

मेरठ नगर निगम की घोर लापरवाही उजागर – सीएम, पीएम पोर्टल और राज्य मंत्री के पत्र के बाद भी अवैध डेरी पर कार्रवाई ठप
मेरठ | 11 सितम्बर 2025 | विशेष पड़ताल रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में नगर निगम की लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। यह मामला केवल गंदगी और अवैध डेरी संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि किस तरह से नागरिकों की शिकायतें शासन-प्रशासन तक पहुंचने के बावजूद वर्षों तक अनसुनी कर दी जाती हैं। देवता पुरम देवलोक कॉलोनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में अवैध डेरी संचालन और उससे फैल रही गंदगी की शिकायत वर्ष 2022 से लगातार उठ रही है। शिकायतकर्ता मनोज सिंह ने सीएम पोर्टल, पीएम पोर्टल, नगर निगम पोर्टल और यहां तक कि राष्ट्रपति तक शिकायतें दर्ज कीं, लेकिन वास्तविक कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी। मनोज सिंह का कहना है कि उन्होंने इस गंभीर समस्या के खिलाफ बार-बार शिकायतें दर्ज करवाईं। नगर निगम की ओर से नोटिस भी जारी हुआ और जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से यह जुर्माना अब तक वसूला ही नहीं गया। नतीजा यह है कि अवैध डेरी संचालक खुलेआम अपना व्यवसाय चला रहे हैं। खुले नालों में गंदा पानी बहाने, गोबर और कचरा फैलाने से कॉलोनी की सूरत बिगड़ चुकी है। बदबू और मच्छरों के कारण स्थानीय लोग रोजाना बीमारियों के खतरे से जूझ रहे हैं। प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री राकेश राठौर “गुरु” ने भी नगर आयुक्त मेरठ को लिखित रूप से निर्देश दिए थे कि इस मामले में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए। यह पत्र साफ संकेत था कि शिकायत गंभीर है और इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन नगर निगम अधिकारियों ने मंत्री के आदेश तक को नजरअंदाज कर दिया। यह स्थिति न केवल सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता दर्शाती है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि आखिर किसके संरक्षण में ये अवैध डेरी संचालक इतने वर्षों से बेखौफ कारोबार चला रहे हैं। कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि डेरी से निकलने वाला गंदा पानी खुले नालों में बहाने के कारण सड़ांध और बदबू पूरे क्षेत्र में फैल जाती है। बरसात के दिनों में यह समस्या और विकराल हो जाती है। मच्छरों और गंदगी से बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ती रहती है। कई लोग डेंगू, मलेरिया और स्किन इंफेक्शन जैसी बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। बावजूद इसके नगर निगम केवल नोटिस तक सीमित रह गया है। इस पूरे मामले ने नगर निगम मेरठ की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायतें, राज्य मंत्री का पत्र और नगर निगम का जुर्माना तक कोई असर नहीं डाल पा रहा, तो आम जनता के लिए न्याय की उम्मीद कहां से बचेगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम के कुछ अधिकारी जानबूझकर कार्रवाई से बच रहे हैं और अवैध डेरी संचालकों को संरक्षण दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतनी उच्चस्तरीय शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही तो यह स्पष्ट संकेत है कि कहीं न कहीं भ्रष्टाचार और मिलीभगत काम कर रही है। डेरी संचालकों से मिलीभगत के कारण अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं। यही कारण है कि नोटिस और जुर्माना केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत में हालात जस के तस हैं। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध डेरी को बंद नहीं किया गया और गंदगी की समस्या खत्म नहीं की गई तो वे सामूहिक आंदोलन करेंगे। लोगों ने यह भी कहा कि प्रशासन अगर अब भी आंख मूंदकर बैठा रहा तो वे जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि नगर निगम जैसी संस्थाएं जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय अक्सर उन्हें अनदेखा कर देती हैं। अब देखना यह होगा कि मेरठ प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार इस गंभीर मामले में कब जागेगी और क्या दोषियों पर वास्तव में कोई कड़ी कार्रवाई होगी या यह मामला भी केवल फाइलों और नोटिसों में दबकर रह जाएगा।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र एवं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
महामंत्री – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद, उत्तर प्रदेश
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