
कहतरवा गांव, जो जिला मुख्यालय से केवल दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इन दिनों सड़क की बेहद खराब स्थिति से जूझ रहा है। इस गांव की मुख्य सड़क, जो डुमरी और तरियानी प्रखंडों को जोड़ती है, ऐसी दुर्दशा में पहुंच गई है कि यहां से गुजरना एक कठिनाई भरा अनुभव बन गया है।
**खतरनाक सड़क पर चलना एक चुनौती**
बरसात के मौसम में सड़क पर जलभराव हो जाता है, जिससे यात्रा करना लगभग असंभव हो जाता है। अन्य दिनों में गहरे गड्ढे सड़क पर खतरनाक स्थितियों को जन्म देते हैं। स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर गुप्ता ने इस मुद्दे की गंभीरता को उजागर करते हुए कहा कि “इस सड़क पर रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं। गड्ढों की वजह से कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। गनीमत है कि अब तक कोई गंभीर चोट नहीं आई।”
**राजनीतिक उपेक्षा की आलोचना**
सुधीर ने प्रशासन और स्थानीय नेताओं पर भी कड़ी आलोचना की, यह कहते हुए कि “उनकी गाड़ियाँ इस सड़क से गुजरती हैं, लेकिन वे अपनी आंखों पर काली पट्टी बांधकर बैठे हैं।” डुमरी प्रखंड के झिटकाही निवासी मुकुंद सिंह ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की विफलता पर चिंता जताते हुए कहा, “यह व्यवस्था अब राजतंत्र से भी अधिक खतरनाक हो गई है।”
**बिजनेस प्रभावित**
कहतरवा के सीमेंट व्यवसायी भोला साह ने कहा, “कहतरवा चौक से फतेहपुर गढ़ तक की सड़क की स्थिति नरक जैसी हो गई है। कोई भी इस स्थिति की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।”
**सामाजिक जीवन में बाधा**
डुमरी कटसरी निवासी संजीव कुमार झा ने बताया कि सड़क की खस्ताहालत के कारण वे अब इस सड़क से गुजरने की हिम्मत भी नहीं रखते। “गड्ढों और पानी के कारण हम नहीं जान पाते कि कहां गिर जाएंगे।”
**मरम्मत की आवश्यकता**
समग्र स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि सड़क की मरम्मत और पुनर्निर्माण की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्थानीय निवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी को सहज करने के लिए प्रशासन और नेताओं को इस समस्या की गंभीरता को समझना होगा। फिलहाल, उनकी खामोशी इस संकट को और बढ़ा रही है, जिससे गांव के निवासियों के जीवन में और कठिनाइयाँ आ रही हैं।











