
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। बस्ती: कुदरहा के अकेला कुबेरपुर में मनरेगा का ‘बड़ा खेल’, बिना काम कराए लाखों डकारने की तैयारी।।
मंगलवार 20 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
बस्ती।। जनपद के विकासखंड कुदरहा अंतर्गत ग्राम पंचायत अकेला कुबेरपुर में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि यहाँ विकास कार्यों के नाम पर केवल कागजों के पेट भरे जा रहे हैं। मनरेगा योजना में एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ मजदूरों के पसीने की जगह रसूखदारों के ‘कलम’ से फर्जी हाजिरी भरकर सरकारी धन की लूट की योजना तैयार कर ली गई है।
💫पांच परियोजनाओं में भारी हेरफेर, 166 फर्जी हाजिरी का खुलासा:-
ग्राम पंचायत में संचालित मनरेगा की पांच अलग-अलग कार्यपरियोजनाओं में अनियमितता की सारी हदें पार कर दी गई हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 20 मास्टर रोल में कुल 166 मजदूरों की फर्जी एंट्री की गई है। जमीनी हकीकत यह है कि मौके पर काम का नामोनिशान नहीं है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मस्टररोल भरकर भुगतान निकालने की पूरी ‘फील्डिंग’ सजा ली गई है।
💫इन कार्यों में हो रहा ‘कागजी’ खेल:-
ग्रामीणों के आरोपों के अनुसार, निम्नलिखित चकमार्गों और मिट्टी पटाई के कार्यों में जमकर धांधली की जा रही है:
👉श्यामू के खेत से मनोज के खेत तक: चकमार्ग का कार्य धरातल के बजाय केवल फाइलों में दौड़ रहा है।
👉विशाल के खेत से रामफेर के खेत तक: मिट्टी पटाई का कार्य रिकॉर्ड में तो पूर्ण है, लेकिन हकीकत में जमीन जस की तस है।
👉अर्जुन से रामआसरे, राजू से मनीराम और राम अवतार से सनोज के खेत तक: इन तीनों परियोजनाओं में भी फर्जीवाड़े की प्रबल आशंका है, जहाँ बिना काम कराए ही भुगतान की तैयारी है।
💫सिंडिकेट का कब्जा: सचिव से प्रधान तक सब मौन:-
इस पूरे घोटाले में भ्रष्टाचार का एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है। आरोप है कि ग्राम सचिव, तकनीकी सहायक (TA), रोजगार सेवक और ग्राम प्रधान की आपसी मिलीभगत से इस साजिश को अंजाम दिया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बिना अधिकारियों के संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर फर्जी हाजिरी लगाना संभव नहीं है।
💫सीडीओ से निष्पक्ष जांच की गुहार:-
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO), बस्ती को संबोधित करते हुए एक मांग पत्र तैयार किया है। ग्रामीणों की मांग है कि:
👉 तत्काल प्रभाव से इन पांचों परियोजनाओं के भुगतान पर रोक लगाई जाए।
👉 मौके पर स्थलीय सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए।
👉 दोषी सचिव, रोजगार सेवक और अन्य जिम्मेदारों पर मुकदमा दर्ज कर रिकवरी की जाए।
“अगर समय रहते इस ‘लूट तंत्र’ को नहीं रोका गया, तो सरकारी धन की बंदरबांट यूं ही चलती रहेगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन रसूखदारों पर क्या चाबुक चलाता है।”




















