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सहारनपुर रुतबा” बैंक्वेट हॉल की सील 24 घंटे में खुली, फिर SDA उपाध्यक्ष संतोष कुमार राय का ट्रांसफर

सहारनपुर में उठा बड़ा सवाल: क्या रसूख के आगे झुका सिस्टम, किस विधायक का है साया?

**“सहारनपुर रुतबा” बैंक्वेट हॉल की सील 24 घंटे में खुली, फिर SDA उपाध्यक्ष संतोष कुमार राय का ट्रांसफर — सहारनपुर में उठा बड़ा सवाल: क्या रसूख के आगे झुका सिस्टम, किस विधायक का है साया?*

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में अवैध निर्माण और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंबाला रोड स्थित चर्चित “रुतबा” बैंक्वेट हॉल पर सहारनपुर विकास प्राधिकरण (SDA) द्वारा की गई सीलिंग कार्रवाई महज 24 घंटे के भीतर ही खुल गई, और इसके तुरंत बाद ही SDA के उपाध्यक्ष संतोष कुमार राय के ट्रांसफर की खबरों ने पूरे मामले को और ज्यादा संदिग्ध बना दिया है। यह घटनाक्रम अब चर्चा का केंद्र बन चुका है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक ओर सख्त कार्रवाई का ढिंढोरा पीटा गया और दूसरी ओर उसी कार्रवाई की साख कुछ ही घंटों में ध्वस्त हो गई।

जानकारी के अनुसार, “रुतबा” बैंक्वेट हॉल बिना स्वीकृत मानचित्र और आवश्यक एनओसी के संचालित हो रहा था, जिस पर प्राधिकरण ने 16 मार्च को सील की कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई को अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में पेश किया गया, लेकिन हैरानी तब हुई जब 18 मार्च को यह सील खोल दी गई। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा थी या फिर किसी दबाव में नियमों को ताक पर रख दिया गया।

मामला यहीं नहीं रुका, बल्कि इसके तुरंत बाद उपाध्यक्ष संतोष कुमार राय के ट्रांसफर की चर्चाओं ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक गंभीर बना दिया है। सूत्रों के अनुसार, यह ट्रांसफर उसी कार्रवाई के बाद हुआ, जिससे संदेह और गहरा हो गया है कि क्या “रुतबा” बैंक्वेट हॉल के पीछे किसी बड़े रसूखदार का हाथ है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि किसी प्रभावशाली विधायक का इस पूरे मामले में दखल हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अवैध निर्माण करने वालों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? क्या आम जनता की सुरक्षा और नियमों का पालन अब रसूखदारों के सामने बौना पड़ गया है? जिस बैंक्वेट हॉल में बिना सुरक्षा मानकों के कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे, वह किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता था, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई का यूं हल्का पड़ जाना कई गंभीर आशंकाओं को जन्म देता है।

स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों में भी इस मामले को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि छोटे दुकानदारों और आम लोगों पर सख्ती दिखाई जाती है, जबकि बड़े और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कानून सबके लिए बराबर है या फिर रसूख के हिसाब से उसका इस्तेमाल किया जाता है।

प्राधिकरण के अधिकारियों की चुप्पी भी इस पूरे मामले में संदेह को और बढ़ा रही है। न तो सील खोलने के फैसले पर कोई स्पष्ट जवाब दिया गया है और न ही ट्रांसफर को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह मामला अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद का रूप लेता जा रहा है।

अब देखना होगा कि क्या इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी समय के साथ दबा दिया जाएगा। फिलहाल “रुतबा” बैंक्वेट हॉल और SDA की कार्रवाई सहारनपुर में कानून बनाम रसूख की जंग का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है।

 

✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर

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