
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। सफेदपोश होते दागदार चेहरे, बस्ती में ‘नशे के सौदागरों’ को राजनीति का संरक्षण ।।
🚨सफेदपोश होते ‘दागदार’ चेहरे: हर्रैया में गांजा माफिया को मिला ‘माननीय’ का टैग।
🚨खादी की आड़ में ‘स्मैक’ का खेल: क्या नशे के सौदागर चलाएंगे सरकार?
🚨जीरो टॉलरेंस या ‘तस्कर’ टॉलरेंस? बस्ती बीजेपी अध्यक्ष के फेसबुक वॉल से मचा हड़कंप।
🚨बस्ती में ‘माफिया’ अब ‘माननीय’: गांजा तस्करी के मुकदमों के बीच आखिर क्यों मेहरबान है सत्ता?
🚨क्या तस्करों के रसूख के आगे नतमस्तक हुआ संगठन? हर्रैया नगर पंचायत में चर्चा आम।
उत्तर प्रदेश।
बस्ती।। कभी ‘साहित्य की धरती’ कही जाने वाली बस्ती जनपद की आबोहवा में अब गांजा और स्मैक के धुएं की कड़वाहट घुलने लगी है। विडंबना देखिए, जिन कंधों पर समाज को नशामुक्त करने की जिम्मेदारी होनी चाहिए थी, राजनीति की वैतरणी पार करने के लिए दल उन्हीं ‘काले कारोबारियों’ को ‘माननीय’ का चोला ओढ़ा रहे हैं। ताजा मामला हर्रैया नगर पंचायत से जुड़ा है, जिसने सत्ताधारी दल की शुचिता के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
😇अपराध का ‘माननीय’ अवतार
बस्ती सहित आस-पास के जिलों में गांजा तस्करी के दर्जनों मुकदमों में नामजद रहे दीपक चौहान को बीजेपी द्वारा ‘माननीय’ का दर्जा देना चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ सरकार “जीरो टॉलरेंस” की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ हिस्ट्रीशीटरों और अवैध तस्करों के लिए रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है।
🔥बड़ा सवाल: क्या राजनीतिक दल अब इतने मजबूर हो गए हैं कि उन्हें संगठन चलाने के लिए नशे के सौदागरों के रसूख और रुपयों की जरूरत पड़ रही है?
😇सोशल मीडिया पर ‘माननीय’ का महिमामंडन
हैरत की बात तो तब हुई जब भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष और पूर्व सांसद जैसे कद्दावर नेताओं ने अपने फेसबुक वॉल पर इस कथित ‘माननीय’ का प्रचार किया। जैसे ही गांजा तस्कर का नाम क्षेत्र में सार्वजनिक हुआ, आम जनता के बीच यह कौतूहल और आक्रोश का विषय बन गया है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब बस्ती की पहचान अवैध स्मैक और गांजा सप्लाई करने वालों से होगी?
😇बस्ती की बर्बादी का रोडमैप
अवैध तस्करी से कमाया गया पैसा जब चुनाव में पानी की तरह बहाया जाता है, तो लोकतंत्र की जड़ें खोखली होने लगती हैं। हर्रैया से लेकर पूरी जनपद में स्मैक और गांजे का जाल बिछाने वाले इन सफेदपोशों ने युवाओं के भविष्य को दांव पर लगा दिया है।
🔥सत्ता का संरक्षण: तस्करों को पता है कि एक बार ‘माननीय’ का टैग लग गया, तो खाकी भी उनके सामने नतमस्तक रहेगी।
🔥कार्यकर्ताओं में रोष: पार्टी के पुराने और ईमानदार कार्यकर्ता इस ‘अपराधीकरण’ को देख ठगे से महसूस कर रहे हैं।
यदि समय रहते इन ‘नशे के सौदागरों’ से राजनीति को मुक्त नहीं किया गया, तो बस्ती जनपद की गलियों में विकास की नहीं, बल्कि नशे की गूंज सुनाई देगी। शीर्ष नेतृत्व को जवाब देना होगा कि उनकी प्राथमिकता जनसेवा है या दागदार चेहरों को ‘माननीय’ बनाना?




















