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साहब ये ‘मशीन है या मजदूर सगमा के सोनडीहा में मनरेगा की धज्जियां उड़ाते दिखे सरकारी कायदे

गढ़वा  जिले के सगमा प्रखंड में एक बार फिर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है

संवाददाता अखिलेश विश्वकर्मा गढ़वा  जिले के सगमा प्रखंड में एक बार फिर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित इस जनकल्याणकारी योजना में नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का आरोप लग रहा है।ताजा मामला प्रखंड के सोनडीहा पंचायत अंतर्गत कलमा गांव का बताया जा रहा है, जहां डोभा निर्माण कार्य में मशीनों के उपयोग का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।प्राप्त जानकारी के अनुसार कलमा गांव में उमेश यादव के खेत में डोभा निर्माण का कार्य मनरेगा के तहत स्वीकृत किया गया है। इस योजना की योजना संख्या 7080904022100 बताई जा रही है, जिसकी प्राक्कलित लागत 3 लाख 98 हजार 656 रुपये निर्धारित है। आरोप है कि इस योजना के नाम पर अब तक 52 हजार 734 रुपये की निकासी भी की जा चुकी है, जबकि कार्य स्थल पर मनरेगा मजदूरों के बजाय जेसीबी मशीन से खुदाई कराई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि डोभा निर्माण का कार्य दिन में मजदूरों से कराने के बजाय रात के समय जेसीबी मशीन लगाकर कराया गया, ताकि किसी को भनक न लगे। इसी दौरान किसी ग्रामीण द्वारा मोबाइल से बनाया गया वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जेसीबी मशीन से डोभा की खुदाई की जा रही है, जो मनरेगा नियमों का सीधा उल्लंघन है।
गौरतलब है कि मनरेगा योजना में मशीनों के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध है। इस योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के गरीब और बेरोजगार मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है। ऐसे में मशीनों से कार्य कराना न केवल नियमों की अवहेलना है, बल्कि मजदूरों के रोजगार के अधिकार पर भी सीधा प्रहार माना जा रहा है।
मामला उजागर होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से वायरल वीडियो के आधार पर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी पदाधिकारियों, कर्मियों एवं लाभुक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, इस मामले में अब तक प्रखंड प्रशासन या संबंधित विभाग के किसी भी अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन वायरल वीडियो को कितनी गंभीरता से लेता है और मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना में हो रही कथित अनियमितताओं पर कब और कैसे लगाम लगाई जाती है।
इस सबंध मे प्रखंड विकास पदाधिकारी सतीश कुमार भगत से पूछे जाने पर उन्होंने कहा की मामले को जानकारी मिली है. स्थल पर टीम नियुक्त कर स्थल पर भेजा गया। रिपोर्ट आने के बाद दोषी के ऊपर कड़ी से कड़ी करवाई किया जाएगा।

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