
कोरिया, छत्तीसगढ़। भारत आज डिजिटल क्रांति और विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक ऐसा गाँव भी है जिसे देख कर लगता है कि समय वहीं ठहर गया है। जिला मुख्यालय से 40किलोमीटर दूर बसा लोलकी ग्राम आज तक सरकारी फाइलों और विकास के नक्शे से ओझल रहा। आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी यहाँ के ग्रामीण आदिम युग जैसी परिस्थितियों में जीने को मजबूर थे।
1 *विकास की राह देख रही पथरीली डगर*
लोलकी गाँव तक पहुँचने के लिए न तो कोई पक्की सड़क है और न ही कोई सुगम रास्ता। ग्रामीणों को आज भी कच्ची सड़क का सफर करना पड़ता है।
2. *नक्शे से गायब” होने का दंश*
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण उनका गाँव सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। जनगणना और राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट पहचान न होने के कारण यहाँ के निवासियों को जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों को बनवाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
3 ग्रामीणों की आवाज़
“हमें वोट के समय तो याद किया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही हम फिर से भुला दिए जाते हैं। क्या हम भारत के नागरिक नहीं हैं? हमें बस सड़क, बिजली और पानी चाहिए ताकि हमारे बच्चे एक बेहतर भविष्य देख सकें।” —
स्थानीय निवासी तिलकधारी सिंह
कोरिया जिले का लोलकी गाँव प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है। यह देखना होगा कि क्या जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस ‘भूल दिए गए’ गाँव की सुध लेती है या यहाँ के ग्रामीण आजादी के सौवें साल में भी इसी बदहाली में रहने को मजबूर रहेंगे।
4 कई बार सर्वे हुए
– कई बार खबरों के माध्यम से शासन प्रशासन के संज्ञान में लाया गया कई राजनीतिक पार्टियों ने भी मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया ।तब जाकर प्रशासन की नींदें खुली।
अन्ततः लोलकी ग्राम का नक्शा अंतिम प्रकाशन हेतु उद्घोषणा जारी
जिला प्रशासन द्वारा ग्राम कछाड़ी – लोलकी पारा राजस्व निरीक्षक मंडल सोनहत तहसील सोनहत वन से घोषित राजस्व ग्राम का अंतिम प्रकाशन हेतु उद्घोषणा नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है अब लोगों में उम्मीद जागी है । और स्थानीय निवासियों का कहना है अब जल्द ही कोरिया जिले के नक्शे के लोलकी ग्राम नजर आने लगेगा ।इसको लेकर ग्रामीणों में काफी खुशी भी है । लेकिन अब देखना ये है कि कब तक गांव अपने अस्तित्व में आएगा ।

