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किताबें या बंदूकें? सनराइजर्स कान्वेंट स्कूल में दहशत की रात, मासूमों के सामने चली गोलियां।

वार्षिक उत्सव में 'खूनी तकरार': दो गांवों के लड़कों ने स्कूल को बनाया अखाड़ा, कहाँ सोई थी वाल्टरगंज पुलिस?

⭐बस्ती: विद्या के मंदिर में ‘गोलीकांड’, वार्षिक उत्सव बना रणक्षेत्र!⭐

⚡पुलिस की सुस्ती या रसूखदारों का दबाव? स्कूल परिसर में फायरिंग से दहशत में बस्ती।

⚡किताबें या बंदूकें? सनराइजर्स कान्वेंट स्कूल में दहशत की रात, मासूमों के सामने चली गोलियां।

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

विशेष कवरेज: अजीत मिश्रा ‘खोजी’

बस्ती। जहाँ नौनिहालों के भविष्य को संवारने की कसमें खाई जाती हैं, जहाँ सरस्वती वंदना की गूँज होनी चाहिए थी, वहां शनिवार की रात गोलियों की तड़तड़ाहट ने सन्नाटा चीर दिया। वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के सनराइजर्स कान्वेंट स्कूल में आयोजित वार्षिक उत्सव उस समय खूनी संघर्ष की भेंट चढ़ गया, जब दो गांवों के युवकों के बीच उपजा मामूली विवाद सरेआम फायरिंग में तब्दील हो गया।

💫उत्सव के बीच ‘मौत’ का तांडव

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गनेशपुर नगर पंचायत के मंझारिया और कप्तानगंज के दुबौला-विशुनपुरा गांव के युवकों के बीच तनातनी हुई। देखते ही देखते गाली-गलौज और फिर सीधे हथियार निकल आए। सरेआम हुई फायरिंग ने पंडाल में बैठे अभिभावकों और मासूम बच्चों को जान बचाने के लिए भागने पर मजबूर कर दिया। सवाल यह है कि क्या अब स्कूल भी सुरक्षित नहीं रहे?

💫पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल: ‘लीपापोती’ की बू?

घटना के बाद से क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सबसे बड़ा सवाल वाल्टरगंज पुलिस और गनेशपुर चौकी पर उठ रहा है:

👉स्कूल के कार्यक्रम में भारी भीड़ के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे?

👉सार्वजनिक स्थल पर हथियार लेकर युवक कैसे पहुँच गए?

👉क्या पुलिस इस मामले को दबाने या ‘लीपापोती’ करने की कोशिश कर रही है?

“गनीमत रही कि गोली किसी मासूम को नहीं लगी, वरना आज बस्ती एक बड़े हादसे का गवाह होता। लेकिन क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रही है?”

🔔दहशत में अभिभावक

इस घटना ने स्थानीय लोगों के भरोसे को हिला कर रख दिया है। अभिभावकों का कहना है कि अगर शिक्षण संस्थानों में भी अपराधी बेखौफ होकर गोलियां चलाएंगे, तो वे अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने कहाँ भेजेंगे?

फिलहाल, पुलिस की चुप्पी और आरोपियों की अब तक की स्थिति ने प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ‘खोजी’ टीम इस मामले की तह तक जाएगी—क्या अपराधियों को किसी सफेदपोश का संरक्षण प्राप्त है?

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