


सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *जिले के खुरई विकासखंड में आयोजित होने वाला डोहेला महोत्सव अब खुरई के साथ बुंदेलखंड सहित संपूर्ण प्रदेश में अपना नाम स्थापित कर रहा है। इस महोत्सव में धार्मिक कार्य के साथ महोत्सव को रंगारंग बनाने के लिए पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री भूपेंद्र सिंह के द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में विधायक भूपेंद्र सिंह के द्वारा जाने-माने गीतकार एवं संगीतकारों को आमंत्रित किया जाता है, जिससे कि खुरई शहर सहित संपूर्ण जिले के व्यक्ति आनंद का लेते हैं। यह डोहेला महोत्सव प्रतिवर्ष संक्रांति के अवसर पर शुरू होता है, किंतु संक्रांति के समय अत्यधिक शीत ऋतु होने एवं स्थानीय व्यक्तियों की मांग पर विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री भूपेंद्र सिंह के द्वारा इस कार्यक्रम को 5 अप्रैल से शुरू करने का निर्णय लिया गया। सन् 1752 में किले पर पेशवाओं का अधिकार हुआ। खुरई पेशवा के प्रतिनिधि गोविंद पंडित के कब्जे में यह चला गया। गोविंद पंडित ने किले तथा कस्बे को बढ़ाया और किले के पीछे एक मंदिर डोहेला बनवाया। डोहेला को किले के पीछे खोदी गई झील से जोड़ दिया गया। यह झील किले के दक्षिण में आज भी स्थित है। खुरई डोहेला मंदिर का निर्माण 1752 में हुआ था। यहां कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं, पर मुख्य रूप से इसकी पहचान भगवान विष्णु के मंदिर से है। कहा जाता है कि इस मंदिर में मौजूद भगवान विष्णु की मूर्ति सिर्फ 2 जगह मौजूद है—एक बद्रीनाथ धाम और दूसरा खुरई। प्रतिमा एक ही पत्थर से निर्मित है। इसमें भगवान विष्णु के साथ देवी-देवताओं को पत्थर पर उकेरा गया है। पत्थर में कहीं भी ज्वाइंट नहीं लगा है। यह एक विशेष प्रकार के पत्थर से निर्मित प्रतिमा है। यह प्रतिमा दीवार से जुड़ी हुई है। पुजारी ओमप्रकाश भारद्वाज ने बताया कि बाद में इसके मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह पर जस की तस रही। पहले इस पर कोई रंग नहीं था, वर्ष 2011 में क्षरण रोकने के लिए इस पर रंग किया गया। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर यहां महोत्सव होता है, जिसे डोहेला महोत्सव कहते हैं। इस महोत्सव में दूर-दूर से लोग आते हैं। मुख्य मंदिर के भीतर प्राचीन शिवलिंग मौजूद है, जिस पर क्षरण रोकने के लिए पीतल का आवरण लगाया गया है। सन 2014 में तत्कालीन गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने किले के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया। डोहेला महोत्सव की शुरुआत की। तब से हर साल यह महोत्सव होता आ रहा है। कोरोना काल में भी महोत्सव सुरक्षा इंतजामों के साथ हुआ था। इस महोत्सव में बॉलीवुड के सिंगर अपनी प्रस्तुति देते हैं। मेले का आयोजन भी होता है। पूर्व मंत्री, विधायक भूपेंद्र सिंह द्वारा किले का लगातार विकास कराकर ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण किया गया है। अब यह पर्यटन स्थल के साथ धार्मिक पर्यटन का केंद्र भी है।



