
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨बस्ती: हरियाली पर ‘आरा’, जिम्मेदारों का ‘सांत्वना’ वाला खेल; बिना परमिट कट गए जामुन के पेड़!🚨
🌳वन विभाग की नाक के नीचे कटी लकड़ियां, रेंजर ने की जांच; पर ‘मुकदमे’ के लिए आखिर किस शुभ मुहूर्त का है इंतजार?
🌳बस्ती: रंगे हाथ पकड़े गए लकड़ी तस्कर, फिर भी FIR के नाम पर क्यों कांप रहे हैं जिम्मेदारों के हाथ?
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश स्थान: कप्तानगंज, बस्ती
बस्ती। मुख्यमंत्री के ‘मिशन पौधरोपण’ को पलीता लगाने वाले लकड़ी तस्करों के हौसले कप्तानगंज रेंज में बुलंद हैं। ताजा मामला ग्राम पंचायत फरेंदा सेंगर के राजस्व गांव भैरोपुर का है, जहां लकड़ी ठेकेदार ने बेखौफ होकर प्रतिबंधित हरे जामुन के पेड़ों पर बिना किसी वैध परमिट के आरा चलवा दिया। ताज्जुब की बात यह है कि जब तक वन विभाग की ‘नींद’ खुली, तब तक हरियाली जमींदोज हो चुकी थी।
🔔ठेकेदार की दबंगई या विभाग की ढिलाई?
सूत्रों के मुताबिक, महुलानी निवासी लकड़ी ठेकेदार गया प्रसाद शर्मा ने नियमों को ताक पर रखकर भैरोपुर में जामुन के दो हरे पेड़ों को बिना परमिट के कटवा दिया। सूचना जंगल की आग की तरह फैली, तब जाकर रेंजर राजू प्रसाद ने मामले का संज्ञान लिया और आनन-फानन में टीम को मौके पर भेजा।
🔔जांच में खुली पोल, रंगे हाथ मिली लकड़ी
रेंजर के निर्देश पर पहुंची वन विभाग की टीम को मौके पर चार हरे पेड़ों के अवशेष मिले। विभाग का दावा है कि इनमें से दो पेड़ ‘छूट’ की श्रेणी के थे, लेकिन 02 जामुन के पेड़ पूरी तरह अवैध रूप से काटे गए थे। बाद में उड़ाका दल (Flying Squad) ने भी घटनास्थल का मुआयना किया और कार्रवाई का कोरम पूरा करते हुए ‘आश्वासन’ का झुनझुना थमा दिया।
🔔मुकदमे के नाम पर ‘कल’ का इंतजार क्यों?
बड़ा सवाल यह है कि जब अपराध मौके पर सिद्ध हो चुका है और लकड़ियां बरामद हैं, तो खबर लिखे जाने तक ठेकेदार गया प्रसाद शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया? आखिर विभाग को किस ‘शुभ मुहूर्त’ का इंतजार है? क्या सिस्टम किसी दबाव में है या फिर लकड़ी तस्करों के साथ कोई ‘भीतरी सेटिंग’ चल रही है?
👉प्रशासन और विभाग के लिए कड़वे सवाल:
⭐मुकदमे में देरी क्यों? – जब रेंजर और उड़ाका दल ने मौके पर जाकर पुष्टि कर दी कि 02 जामुन के पेड़ बिना परमिट के अवैध रूप से काटे गए हैं, तो लकड़ी ठेकेदार गया प्रसाद शर्मा के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज क्यों नहीं की गई? क्या किसी रसूखदार का दबाव है?
⭐वन विभाग की सतर्कता पर सवाल? – बिना परमिट के हरे पेड़ों पर आरा चल गया और लकड़ियां कटकर तैयार हो गईं, तब जाकर विभाग को ‘सूत्रों’ से सूचना मिली। क्या कप्तानगंज रेंज के बीट कर्मियों की कोई मिलीभगत है या वे अपने क्षेत्र की सुरक्षा में पूरी तरह फेल हैं?
⭐ठेकेदार पर मेहरबानी क्यों? – महुलानी निवासी ठेकेदार द्वारा सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। क्या विभाग सिर्फ ‘आश्वासन’ का खेल खेलकर मामले को ठंडा करना चाहता है, या इस बार कोई ऐसी ठोस कार्रवाई होगी जो नजीर बने?
⭐अवैध कटान की भरपाई कैसे? – मुख्यमंत्री जी एक तरफ ‘मिशन पौधरोपण’ चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ माफिया फलदार और प्रतिबंधित पेड़ों को काट रहे हैं। विभाग इन कटे हुए पेड़ों की क्षतिपूर्ति और पर्यावरण को हुए नुकसान की वसूली कैसे करेगा?
⭐उड़ाका दल की भूमिका? – उड़ाका दल (Flying Squad) मौके पर पहुंचा, जांच भी की, लेकिन क्या उनका काम सिर्फ मौके का मुआयना करना है? अब तक ठेकेदार की मशीनों या लकड़ी को जब्त करने की प्रक्रिया में इतनी सुस्ती क्यों दिखाई जा रही है?
वन विभाग की टीम का कहना है कि मुकदमा कल दर्ज किया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि कप्तानगंज वन रेंज के अधिकारी इन ‘पर्यावरण के दुश्मनों’ पर सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।




















