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*राजमाता सिंधिया की पुण्यतिथि पर आष्टा भाजपा नदारद, संस्कारों पर खड़े हुए सवाल **.

  1. आष्टा
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में राजमाता की पुण्यतिथि पर भाजपा नदारद, पार्टी संस्कारों पर उठे सवाल
आष्टा।
भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक प्रेरणास्रोत राजमाता विजया राजे सिंधिया की पुण्यतिथि पर आष्टा में भाजपा नेताओं की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है।
पूरे दिन गुजर जाने के बावजूद भाजपा मंडल अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष, नव नियुक्त जिला उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री सहित कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी राजमाता की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने नहीं पहुंचा।
*प्रदेश में श्रद्धांजलि, आष्टा में सन्नाटा*
जहां एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुबह राजमाता विजया राजे सिंधिया की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, वहीं आष्टा में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह निष्क्रिय नजर आया।
श्रद्धांजलि स्थल पर दिनभर सन्नाटा पसरा रहा।

वहीं शाम 6 बजे
कृपाल सिंह पटाड़ा ने किया माल्यार्पण
इस दौरान पूर्व मार्केटिंग सोसायटी अध्यक्ष कृपाल सिंह पटाडा ने राजमाता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष राजमाता विजया राजे सिंधिया की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे।
कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि जब पार्टी की पूरी राजनीति राजमाता की विचारधारा पर आधारित है, तो नगर भाजपा और पार्टी पदाधिकारी आखिर कहां हैं?
कथनी–करनी में फर्क?
भाजपा द्वारा मंचों से संस्कार, विचार और राष्ट्रवादी मूल्यों की बात किए जाने के बावजूद पुण्यतिथि जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर स्थानीय नेताओं की अनुपस्थिति ने पार्टी की कथनी और करनी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्यकर्ताओं में नाराजगी
भाजपा से जुड़े कई लोगों का कहना है कि पार्टी अब विचारधारा से ज्यादा पद और फोटो तक सीमित होती जा रही है।
उनका सवाल है कि अगर प्रेरणास्रोतों को ही भुला दिया गया, तो संगठन की दिशा क्या रह जाएगी?
राजमाता विजया राजे सिंधिया की पुण्यतिथि पर आष्टा भाजपा की यह चुप्पी
अब संगठन के लिए आत्ममंथन का विषय बनती जा रही है।

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