

धार जिला ब्युरो गोपाल मारु की रिपोर्ट
धार।।नागदा–बरमंडल मार्ग के निर्माण कार्य में लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्धारित मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। विभागीय प्रपोज़ल के अनुसार सड़क निर्माण में 60 प्रतिशत रेती (रेत) एवं 40 प्रतिशत एम-सेट सामग्री का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इसके विपरीत घटिया एवं गुणवत्ता विहीन निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता इस पूरे मामले को सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार उजागर कर रहे हैं, इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग के संबंधित एसडीओ की कथित मिलीभगत के चलते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।लोक निर्माण विभाग की नियम एवं शर्तों के अनुसार अर्थ-वर्क के बाद सड़क पर पानी का छिड़काव कर रोलर मशीन से समुचित कॉम्पैक्शन किया जाना अनिवार्य है। लेकिन नागदा–बरमंडल मार्ग पर अर्थ-वर्क पूर्ण होने के बाद एक बार भी न तो पानी का छिड़काव किया गया और न ही रोलर मशीन चलाई गई। इसके चलते पूरे क्षेत्र में धूल के गुब्बार उड़ रहे हैं, जिससे सड़क किनारे स्थित किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, ठेकेदार द्वारा पुलिया निर्माण कार्य में भी घटिया और गुणवत्ता विहिन डस्ट का उपयोग किया जा रहा है और बेस के लिए खोदे गए गड्ढे में पानी में ही बीना पानी निकाले कार्य किया जा रहा है वहीं आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह पूरा मामला कुछ दिन पूर्व बदनावर एसडीएम श्रीमती प्रियंका मिमरोड के संज्ञान में भी लाया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। वहीं इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज की गई अनेक शिकायतों का भी आरोप है कि शिकायतकर्ताओं को सुने बिना ही मनमाने तरीके से शिकायतों का निराकरण कर दिया गया।क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासनिक संरक्षण में सड़क निर्माण कार्य में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार खुल्लम-खुल्ला जारी है। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा नियमों के अनुरूप पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण सुनिश्चित करने की मांग की है।









