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घरेलू कलह बना मौत का कारण: पत्नी, भाई और रिश्तेदार ने मिलकर उतारा मौत के घाट

यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस दर्दनाक स्थिति की कहानी है, जहां घरेलू हिंसा, नशे की लत और सामाजिक चुप्पी मिलकर एक परिवार को अपराध की ओर धकेल देती है।


बलौदा बाजार/पलारी।
ग्राम बिनौरी से एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ है, जिसने रिश्तों की नींव को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस थाना पलारी ने एक अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाते हुए मृतक की पत्नी, सगे भाई और एक रिश्तेदार को गिरफ्तार किया है। यह हत्या कोई अचानक की गई वारदात नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के खिलाफ उपजा आक्रोश था, जिसने एक भयावह साजिश का रूप ले लिया।
मृतक रामकुमार साय (37 वर्ष) की मौत पहले संदिग्ध लगी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इसे साफ तौर पर हत्या करार दिया। इसके बाद पुलिस ने सूक्ष्मता से जांच शुरू की—जहां हर बयान, हर हावभाव और हर छुपी हुई बात को बारीकी से परखा गया।
मनोवैज्ञानिक पूछताछ ने खोला सच का दरवाजा
पुलिस ने आरोपियों से अलग-अलग और गहन पूछताछ की। मनोवैज्ञानिक तकनीकों और भावनात्मक सवालों के जरिए उनके बयानों में छिपे विरोधाभासों को पकड़ा गया। आरोपी पहले से ही जवाबों की तैयारी करके आए थे, लेकिन सच्चाई के सामने उनकी चालाकी ज्यादा देर टिक नहीं सकी।
हत्या के पीछे की दर्दनाक वजह
जांच में सामने आया कि मृतक शराब का आदी था और रोजाना नशे में घर लौटकर पत्नी और परिजनों के साथ मारपीट करता था। इतना ही नहीं, उसने अपनी ही बेटी के प्रति भी गलत नजर रखनी शुरू कर दी थी। यह स्थिति परिवार के लिए असहनीय बन गई थी।
इसी प्रताड़ना से तंग आकर मृतक की पत्नी मीना बाई साय, भाई महावीर साय और रिश्तेदार वैभव उर्फ अंशु बघेल ने मिलकर हत्या की योजना बनाई।
साजिश से सबूत मिटाने तक
29-30 मार्च की रात, जब रामकुमार साय गहरी नींद में था, तब तीनों आरोपियों ने गमछे से उसका गला घोंट दिया। हत्या के बाद सबूत छिपाने के लिए गमछे को पत्थर से बांधकर कुएं में फेंक दिया गया।
लेकिन पुलिस की सटीक जांच और फोरेंसिक टीम की मदद से यह साक्ष्य बरामद कर लिया गया।
एक झूठ ने बढ़ाया शक
परिजनों द्वारा एक रिश्तेदार (भतीजे) की घटना स्थल पर मौजूदगी छिपाने की कोशिश ने पुलिस के शक को और गहरा कर दिया। वहीं, एक आरोपी का घटना के बाद रायपुर भाग जाना भी संदेह का कारण बना, जिसे बाद में तलब कर सख्ती से पूछताछ की गई और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस की सतर्कता और टीमवर्क से सुलझी गुत्थी
पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में थाना पलारी की टीम ने इस जटिल मामले को परत-दर-परत सुलझाया। वैज्ञानिक साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और गहन पूछताछ के समन्वय से सच्चाई सामने आई।
आरोपी गिरफ्तार, न्याय की प्रक्रिया जारी
पुलिस ने तीनों आरोपियों—
महावीर साय (40 वर्ष)
मीना बाई साय (36 वर्ष)
वैभव उर्फ अंशु बघेल (19 वर्ष)
को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एक सवाल छोड़ गया यह मामला
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस दर्दनाक स्थिति की कहानी है, जहां घरेलू हिंसा, नशे की लत और सामाजिक चुप्पी मिलकर एक परिवार को अपराध की ओर धकेल देती है।
क्या समय रहते मदद और हस्तक्षेप मिलता, तो क्या यह त्रासदी टल सकती थी? यह सवाल आज भी समाज के सामने खड़ा है।

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