
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। महादेव ऐप कांड और ‘मौलिक’ चुप्पी—जब PMO से ट्रेंड होता है भ्रष्टाचार।।
🔥 “50,000 करोड़ का स्कैम PMO की देहली तक पहुँचा, लेकिन ” मीडिया’ की आवाज़… दुबई में गिरवी ।”
04 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।
नई दिल्ली ।। पिछले 48 घंटों से भारत का डिजिटल विमर्श एक अभूतपूर्व राजनीतिक भूकंप का सामना कर रहा है, जिसका केंद्रबिंदु देश का सर्वोच्च प्रशासनिक कार्यालय—प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)—है। महादेव बेटिंग ऐप नामक 50,000 करोड़ से अधिक के अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी घोटाले की आंच सीधे PMO के ओएसडी हिरेन जोशी तक पहुँच चुकी है। इसके साथ ही, लॉ कमीशन के सदस्य हितेश जैन और प्रसार भारती के चेयरमैन नवनीत सहगल के अचानक इस्तीफों ने इस आग को और भड़का दिया है।
हैरानी की बात नहीं, लेकिन चिंता की बात है कि जहाँ सोशल मीडिया पर #MahadevBettingScam और #HirenJoshi जैसे हैशटैग टॉप पर ट्रेंड कर रहे हैं, वहीं देश के मुख्यधारा के टीवी चैनल्स पर पूर्ण ख़ामोशी छाई हुई है—मानो कुछ हुआ ही न हो। यह चुप्पी केवल एक घटना को छिपाना नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के चरित्र हनन का नवीनतम प्रमाण है।
💫 सत्ता के गलियारे में सट्टेबाजी का साया—
महादेव बेटिंग ऐप एक ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट है जो दुबई से संचालित होता है और जिसने हवाला के जरिए 50,000 करोड़ से अधिक का कारोबार किया है। ED और CBI की जाँच में यह पहले ही साबित हो चुका है कि इसके मालिकों—सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल—ने नेताओं, पुलिस अधिकारियों और उच्च अधिकारियों को बड़े पैमाने पर रिश्वत दी।
💫 अब यह जाँच दिल्ली की सत्ता के केंद्र तक पहुँच चुकी है:
1. हिरेन जोशी (PMO OSD): प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात दिनों से उनके सबसे करीबी और मीडिया मैनेजमेंट का काम संभालने वाले जोशी पर सीधा आरोप है। वायरल चैट्स और दस्तावेज़ों में दावा किया जा रहा है कि उन्हें दुबई से महादेव ऐप के मालिकों द्वारा ‘नैरेटिव सेटिंग’, विदेशी डील्स और चैनल मैनेजमेंट के बदले मोटी रकम और कमीशन मिलता था। उनकी गिरफ्तारी की आशंका के चलते उनका अचानक इस्तीफा देकर भाग जाना, संदेह को कई गुना बढ़ा देता है।
2. हितेश जैन (लॉ कमीशन): जोशी के कथित करीबी और अप्रैल 2025 में नियुक्त जैन का अक्टूबर अंत तक इस्तीफा देना, और रातों-रात सरकारी बंगला खाली करवा देना—इस बात की अफवाहों को बल देता है कि लॉ कमीशन के माध्यम से बेटिंग कानूनों में ढील दिलाने की कोशिश हो रही थी।
3. नवनीत सहगल (प्रसार भारती): चेयरमैन पद पर एक साल का कार्यकाल बाकी रहते हुए उनका 2 दिसंबर को इस्तीफा देना भी इसी कड़ी का हिस्सा प्रतीत होता है। भले ही उनकी स्पष्ट भूमिका अभी उजागर न हुई हो, लेकिन उच्च पदों पर बैठे तीन व्यक्तियों का एक साथ और आकस्मिक प्रस्थान, एक बड़े प्रशासनिक शुद्धिकरण की ओर इशारा करता है।
💫 मौन की कीमत और पत्रकारिता का पतन—
सबसे बड़ा सवाल यह है कि PMO में बैठा व्यक्ति यदि अंतरराष्ट्रीय बेटिंग माफिया का हिस्सा था, तो यह देश की सुरक्षा, प्रशासन और वित्तीय ईमानदारी के लिए कितना बड़ा खतरा है?
विपक्ष ने खुले तौर पर CBI जाँच की माँग की है और हिरेन जोशी के ‘अमेरिकी पार्टनर’ और पैसे के लेन-देन पर जवाब माँगा है।
लेकिन देश के सारे टीवी चैनल्स चुप हैं, और इसके पीछे का कारण तीखा और स्पष्ट है: हिरेन जोशी ही वह व्यक्ति थे जो लंबे समय से PMO के भीतर बैठकर इन चैनलों के ‘कंट्रोल रूम’ का काम करते थे—पार्टी की नैरेटिव सेटिंग, खबरों को दबाना और सरकार के हितों की रक्षा करना। चूँकि इस कांड की जड़ें सीधे PMO के “बाएँ हाथ” तक पहुँच चुकी हैं, इसलिए उन चैनलों के लिए इस पर बोलना असंभव है, जिनकी वफादारी सत्य से नहीं, सत्ता से बंधी हुई है।
यह ख़ामोशी केवल एक पत्रकारिता की असफलता नहीं है। यह सत्ता के भ्रष्टाचार के सामने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के पूर्ण आत्मसमर्पण का दस्तावेज़ है। जब 50,000 करोड़ के काले धंधे की गूँज PMO तक पहुँचे और देश की सबसे बड़ी मीडिया इस पर मुँह बंद रखे, तो यह स्पष्ट है कि सवाल उठाने की हिम्मत और सत्य बोलने का साहस रुपये की गिरावट से भी तेज़ी से गिर चुका है।















