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वर्दी की आड़ में ‘लूटतंत्र’: सोने के बदले थमाया जाली नोटों का बैग।

सावधान! अब पुलिस से डरिए, सुरक्षा की गारंटी देने वाले ही निकले लुटेरे।

अजीत मिश्रा (खोजी)

खाकी पर कालिख: रक्षक बने भक्षक, क्या अब लुटेरों के हाथ में है सुरक्षा की कमान?

रविवार 25 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

अंबेडकरनगर।। समाज के लिए इससे शर्मनाक तस्वीर और क्या होगी कि जिस वर्दी को देखकर अपराधियों के पसीने छूटने चाहिए थे, आज वही वर्दी खुद ठगी और जालसाजी का नया ठिकाना बन गई है। राजेसुल्तानपुर में पुलिस के दो सिपाहियों ने ‘सस्ता सोना’ दिलाने के नाम पर जो घिनौना खेल खेला, उसने समूचे पुलिस महकमे की साख को सरेराह नीलाम कर दिया है।

👉वर्दी की धौंस और अपराध की जुगलबंदी

इन वर्दीधारी लुटेरों का दुस्साहस तो देखिए—पहले पीड़ित को 2 लाख रुपये का चूना लगाया और जब उसने अपना हक मांगा, तो उसे जालसाजी के केस में जेल भेजने की धमकी दे डाली। यह केवल ठगी नहीं, बल्कि खाकी की आड़ में किया गया ‘संगठित अपराध’ है। सवाल यह उठता है कि क्या इन सिपाहियों को कानून का डर बिल्कुल नहीं था? या फिर इन्हें लगता था कि वर्दी का कवच इन्हें हर पाप से बचा लेगा?

👉लूट का ‘सिस्टम’ और नकली नोटों का बैग

गोरखपुर के युवक को सोने के बदले नकली नोटों का बैग थमाना यह बताता है कि यह कोई अचानक हुई गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। जब रक्षक ही राहजनी पर उतर आएं, तो जनता न्याय की गुहार किसके पास लेकर जाए? यह घटना विभाग के भीतर बैठे उन ‘काली भेड़ों’ की ओर इशारा करती है जो दिन में ड्यूटी करते हैं और रात में अपराधियों के सरगना बन जाते हैं।

👉वर्दी की आड़ में ‘सोने’ का काला खेल

दो सिपाहियों ने मिलकर जिस तरह से गोरखपुर के एक युवक को 2 लाख रुपये का चूना लगाया, वह उनके शातिराना दिमाग की गवाही देता है। सस्ता सोना दिलाने का लालच देना और फिर पैसे ऐंठकर बदले में नकली नोटों का बैग थमा देना—यह किसी पेशेवर अपराधी की कार्यप्रणाली लगती है। विडंबना देखिए, जिन हाथों में कानून की रक्षा के लिए हथकड़ियाँ होनी चाहिए थीं, वे हाथ मासूमों की जेब काटने में मशगूल थे।

👉धमकाने का घिनौना अंदाज

इस घटना का सबसे डरावना पहलू वह है, जहाँ ठगी के बाद पीड़ित शिवम मिश्रा को ही ‘नकली नोटों की तस्करी’ के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई। यह सत्ता और वर्दी के दुरुपयोग की पराकाष्ठा है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्हें लगा कि वे एक आम नागरिक को कानून का डर दिखाकर चुप करा देंगे।

👉विभाग की साख पर सवाल

हालाँकि, एसपी अभिजीत आर शंकर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया है और उनकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार हैं:

⭐क्या पुलिस विभाग के भीतर ऐसे और भी ‘आस्तीन के सांप’ पल रहे हैं?

⭐भर्ती और प्रशिक्षण के दौरान नैतिक मूल्यों पर जोर क्यों नहीं दिया जा रहा?

👉आम आदमी अब खाकी पर भरोसा कैसे करे?

निष्कर्ष: यह घटना पुलिस महकमे के लिए एक चेतावनी है। केवल निलंबन काफी नहीं है; इन ‘वर्दीधारी अपराधियों’ को ऐसी सख्त सजा मिलनी चाहिए जो दूसरों के लिए नजीर बने। जनता को भी यह समझना होगा कि शॉर्टकट में ‘सस्ता सोना’ अक्सर पीतल की चमक से भी बदतर और खतरनाक साबित होता है।

👉महकमे के लिए कड़ा संदेश ज़रूरी

⭐एसपी ने आरोपियों को निलंबित और गिरफ्तार कर अपनी जिम्मेदारी तो निभाई है, लेकिन क्या यह काफी है?

⭐बुलडोजर न्याय की मांग: क्या आम अपराधियों की तरह इन ‘खाकी वाले अपराधियों’ के खिलाफ भी वैसी ही कठोर कार्रवाई होगी?

⭐नैतिकता का जनाजा: आखिर कब तक पुलिस की छवि को ये चंद भ्रष्ट सिपाही धूमिल करते रहेंगे?

कड़वा सच: आज का कड़वा सच यह है कि सड़कों पर घूमती पुलिस की गाड़ी अब सुरक्षा का अहसास कम और डर का माहौल ज्यादा पैदा करने लगी है। यदि इन भ्रष्ट सिपाहियों को सलाखों के पीछे सड़ाया नहीं गया, तो आम आदमी का सिस्टम से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

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