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मैडम सीएमएस की ‘लेट-लतीफी’ या सिस्टम की लाचारी? आखिर कब तक सुधरेगा हरैया अस्पताल?

साहब की गैरहाजिरी पर एडी हेल्थ का 'मौन', क्या यही है उत्तम स्वास्थ्य सेवा?

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। सिस्टम की ‘बीमारी’: साहब की कुर्सी खाली, तड़प रहे मरीज; हरैया महिला अस्पताल बना सफेद हाथी।।

बुधवार 21 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन जनपद के हरैया बाजार स्थित 100 बेड का महिला चिकित्सालय खुद ‘आईसीयू’ में नजर आ रहा है। यहाँ अव्यवस्था का आलम यह है कि अस्पताल की मुखिया और CMS डॉ. सुषमा जायसवाल की गैरहाजिरी अब मरीजों के लिए जान की आफत बनने लगी है। जब सेनापति ही मैदान से गायब हो, तो फौज (अन्य डॉक्टरों) से अनुशासन की उम्मीद करना बेमानी है।

💫साहब आते नहीं, मरीज जाते नहीं

अस्पताल के नियम कहते हैं कि ओपीडी सुबह 8 बजे शुरू हो जानी चाहिए, लेकिन यहाँ की हकीकत जुदा है। सुबह 10 बजे तक न तो CMS अपनी कुर्सी पर होती हैं और न ही अन्य जिम्मेदार डॉक्टर। दूर-दराज के गांवों से पैदल या किराए की गाड़ियां कर पहुंचीं गर्भवती महिलाएं और मासूम बच्चे घंटों अस्पताल की ठंडी फर्श और बेंचों पर बैठकर डॉक्टरों की राह देखते हैं।

💫रसूख के आगे सिस्टम नतमस्तक?

चर्चा है कि एडी हेल्थ (AD Health) और सीएमओ (CMO) की मेहरबानी के चलते CMS डॉ. सुषमा जायसवाल को किसी का डर नहीं है। अधिकारियों की अनदेखी ने उन्हें मनमानी करने की खुली छूट दे दी है। कोई निगरानी न होने के कारण अस्पताल अब डॉक्टरों के बजाय नर्सों और फार्मासिस्टों के भरोसे चल रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में मरीज मजबूरन पैरामेडिकल स्टाफ से दवा लेकर वापस लौट रहे हैं।

💫सुलगते सवाल: कौन लेगा जिम्मेदारी?

यह सिर्फ एक अस्पताल की लापरवाही नहीं, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों के साथ खिलवाड़ है जो सरकारी इलाज के भरोसे आते हैं।

🔥जब मुखिया ही नदारद हैं, तो समय पर आने वाले डॉक्टरों पर लगाम कौन लगाएगा?

🔥घंटों इंतजार के दौरान अगर किसी गर्भवती महिला की स्थिति बिगड़ती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

🔥क्या स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी केवल कागजों पर ‘ऑल इज वेल’ दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेंगे?

 हरैया का यह 100 बेड अस्पताल आज सरकारी तंत्र की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। अगर जल्द ही वरिष्ठ अधिकारियों ने इस ओर संज्ञान नहीं लिया, तो यहाँ इलाज की जगह सिर्फ ‘रेफर’ और ‘लापरवाही’ का खेल चलता रहेगा।

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