

🚨 मेरठ पुलिस के आदेश पर जयंत चौधरी का कड़ा विरोध, ऑरवेलियन 1984 से की तुलना!
🔹 सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ पढ़ने पर पुलिस की कार्रवाई को बताया गलत
🔹 कहा- “पुलिस समुदाय से संवाद करे, धमकी न दे”
🔹 मेरठ पुलिस ने उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की दी चेतावनी
मेरठ, 27 मार्च 2025:
मेरठ पुलिस द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ अदा करने पर रोक लगाने के आदेश को लेकर राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस आदेश की तुलना जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास ‘1984’ की पुलिसिंग से करते हुए कहा कि यह आदेश तानाशाही को दर्शाता है।
जयंत चौधरी ने अपने बयान में कहा,
“पुलिस को समुदाय से संवाद करना चाहिए, न कि लोगों को धमकी देकर डराने का प्रयास करना चाहिए। पासपोर्ट जब्त करने जैसी बातें करना पूरी तरह से गलत है। लोकतंत्र में इस तरह के कदम समाज में विभाजन पैदा करते हैं।”
🚨 मेरठ पुलिस का आदेश – सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पर रोक
मेरठ पुलिस ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। पुलिस प्रशासन ने इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
✅ क्यों लिया गया यह फैसला?
📌 प्रशासन का तर्क है कि सार्वजनिक स्थानों पर भीड़भाड़ होने और ट्रैफिक बाधित होने की शिकायतें मिली थीं।
📌 पुलिस का कहना है कि धार्मिक गतिविधियों के लिए अधिकृत स्थल तय किए गए हैं, और सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजन से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
🚨 पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल!
हालांकि, पुलिस के इस आदेश को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। जयंत चौधरी सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।
🔥 विवाद क्यों गहराया?
✅ समर्थन में तर्क:
🔹 प्रशासन का मानना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक स्थलों पर ट्रैफिक अवरुद्ध होने से रोकना जरूरी है।
🔹 कई लोगों का कहना है कि अगर सार्वजनिक स्थलों पर कोई भी धार्मिक आयोजन ट्रैफिक बाधित करता है, तो प्रशासन को दखल देना चाहिए।
❌ विरोध में तर्क:
🔹 जयंत चौधरी जैसे नेताओं का मानना है कि यह आदेश धार्मिक स्वतंत्रता पर चोट है और समुदाय विशेष को निशाना बनाया जा रहा है।
🔹 विपक्षी दलों का आरोप है कि पुलिस को किसी भी आदेश को लागू करने से पहले सभी समुदायों से संवाद करना चाहिए था।
📢 क्या मेरठ पुलिस का यह आदेश सही है? आपकी क्या राय है?
इस फैसले पर जनता की राय भी बंटी हुई है। कुछ लोग इसे सामाजिक समरसता के लिए जरूरी कदम मानते हैं, तो कुछ इसे भेदभावपूर्ण आदेश बता रहे हैं।
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📰 विशेष रिपोर्ट
✍️ संपादक: एलिक सिंह, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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