

लाल किले पर आज ज़ालिम औरंगज़ेब का कोई नाम नहीं लेता और खालसा पंथ की फतह के नारे गूंज रहे हैं – जत्थेदार दादूवाल


रिपोर्टर इन्द्र जीत प्रजापति
स्थान कालावाली
( ) दिल्ली का लाल किला इस बात का गवाह है कि यहां से मुगल बादशाहों ने ज़बरदस्ती और ज़ुल्म के अनेक आदेश जारी किए। धन धन श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी, भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी को चांदनी चौक, दिल्ली में शहीद किया गया। फिर जब दशमेश पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज जी ने श्री आनंदपुर साहिब की धरती पर खालसा पंथ की साजना की, तो खालसा पंथ ने ऐसा इतिहास रचा कि अनेक बार दिल्ली को फतह किया और लाल किले पर खालसे का केसरी निशान साहिब लहराया।
खालसा पंथ के महान जर्नैल जत्थेदार बाबा बघेल सिंह जी, जत्थेदार बाबा जस्सा सिंह जी अहलूवालिया, जत्थेदार बाबा जस्सा सिंह जी रामगढ़िया और जत्थेदार महा सिंह जी घेबा की अगुवाई में 30 हजार फौजों ने दिल्ली को फतह किया, गुरुद्वारों और गुरधामों की निशानदेही कर गुरु घर स्थापित किए। उसी खालसा पंथ का डंका आज भी “दिल्ली फतह दिवस” के रूप में बज रहा है।
इन विचारों का प्रकटावा पंथ प्रसिद्ध सिख प्रचारक, एंबेसडर फॉर पीस, जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल जी, चेयरमैन धर्म प्रचार हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने किया। वे दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा प्रधान सरदार हरमीत सिंह कालका की अगुवाई में हर साल की तरह आयोजित “दिल्ली फतह दिवस” कार्यक्रम में लाल किले के सामने खुले पंडाल में जुड़ी लाखों सिख संगतों को संबोधित कर रहे थे।
जत्थेदार दादूवाल जी ने कहा कि ज़बरदस्ती और ज़ुल्म करने वाले मुगल हाकिमों का आज यहां नामोनिशान नहीं है और गुरु की कृपा से खालसा पंथ की चढ़दी कला की गूंज आज भी लाल किले पर सुनाई दे रही है।
इस दौरान जर्नैली मार्च में घुड़सवार और हाथियों पर सवार निहंग सिंह फौजों के दृश्य देखने योग्य थे। दिल्ली फतह दिवस समारोह में सरदार तरनजीत सिंह संधू (लेफ्टिनेंट गवर्नर दिल्ली), सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा (कैबिनेट मंत्री, दिल्ली सरकार), सरदार हरमीत सिंह कालका (प्रधान, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी), जत्थेदार बाबा बलबीर सिंह (96वें करोड़िया मुखी, शिरोमणि पंथ अकाली बुੱਢा दल), जत्थेदार बाबा मेजर सिंह सोढ़ी (मुखी, दशमेश तरना दल), ज्ञानी गुरदयाल सिंह जी (एडिशनल मुख्य ग्रंथी, तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब), बाबा जोगा सिंह नानकसर करनाल, बाबा बचन सिंह (कार सेवा, दिल्ली), बाबा सुखा सिंह (कार सेवा, भूरी वाले), बाबा गुरपिंदर सिंह वडाला सतलाणी साहिब, बाबा गुरप्रीत सिंह जी (गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़, ग्वालियर), जत्थेदार स्वर्ण सिंह (सदस्य, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी), सरपंच भूपिंदर सिंह लाडी (प्रधान सदस्य प्रतिनिधि), बीबी कपूर कौर (सौंकड़ा, करनाल), सरदार जगदीप सिंह काहलों (जनरल सेक्रेटरी), सरदार जसप्रीत सिंह करमसर (चेयरमैन धर्म प्रचार), डॉ. मनजीत सिंह भोमा (चेयरमैन धर्म प्रचार, पंजाब), सरदार आत्मा सिंह लुबाणा (मीट प्रधान), सरदार हरविंदर सिंह केपी (सीनियर मीट प्रधान) सहित बड़ी संख्या में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य और अन्य पंथक हस्तियां भी उपस्थित थीं।
दिल्ली कमेटी के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा जत्थेदार दादूवाल जी समेत सभी उपस्थित शख्सियतों को सिरोपा और सम्मान चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।


