
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨भू-माफियाओं की शरणगाह बना संतकबीरनगर: खाकी और खादी के संरक्षण में लुटती जनता🚨
⭐सावधान! संतकबीरनगर में सक्रिय है ‘जमीन निगलने वाला गिरोह’, महुली पुलिस की चुप्पी बनी माफियाओं का कवच!
⭐महुली का ‘भू-कांड’: रक्षक ही बने भक्षक, माफियाओं की शरणगाह बना संतकबीरनगर!
बस्ती मंडल ब्यूरो संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश
कहने को तो प्रदेश में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का डंका पीटा जाता है, लेकिन संतकबीरनगर जिले के महुली थाना क्षेत्र की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहाँ ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘भू-माफियाओं का आतंक’ फल-फूल रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि जिन्हें रक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, वही पुलिस और राजस्व विभाग के नुमाइंदे इन सफेदपोश अपराधियों के लिए सुरक्षा कवच बने बैठे हैं।
💫बेखौफ माफिया, असहाय पीड़ित
क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक भू-माफिया सक्रिय हैं, जिन्होंने दलितों और निरीह ग्रामीणों की जमीन हड़पने को अपना पेशा बना लिया है। मटिला सोनी जैसी दलित महिलाओं से लेकर लंदन में रह रहे प्रवासियों तक, कोई भी इनके जाल से सुरक्षित नहीं है। फर्जी बैनामा, डराना-धमकाना और पैसा डकार जाना यहाँ की नियति बन चुकी है।
💫पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
लेख में उठाई गई घटनाएं चीख-चीख कर कह रही हैं कि पुलिस केवल ‘निवारक कार्रवाई’ के नाम पर खानापूर्ति कर रही है। जब पीड़ित गुहार लगाता है, तो महीनों तक एफआईआर दर्ज नहीं होती। और अगर दबाव में मुकदमा दर्ज हो भी जाए, तो माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम जान से मारने की धमकी देते हैं।
⚡केस 1: मटिला सोनी का ₹13 लाख आज भी बकाया है, पुलिस मौन है।
⚡केस 2: अमरनाथ से ₹13.75 लाख ठग लिए गए, साल भर बाद मुकदमा हुआ पर वसूली शून्य।
⚡केस 3: परवेज की जमीन पर कब्जा, डीएम के हस्तक्षेप के बाद ही कार्रवाई हुई।
💫क्या साठगांठ है इस खामोशी की वजह?
क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि पुलिस और राजस्व विभाग की सरपरस्ती के बिना यह संभव नहीं है। जब तक पीड़ित उच्चाधिकारियों (डीएम/एसपी) के पास नहीं पहुँचता, स्थानीय स्तर पर सुनवाई ‘कागजी घोड़ों’ तक सीमित रहती है। चौंकाने वाली बात यह है कि सीओ अभय नाथ मिश्रा इस पूरे मामले से अनभिज्ञता जता रहे हैं, जबकि क्षेत्र में खूनी संघर्ष और ‘तांडव’ की खबरें आम हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि ‘माफिया या तो जेल में होंगे या प्रदेश छोड़ देंगे’, लेकिन संतकबीरनगर जिले के महुली थाना क्षेत्र की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। यहाँ न माफिया डरे हैं, न उनके हौसले पस्त हुए हैं। यहाँ का ‘सिस्टम’ शायद भू-माफियाओं की जेब में है, क्योंकि कानून की रक्षक पुलिस और न्याय की धुरी राजस्व विभाग, दोनों ने इन अपराधियों के सामने ‘सरेंडर’ कर दिया है।
1. आधा दर्जन ‘जमीन के सौदागर’ और बेबस कानून
महुली क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक ऐसे भू-माफिया सक्रिय हैं, जिन्होंने कानून की नाक के नीचे अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया है। इनका काम करने का तरीका किसी पेशेवर अपराधी से कम नहीं है। ये पहले गरीब, दलित या असहाय ग्रामीणों को झांसा देकर उनकी कीमती जमीन का सौदा करते हैं। बैनामा कराते समय आधा पैसा दिया जाता है और बाकी रकम मांगने पर शुरू होता है—’धमकियों और खूनी संघर्ष का दौर’।
2. मटिला सोनी से लेकर प्रवासियों तक, कोई सुरक्षित नहीं
पीड़ितों की सूची लंबी है, लेकिन प्रशासन के कान पर जूँ नहीं रेंग रही:
⚡दलितों का शोषण: भीटी माफ़ी निवासी मटिला सोनी जैसी महिलाएं आज भी अपने ₹13 लाख के लिए दर-दर भटक रही हैं। बैनामा तो हो गया, लेकिन पैसा माफिया की तिजोरी में है। क्या पुलिस को यह ‘जालसाजी’ नजर नहीं आती?
⚡प्रवासियों पर हमला: हद तो तब हो गई जब लंदन में रह रहे इकबाल देश की कीमती जमीन पर फर्जी तरीके से डाका डाला गया। जब पीड़ित ने गुहार लगाई, तो पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मजबूरन डीएम के हस्तक्षेप के बाद न्याय की उम्मीद जगी। सवाल यह है कि क्या स्थानीय थाने बिना ‘ऊपर’ के आदेश के काम करना भूल गए हैं?
