
अजीत मिश्रा (खोजी)
अवैध धंधों का ‘सुरक्षित गढ़’ बना परशुरामपुर: खाकी की चुप्पी या शह?
बुधवार 21 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश
बस्ती/परशुरामपुर।। जिले का परशुरामपुर थाना क्षेत्र इन दिनों विकास के दावों से कोसों दूर, अवैध कार्यों की काली चादर में लिपटा नजर आ रहा है। आलम यह है कि पुलिस की नाक के नीचे और जिम्मेदार अधिकारियों की कथित सरपरस्ती में कच्ची शराब की भट्ठियां धधक रही हैं, तो कहीं जुए के फड़ पर लाखों के दांव लग रहे हैं। ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा यहाँ के सिस्टम के आगे दम तोड़ता दिखाई दे रहा है।
💫धधक रही हैं भट्ठियां, खामोश है सिस्टम
क्षेत्र के कई गांवों में अवैध कच्ची शराब का कारोबार कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। सूत्रों की मानें तो जिम्मेदारों की मिलीभगत से जगह-जगह धड़ल्ले से कच्ची शराब की भट्ठियां धधक रही हैं। यह जहरीला कारोबार न केवल लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है, बल्कि कानून व्यवस्था को भी सरेआम चुनौती दे रहा है।
💫चांदनी चौक बना ‘कैसीनो’, रोज हो रहा लाखों का वारा-न्यारा
गोंडा-बस्ती बॉर्डर पर स्थित चांदनी चौक इन दिनों जुआरियों की पहली पसंद बना हुआ है। सूत्रों का दावा है कि परशुरामपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस इलाके में बड़े पैमाने पर जुए का कारोबार संचालित हो रहा है। रसूखदारों और जिम्मेदारों के संरक्षण में यहाँ रोजाना लाखों रुपयों की हार-जीत होती है। चर्चा है कि इस खेल का हिस्सा ‘ऊपर’ तक पहुंचता है, इसीलिए फड़ पर पुलिस की रेड महज कागजी खानापूर्ति तक सीमित है।
💫मिट्टी और बालू खनन का ‘खुला खेल’
सिर्फ नशा और जुआ ही नहीं, बल्कि प्रकृति का सीना चीरने में भी खनन माफिया पीछे नहीं हैं। क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन और बिना रॉयल्टी के दौड़ रही बालू की ट्रालियां आम बात हो गई हैं।
चौंकाने वाला खुलासा: > नाम न छापने की शर्त पर एक ट्रैक्टर चालक ने व्यवस्था की पोल खोलते हुए बताया कि परशुरामपुर क्षेत्र की थाना-चौकियों को पार करने के लिए “एंट्री फीस” तय है। बालू की प्रति ट्राली सुरक्षित निकासी के नाम पर कथित तौर पर ₹200 वसूले जाते हैं। यदि यह सच है, तो समझा जा सकता है कि खाकी की वर्दी पर भ्रष्टाचार के दाग कितने गहरे हैं।
💫नवागत थाना प्रभारी के लिए बड़ी चुनौती
क्षेत्र की इस बदहाल कानून व्यवस्था के बीच अब सबकी निगाहें नवागत थाना प्रभारी विश्वमोहन राय पर टिकी हैं। उन्हें तेजतर्रार अधिकारी माना जाता है, लेकिन परशुरामपुर की जड़ों तक फैले इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करना उनके लिए किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं होगा।
“इस संबंध में जब उच्चाधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने जांच कर कार्रवाई की बात कही।”
बड़ा सवाल यह है कि: क्या नवागत प्रभारी इन अवैध कार्यों पर लगाम लगाकर अपनी कार्यशैली का लोहा मनवा पाएंगे, या फिर सिस्टम की पुरानी रीत में वह भी एक हिस्सा बनकर रह जाएंगे? यह आने वाला समय ही बताएगा।

















