभाव पर सत्ता का नशा: निजी दुश्मनी निकालने के लिए बी.डी.ओ. के साथ मिलकर रच रहे कुचक्र ।।
⭐ साऊँघाट बी.डी.ओ. की शह पर पीड़ित का सहन उजाड़ने की तैयारी, बिना जरूरत नाली निर्माण का आरोप
⭐ चुनावी रंजिश में ग्रामीणों को प्रताड़ित करने का खेल, पुलिस के हस्तक्षेप से रुका काम।
उत्तर प्रदेश।।
सल्टौवा गोपालपुर, बस्ती।। सत्ता और पद का रसूख जब निजी खुन्नस निकालने का जरिया बन जाए, तो विकास कार्य भी विनाश का हथियार बन जाते हैं। ताजा मामला विकास खंड साऊँघाट की ग्राम पंचायत तरेता का है, जहाँ रिटायर्ड दरोगा और वर्तमान ग्राम प्रधान राम सुभाव पर पद के दुरुपयोग और ग्राम निवासी रामवृक्ष के साथ व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के गंभीर आरोप लगे हैं।
⭐बी.डी.ओ. का ‘संरक्षण’ और प्रधान की मनमानी
सूत्रों का दावा है कि खंड विकास अधिकारी (BDO) साऊँघाट की मिलीभगत और प्रत्यक्ष संरक्षण के चलते प्रधान के हौसले बुलंद हैं। आरोप है कि प्रधान राम सुभाव अपनी पुरानी ‘पुलिसिया’ धौंस और वर्तमान पद का इस्तेमाल उन लोगों को निशाना बनाने के लिए कर रहे हैं, जिन्होंने चुनाव में उनका समर्थन नहीं किया था। इसी कड़ी में, ग्राम निवासी रामवृक्ष के पुश्तैनी सहन (आंगन/खाली जमीन) को बर्बाद करने की नीयत से वहां बिना किसी आवश्यकता के नाली निर्माण का ताना-बना बुना जा रहा है।
⭐विकास की आड़ में रंजिश का ‘कुचक्र’
ग्रामीणों में चर्चा है कि जिस स्थान पर नाली बनाने का प्रयास किया जा रहा है, वहां वास्तव में इसकी कोई उपयोगिता नहीं है। यह केवल रामवृक्ष को आर्थिक और मानसिक क्षति पहुंचाने तथा उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की एक सोची-समझी साजिश है। प्रधान की इस तानाशाही को देख गांव में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है।
⭐पुलिस के हस्तक्षेप से थमा काम
मामले की गंभीरता और प्रधान की मंशा को भांपते हुए पीड़ित रामवृक्ष ने तत्परता दिखाते हुए पीआरवी 112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति का जायजा लिया और फिलहाल निर्माण कार्य को रुकवा दिया है। वर्तमान में मौके पर शांति व्यवस्था बनी हुई है, लेकिन ग्रामीणों में इस प्रशासनिक सांठगांठ को लेकर भारी आक्रोश है।
🔥सत्ता का दुरुपयोग: “ऐसा प्रतीत होता है कि रिटायर्ड दरोगा राम सुभाव अभी भी पुलिसिया रौब से बाहर नहीं निकल पाए हैं। प्रधान पद की गरिमा को ताक पर रखकर वे इसे व्यक्तिगत बदला लेने का हथियार बना रहे हैं।”
🔥प्रशासन पर सवाल: “आखिर बी.डी.ओ. साऊँघाट की क्या मजबूरी है कि वे बिना जरूरत के हो रहे इस निर्माण कार्य को संरक्षण दे रहे हैं? क्या भ्रष्टाचार और रंजिश की इस जुगलबंदी की जाँच जिला प्रशासन करेगा?”
🔥जनता का दर्द: “विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होता है, न कि किसी के घर-आँगन (सहन) को उजाड़कर उसे मानसिक प्रताड़ना देना।”
“क्या एक रिटायर्ड जिम्मेदार अधिकारी से उम्मीद की जा सकती है कि वह प्रधान बनते ही नियमों को ताक पर रखकर निजी रंजिश पालेगा? और आखिर साऊँघाट बी.डी.ओ. इस अवैध जिद को मौन सहमति क्यों दे रहे हैं?” — ग्रामीणों का सवाल
















