
बस्ती: सिल्ट सफाई के नाम पर ‘पीला सोना’ लूट रहे माफिया, सिस्टम ने ओढ़ी चुप्पी की चादर
अजीत मिश्रा (खोजी), बस्ती
बस्ती ।। विक्रमजोत क्षेत्र के भौसिया पंप कैनाल पर इन दिनों विकास नहीं, बल्कि विनाश का खेल चल रहा है। कहने को तो यहाँ कैनाल की सिल्ट (सफाई) का काम कागजों पर दर्ज है, लेकिन धरातल पर इसकी आड़ में अवैध बालू खनन का काला कारोबार दिन-दहाड़े फल-फूल रहा है। नियमों को ठेंगे पर रखकर माफिया सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।
⭐‘सुविधा शुल्क सिस्टम’ के आगे बौना हुआ कानून
क्षेत्र में चर्चा है कि यह सब कुछ “बखरा सिस्टम” के तहत हो रहा है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि खनन माफियाओं को शासन-प्रशासन के कुछ रसूखदार सफेदपोशों और खाकी का खुला संरक्षण प्राप्त है। डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला चीख-चीख कर अवैध खनन की गवाही दे रहा है, लेकिन खनन विभाग की आंखों पर पट्टी बंधी है।
⭐निशाने पर जिम्मेदार: खनन अधिकारी और पुलिस की भूमिका संदिग्ध
ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सीधे तौर पर खनन अधिकारी प्रशांत यादव और विक्रमजोत चौकी प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन अधिकारियों की मिलीभगत और “हरी झंडी” के बिना नदी का सीना चीरना मुमकिन नहीं है।
“जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? सिल्ट सफाई महज एक बहाना है, असली मकसद तो बालू बेचकर जेबें गरम करना है।” — स्थानीय ग्रामीण
⭐पर्यावरण और सुरक्षा दांव पर
अवैध खनन के चलते न केवल राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि पर्यावरणीय नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नदी और कैनाल की सुरक्षा अब केवल फाइलों तक सीमित रह गई है। भारी मशीनों के उपयोग से नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ा जा रहा है, जिससे भविष्य में बड़े खतरे की आशंका बनी हुई है।
⭐सिस्टम की साख पर सवाल
लगातार हो रहे विरोध और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई का ‘शून्य’ होना जिला प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। क्या माफिया इतने ताकतवर हो गए हैं कि जिला प्रशासन उनके सामने बेबस है? या फिर “मलाई” का हिस्सा ऊपर तक पहुंच रहा है?
अब देखना यह है कि बस्ती जिला प्रशासन इस लूट पर कब लगाम लगाता है या फिर माफिया इसी तरह बेखौफ होकर सरकारी संपदा को डकारते रहेंगे।




















