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।। बस्ती DM से सीधा सवाल: क्या धारा 163 सिर्फ आम जनता के लिए है? ABVP के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन।।

।। सत्ता की हनक में उड़ी नियमों की धज्जियां: बिना परमिशन प्रेक्षागृह में ABVP का जमावड़ा, सोता रहा प्रशासन।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। बस्ती: क्या डीएम की धारा 163 सिर्फ कागजों तक सीमित है? ABVP के ‘नवाचार’ ने उड़ाया नियमों का मखौल।।

बस्ती, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में प्रशासनिक इकबाल पर एक बड़ा सवालिया निशान लग गया है। जहाँ एक तरफ आम आदमी को छोटे-छोटे कार्यक्रमों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ता की हनक में डूबे संगठनों के लिए शायद कानून के मायने ही बदल गए हैं। मामला पंडित अटल बिहारी बाजपेयी प्रेक्षागृह का है, जहाँ बिना किसी पूर्व अनुमति के एबीवीपी (ABVP) द्वारा ‘नवाचार महोत्सव’ का आयोजन धड़ल्ले से किया गया।

🔥धारा 163 की धज्जियां, जेब में प्रशासन!

हैरानी की बात यह है कि जिले में धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू होने के बावजूद सैकड़ों की संख्या में छात्र, छात्राएं और शिक्षक एक छत के नीचे जमा हुए। जानकारों की मानें तो नियमतः ऐसे किसी भी सार्वजनिक जमावड़े के लिए प्रशासन से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ तो नियम-कायदे शायद आयोजन के संयोजक मारुति पाण्डेय और उनकी टीम के उत्साह के आगे बौने साबित हुए।

⭐सोता रहा स्थानीय प्रशासन और पुलिस

इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्राधिकारी सदर और कोवाली प्रभारी की सतर्कता की भी पोल खोल दी है। शहर के बीचों-बीच इतना बड़ा आयोजन हो जाता है और जिम्मेदारों को ‘भनक’ तक नहीं लगती? यह प्रशासनिक जागरूकता है या जानबूझकर की गई अनदेखी?

बड़ा सवाल: क्या धारा 163 का डंडा सिर्फ गरीब और विपक्षी दलों पर चलाने के लिए है? क्या सत्ताधारी विचारधारा से जुड़े संगठनों को कानून तोड़ने की खुली छूट दे दी गई है?

🔥अब ‘एक्शन’ का इंतज़ार

बिना अनुमति के इतने बड़े आयोजन ने बस्ती की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब जनता की नजरें जिलाधिकारी (DM) बस्ती पर टिकी हैं:

⭐क्या इस अवैध जमावड़े और नियम विरुद्ध कार्यक्रम पर कोई मुकदमा दर्ज होगा?

⭐क्या प्रेक्षागृह के प्रबंधन से जवाब-तलबी की जाएगी?

⭐या फिर ‘सत्ता की हनक’ के आगे इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

⭐प्रशासन की चुप्पी यह तय करेगी कि बस्ती में ‘कानून का राज’ है या ‘पहुंच का राज’।

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