3. पुलिस का ‘निवारक’ ढोंग और माफियाओं का ‘तांडव’
क्षेत्र में कई बार जमीनी विवाद को लेकर ईंट-पत्थर चले, लाठियां बरसीं और लोग लहूलुहान हुए। लेकिन पुलिस की भूमिका सिर्फ ‘मुकदमा दर्ज करने’ और ‘शांति व्यवस्था’ का नाटक करने तक सीमित रही। जब भू-माफिया खुलेआम ‘जान माल की धमकी’ दे रहे हैं, तब पुलिस महज ‘निवारक कार्रवाई’ (Preventive Action) का झुनझुना थमा रही है। यह ढुलमुल रवैया अपराधियों के लिए ‘संरक्षण’ का काम कर रहा है।
4. राजस्व विभाग की रहस्यमयी चुप्पी
बिना लेखपाल और कानूनगो की ‘मर्जी’ के कोई भी अवैध कब्जा या फर्जी बैनामा संभव नहीं है। जमीनी विवादों में राजस्व विभाग की सुस्ती और गलत रिपोर्टिंग ने माफियाओं को वह खाद-पानी दिया है, जिससे वे आज विशालकाय वटवृक्ष बन चुके हैं। परवेज जैसे पीड़ितों को अपनी ही जमीन के लिए साल भर तहसील के चक्कर काटने पड़ते हैं, जबकि माफिया रातों-रात कागजों में हेरफेर कर लेते हैं।
5. सीओ का ‘अनभिज्ञ’ होना: लापरवाही या मिलीभगत?
हैरानी की बात यह है कि जब इस खौफनाक मंजर के बारे में सीओ अभय नाथ मिश्रा से सवाल किया गया, तो उनका जवाब था— “हमें जानकारी नहीं है।” एक क्षेत्राधिकारी का अपने ही इलाके में हो रहे इतने बड़े ‘भू-कांड’ से अनजान होना, प्रशासनिक अक्षमता की पराकाष्ठा है। यदि अधिकारियों को खबर नहीं है, तो खुफिया विभाग (LIU) क्या कर रहा है? या फिर जानकारी होने के बावजूद ‘सब ठीक है’ का चश्मा पहन लिया गया है?
🔥प्रशासन से सीधे सवाल:
⚡सीओ साहब की अनभिज्ञता या चुप्पी? क्षेत्राधिकारी महुली का यह कहना कि “उन्हें जानकारी नहीं है”, उनकी कार्यकुशलता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। जब आधा दर्जन से अधिक लोग ठगी का शिकार होकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, तो क्या खुफिया तंत्र (LIU) सो रहा है?
⚡एफआईआर में देरी का खेल किसके इशारे पर? अमरनाथ और मटिला सोनी जैसे पीड़ितों को मुकदमा दर्ज कराने के लिए साल-साल भर का इंतजार क्यों करना पड़ा? क्या पुलिस भू-माफियाओं को साक्ष्य मिटाने का समय दे रही थी?
⚡गैंगस्टर एक्ट और कुर्की की कार्रवाई से परहेज क्यों? जब शासन का निर्देश है कि संगठित अपराध करने वाले भू-माफियाओं पर गैंगस्टर एक्ट लगे, तो महुली के इन ‘सफेदपोश’ अपराधियों पर अब तक ‘बुलडोजर’ और ‘कुर्की’ की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
⚡राजस्व विभाग की ‘फर्जी’ रिपोर्ट का आधार क्या है? लंदन निवासी इकबाल देश की जमीन का फर्जी बैनामा हो गया और राजस्व विभाग को भनक तक नहीं लगी? क्या बिना लेखपाल और कानूनगो की मिलीभगत के यह संभव है?
⚡दलितों और प्रवासियों के साथ दोहरा मापदंड क्यों? एक तरफ दलित महिला मटिला सोनी का पैसा डकार लिया गया, दूसरी तरफ प्रवासी भारतीयों की संपत्ति हड़पी जा रही है। क्या संतकबीरनगर पुलिस केवल रसूखदारों की सुरक्षा के लिए है?
⚡खूनी संघर्ष का इंतजार कर रहा है प्रशासन? क्षेत्र में ईंट-पत्थर चले, लाठियां चलीं और लोग घायल हुए। क्या पुलिस किसी बड़े नरसंहार का इंतजार कर रही है, उसके बाद ही माफियाओं पर नकेल कसी जाएगी?
⚡जीरो टॉलरेंस या जीरो एक्शन? मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों को महुली थाना क्षेत्र में ठेंगा क्यों दिखाया जा रहा है? क्या यहाँ के अधिकारियों के लिए शासन के निर्देश कोई मायने नहीं रखते?
निष्कर्ष: कब जागेगा प्रशासन?
सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों का असर संतकबीरनगर की सीमा पर आकर दम तोड़ देता है? यदि समय रहते इन भू-माफियाओं पर ‘गैंगस्टर एक्ट’ और कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो महुली क्षेत्र में कभी भी बड़ा रक्तपात हो सकता है। जनता पूछ रही है—न्याय कब मिलेगा?



















