
अजीत मिश्रा (खोजी)
सफेदपोश लुटेरे: जब रक्षक ही बन गए भक्षक, कानपुर में बैंक मैनेजरों ने मिलकर लुटा 125 करोड़!
ब्यूरो रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश
- बड़ा एक्शन: DCP साउथ साइबर सेल और बर्रा पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- बैंक अफसरों की गद्दारी: गिरोह में एक्सिस बैंक कन्नौज के ऑपरेशन हेड और डिप्टी मैनेजर समेत CBS और यूनिटी बैंक के बड़े अधिकारी शामिल।
- करोड़ों का ट्रांजेक्शन: मुख्य आरोपी सोनू शर्मा के खाते में 67 करोड़ और सतीश पांडेय के खाते में 53 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन मिला।
- मोडस ऑपेरंडी (काम करने का तरीका): एजेंट तनिष्क गुप्ता फर्जी दस्तावेज जुटाता था और बैंक मैनेजर बिना जांच के ‘फेक खाते’ खोलकर ठगी का पैसा रूट करते थे।
- सिस्टम में सेंध: आरोपियों ने बैंक के इंटरनल सिस्टम का दुरुपयोग कर 125 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किया।
- कड़ी कार्रवाई: पुलिस ने सभी संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और मनी लॉन्ड्रिंग की धाराओं के तहत जांच जारी है।
- जनता को चेतावनी: बैंकिंग सिस्टम के भीतर बैठे इन भ्रष्ट अफसरों के खुलासे ने सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कानपुर। कहते हैं कि पैसा बैंक में सुरक्षित रहता है, लेकिन कानपुर में जो खुलासा हुआ है, उसने पूरे बैंकिंग सिस्टम की साख को तार-तार कर दिया है। शहर में एक ऐसे ‘सिंडिकेट’ का पर्दाफाश हुआ है जहाँ लुटेरे सड़क पर नहीं, बल्कि बैंकों के भीतर एयर-कंडीशंड केबिन में मैनेजर की कुर्सी पर बैठे थे। DCP साउथ की साइबर सेल और बर्रा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए उस काले साम्राज्य को ध्वस्त कर दिया है, जो जनता की गाढ़ी कमाई और साइबर ठगी के खेल से 125 करोड़ रुपये डकार चुका है।
मैनेजर, ऑपरेशनल हेड और एजेंट: लूट का ‘कॉर्पोरेट’ ढांचा
यह कोई मामूली चोरी नहीं, बल्कि बैंक के बड़े ओहदों पर बैठे अधिकारियों की मिलीभगत से रचा गया एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। पुलिस ने जिन 8 दरिंदों को दबोचा है, उनमें एक्सिस बैंक, CBS और यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक के ‘बड़े साहब’ शामिल हैं।
- कन्नौज एक्सिस बैंक के ऑपरेशनल हेड धर्मेंद्र सिंह और डिप्टी मैनेजर अमित सिंह ने बैंक की मर्यादा को ताक पर रखकर सिस्टम में सेंध लगाई।
- स्वरूपनगर के CBS बैंक के ब्रांच मैनेजर अमित कुमार और यूनिटी बैंक के RM आशीष कुमार इस खेल के मास्टरमाइंड निकले।
ये अधिकारी एजेंट तनिष्क गुप्ता के साथ मिलकर फर्जी KYC के जरिए खाते खोलते थे और फिर शुरू होता था करोड़ों के अवैध ट्रांजेक्शन का वो खेल, जिसकी भनक किसी को नहीं लगती थी।
तीन खातों में 125 करोड़: आंकड़े देख पुलिस भी दंग
- जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे होश उड़ा देने वाले हैं। आखिर एक आम आदमी के खाते में रातों-रात करोड़ों रुपये कहाँ से आ रहे थे?
- सोनू शर्मा (बर्रा): इसके खाते में 67 करोड़ रुपये का खेल चल रहा था।
- सतीश पांडेय: इसके खाते में 53 करोड़ रुपये की अवैध रकम मिली।
- साहिल विश्वकर्मा: महज एक मोहरा, जिसके खाते में 1 करोड़ रुपये जमा थे।
“यह महज साइबर ठगी नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम के साथ गद्दारी है। सफेदपोश अपराधियों ने जनता के भरोसे का कत्ल किया है।”
कैसे चलता था ‘पाप का बैंक’?
इन आरोपियों ने बैंक के भीतर ही एक समानांतर सिस्टम बना लिया था। एजेंट फर्जी दस्तावेज लाता, मैनेजर बिना किसी वेरिफिकेशन के उसे अप्रूव करते और फिर ठगी का पैसा उन्हीं खातों में खपाया जाता था। एक्सिस बैंक कन्नौज के अफसरों ने तो बैंक के इंटरनल सिस्टम तक से छेड़छाड़ करने की जुर्रत की।
सावधान! अब अलार्म बज चुका है
पुलिस ने फिलहाल इन सभी 8 आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है और खातों को फ्रीज कर दिया गया है। लेकिन सवाल वही है— अगर बैंक के मैनेजर ही चोर निकलें, तो जनता अपना पैसा कहाँ रखे? पुलिस अब इस जांच का दायरा बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि इस गिरोह की जड़ें उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों और बड़े कॉर्पोरेट दफ्तरों तक फैली हुई हैं। मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर क्राइम की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर पुलिस अब इन सफेदपोशों की पूरी कुंडली खंगाल रही है।
चेतावनी: अपनी KYC डिटेल्स और निजी जानकारी साझा करते समय सौ बार सोचें। आपके बगल में बैठा बैंक कर्मचारी भी इस साजिश का हिस्सा हो सकता है!
















