
अजीत मिश्रा (खोजी)
सरकारी ड्यूटी से ‘फरार’ होकर चला रहे थे अवैध क्लिनिक: डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश गुप्ता के काले कारनामों का भंडाफोड़, डिप्टी CMO ने की बड़ी कार्रवाई
ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल (उ.प्र.)
- साहब की ‘प्राइवेट दुकान’ पर डिप्टी सीएमओ का ताला: जांच टीम देखते ही भागे डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश गुप्ता।
- सरकारी वेतन और प्राइवेट प्रैक्टिस: बहादरपुर में डेंटल हाईजिनिस्ट की गुंडागर्दी खत्म, अब निलंबन की बारी।
- सीएमओ के एक्शन से महकमे में हड़कंप: डिप्टी सीएमओ ने छापेमारी कर सील किया अवैध क्लिनिक।
- स्वास्थ्य विभाग की बड़ी स्ट्राइक: अवैध क्लिनिक चलाने वाले हरीश गुप्ता के भ्रष्टाचार की पोल खुली।
- नियम जेब में और क्लिनिक रोड पर: सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाने वाले डेंटल हाईजिनिस्ट पर गाज।
- प्रभारी को ‘जीरो’ और खुद को ‘हीरो’ समझते थे हरीश गुप्ता, सोशल मीडिया ने उतार दिया रसूख का भूत।
बस्ती (ब्यूरो रिपोर्ट)। उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल के बहादुरपुर क्षेत्र में सरकारी तंत्र को अपनी जागीर समझने वाले एक कर्मचारी की मनमानी का पर्दाफाश हुआ है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बहादुरपुर में तैनात डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता द्वारा नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे अवैध क्लिनिक को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील कर दिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आए सीएमओ डॉ. राजीव निगम के निर्देश पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है।स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे भ्रष्टाचार और मनमानी का एक बड़ा खुलासा हुआ है। बहादुरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता, सरकारी सिस्टम को ठेंगा दिखाकर हरदिया चौराहे पर सरेआम अपनी ‘अवैध दुकान’ (निजी क्लिनिक) चला रहे थे। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जब विभाग की नींद टूटी, तो डिप्टी सीएमओ डॉ. ए.के. चौधरी ने छापेमारी कर क्लिनिक को सीज कर दिया है।
वायरल वीडियो ने खोली पोल, छापे में मची खलबली
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता हरदिया चौराहे पर स्थित अपने निजी क्लिनिक में मरीजों का इलाज करते नजर आ रहे थे। इस खबर का संज्ञान लेते हुए सीएमओ ने तत्काल जांच कमेटी गठित की। जब डिप्टी सीएमओ डॉ. ए.के. चौधरी अपनी टीम के साथ हरदिया चौराहे पहुंचे, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। जांच टीम को देखते ही आरोपी हरीश गुप्ता अपना क्लिनिक खुला छोड़कर ही मौके से फरार हो गए। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए क्लिनिक को सीज कर दिया।
नियमों की धज्जियां: हाजिरी रजिस्टर में फर्जीवाड़ा
सरकारी सेवा में रहते हुए हरीश गुप्ता की मनमानी का आलम यह था कि उन्होंने उपस्थिति पंजिका पर खुद ही 4 दिन की आकस्मिक छुट्टी (CL) दर्ज कर दी, जबकि सरकारी नियमानुसार एक बार में अधिकतम 3 दिन की ही CL ली जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, न तो ऑनलाइन आवेदन किया गया और न ही प्रभारी चिकित्साधिकारी पवन वर्मा से अनुमति ली गई। बिना सूचना गायब होकर सरकारी वेतन उठाना और प्राइवेट प्रैक्टिस करना सीधे तौर पर सरकारी खजाने और जनता की जेब पर डकैती है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। हरीश गुप्ता न केवल अवैध प्रैक्टिस कर रहे थे, बल्कि सरकारी उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस रजिस्टर) के साथ भी खिलवाड़ कर रहे थे:
- अवैध अवकाश: हरीश ने बिना किसी ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन के रजिस्टर पर खुद ही 04 दिन की सीएल (आकस्मिक अवकाश) दर्ज कर दी थी।
- शासनादेश का उल्लंघन: नियमानुसार एक बार में अधिकतम 03 दिन की ही सीएल ली जा सकती है, लेकिन आरोपी ने सरकारी नियमों को धता बताते हुए मनमानी की।
- गायब रहकर वेतन: सीएचसी बहादुरपुर से गायब रहकर वे न केवल निजी क्लिनिक से कमाई कर रहे थे, बल्कि सरकारी खजाने से वेतन भी डकार रहे थे।
सीएचसी प्रभारी की भी नहीं सुनते ‘साहब’
सूत्रों की मानें तो सीएचसी बहादुरपुर के प्रभारी डॉ. पवन वर्मा खुद इस कर्मचारी की अनुशासनहीनता से परेशान हैं। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि हरीश गुप्ता अपने पद का रसूख दिखाकर प्रभारी को भी कुछ नहीं समझते थे। सीएचसी प्रभारी ने दो दिन पूर्व ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया था, लेकिन दबंगई का आलम यह है कि आरोपी ने न तो नोटिस रिसीव किया और न ही उसका कोई जवाब देना उचित समझा।हैरानी की बात यह है कि सीएचसी बहादुरपुर के प्रभारी डॉ. पवन वर्मा भी इस कर्मचारी की दबंगई से त्रस्त हैं। बताया जा रहा है कि हरीश गुप्ता सीएचसी प्रभारी को कुछ नहीं समझते और अपनी मनमर्जी से ड्यूटी करते हैं। दो दिन पहले जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ तक को आरोपी ने रिसीव करना जरूरी नहीं समझा।
बढ़ सकती हैं मुश्किलें: निलंबन की तलवार लटकी
डिप्टी सीएमओ डॉ. ए.के. चौधरी ने स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच अब अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, “बिना अनुमति के क्लिनिक का संचालन करना और ड्यूटी से अनाधिकृत रूप से गायब रहना गंभीर अपराध है। आरोपी का 04 दिन का वेतन कटना तय है और जल्द ही उन पर निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है।”
भ्रष्टाचार की होगी ‘पोस्टमार्टम’ जांच
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था। अब स्वास्थ्य विभाग इस बिंदु पर भी जांच कर रहा है कि क्या सीएचसी से दवाओं या अन्य संसाधनों का उपयोग भी इस निजी क्लिनिक में किया जा रहा था?
निष्कर्ष: बहादुरपुर की यह घटना स्वास्थ्य विभाग के उन दावों पर सवाल खड़ा करती है, जिनमें बायोमेट्रिक हाजिरी और सख्त निगरानी की बात कही जाती है। अगर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल न होता, तो शायद यह भ्रष्टाचार आज भी पर्दे के पीछे फल-फूल रहा होता। फिलहाल, डिप्टी सीएमओ की इस कार्रवाई से क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टरों और सरकारी ड्यूटी में लापरवाही बरतने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।यह मामला केवल एक कर्मचारी की लापरवाही का नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम में पैठ जमा चुके उस भ्रष्टाचार का है जहां सरकारी कुर्सी का इस्तेमाल अपनी निजी तिजोरी भरने के लिए किया जाता है। अब देखना यह है कि प्रशासन हरीश कुमार गुप्ता पर कठोर कार्रवाई करता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?



















