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“कुंभकर्णी नींद में प्राधिकरण, ‘रुतबा’ ध्वस्त—अवैध निर्माणों की बाढ़ में डूबा सहारनपुर, बिजली काटने के आदेश के बाद भी SDA मेहरबान, लोकायुक्त से लेकर प्रमुख सचिव तक पहुंची शिकायत!”

“रुतबा ध्वस्त, सिस्टम बेनकाब!”—बिजली काटने के आदेश के बाद भी SDA मेहरबान, अब लोकायुक्त से लेकर प्रमुख सचिव तक पहुंची शिकायत

🚨🚨 MEGA BIGGEST BREAKING | “कुंभकर्णी नींद में प्राधिकरण, ‘रुतबा’ ध्वस्त—अवैध निर्माणों की बाढ़ में डूबा सहारनपुर, बिजली काटने के आदेश के बाद भी SDA मेहरबान, लोकायुक्त से लेकर प्रमुख सचिव तक पहुंची शिकायत!” 🚨🚨

सहारनपुर

सहारनपुर में इन दिनों अवैध निर्माणों का मुद्दा बड़े घोटाले का रूप लेता जा रहा है। रिहायशी कॉलोनियों से लेकर मुख्य बाजारों तक बिल्डर और भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि बिना किसी डर के बड़े-बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, होटल और गोदाम खड़े किए जा रहे हैं। लगातार शिकायतों, साक्ष्यों और जन आक्रोश के बावजूद सहारनपुर विकास प्राधिकरण की चुप्पी अब गंभीर सवालों के घेरे में है।

इसी बीच चर्चित रुतबा बैंक्वेट हॉल का मामला इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। अग्निशमन विभाग की सख्ती के बाद हॉल की बिजली तीन घंटे के भीतर काटने के आदेश जारी किए गए, जिससे “रुतबा का रुतबा ध्वस्त” होता नजर आया। इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि नियमों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लेकिन दूसरी तरफ तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आ रही है। आरोप है कि सहारनपुर विकास प्राधिकरण अब भी अवैध निर्माणों पर “मेहरबान” बना हुआ है। न तो बड़े स्तर पर सीलिंग की कार्रवाई हो रही है और न ही सील तोड़कर निर्माण जारी रखने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

शहर के कई प्रमुख इलाके—कामधेनु क्षेत्र, अंबाला रोड, नकुड़ तिराहा और घंटाघर—इन दिनों अवैध निर्माणों के गढ़ बन चुके हैं। नोटिस जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य खुलेआम जारी है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं और रसूखदारों के लिए नहीं?

रिहायशी क्षेत्रों में कमर्शियल निर्माण के कारण आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पार्किंग के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, सड़कों पर जाम आम हो गया है और लोगों के घरों के बाहर वाहनों की कतारें लग रही हैं। इससे रोजाना विवाद की स्थिति बन रही है।

सूत्रों के अनुसार, करोड़ों रुपये के इन अवैध निर्माणों से जहां माफियाओं की जेबें भर रही हैं, वहीं सरकार को मिलने वाला नक्शा शुल्क और अन्य राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। हाल ही में कुछ होटलों पर की गई कार्रवाई को भी लोग “खानापूर्ति” मान रहे हैं, क्योंकि बाकी अवैध निर्माण बिना किसी रोक-टोक के संचालित हो रहे हैं।

आरोप यह भी हैं कि निचले स्तर के कुछ अधिकारी इस पूरे खेल में अहम भूमिका निभा रहे हैं। स्थानीय चर्चाओं में यह बात सामने आई है कि जोन-3 में “सेटिंग” के जरिए कई बड़े निर्माण कराए गए, जिनमें हाईवे किनारे गोदाम और कॉम्प्लेक्स भी शामिल हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अंबाला रोड और नकुड़ तिराहा क्षेत्र में कई निर्माण ऐसे हैं, जिन्हें नोटिस मिलने के बावजूद रोका नहीं गया। यहां तक कि कुछ स्थानों पर सील लगाने के बाद भी उसे तोड़कर रातों-रात निर्माण कार्य जारी रखा गया, लेकिन इस गंभीर उल्लंघन पर भी कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

अब इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण की शिकायत पहले लोकायुक्त को भेजी गई थी और अब इसे आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश शहरी आवास विभाग के प्रमुख सचिव को भी भेज दिया गया है। इससे साफ है कि मामला अब उच्च स्तर तक पहुंच चुका है और जल्द ही बड़ी जांच या सख्त कार्रवाई की संभावना है।

स्थानीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब हालात बेकाबू हो चुके हैं। शहर की योजना, ट्रैफिक व्यवस्था और सुरक्षा सभी पर खतरा मंडरा रहा है। यदि जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो लोग मुख्यमंत्री और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सहारनपुर में अवैध निर्माणों पर सच में “पीला पंजा” चलेगा या फिर “रुतबा” और रसूख के आगे नियम एक बार फिर झुक जाएंगे?

पूरा शहर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।


रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर

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