

================卐卐卐卐卐================= वंदेभारतलाइवटीव न्युज-: हमारे सनातन धर्म में वैशाख शुक्ल पक्ष को आने वाली तृतीया तिथि-अक्षय तृतीया को युगादि पर्व का दर्जा दिया गया है। अक्षय तृतीया के दिन पूजा जप तप दान धर्म का अपना विशेष महत्व होता है। इस वर्ष 2025 में अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल दिन बुधवार को है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि मंगलवार 29 अप्रैल 2025 को शाम के 5:29 बजे से शुरू हो रही है और बुधवार 30 अप्रैल 2025 को दोपहर के 2:12 बजे तक रहेगी। हमारे सनातन धर्म में सूर्योदय उदया तिथि का महत्व है। अत: 30 अप्रैल बुधवार 2025 को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जायेगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05:41बजे से लेकर दोपहर 12:18 बजे तक विशेष फलदायी है। इस दौरान किसी भी समय पूजा जप तप दान धर्म उत्तम फलदायी है। पौराणिक मान्यतानुसार वैशाख मास शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि अक्षय तृतीया से ही सतयुग की शुरुआत माना जात है। मान्यतानुसार अक्षय तृतीया के दिन से ही वेदव्यास जी ने धार्मिक ग्रंथ महाभारत की रचना की शुरुआत की थी। वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया को भगवान परशुराम जी का जन्म भी हुआ था। इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। भगवान परशुराम जी, विष्णु जी के छठवें अवतार माने जाते हैं। वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष होता है। इस दिन किए जाने वाले दान धर्म जप तप पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। अक्षय तृतीया पर लोग आभूषण सोना चांदी आदि भी खरीदना शुभ मानते हैं। अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त भी माना जाता है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। इस दिन पवित्र नदियों जलाशयों में स्नान कर अपने शक्ति सामर्थ्य के अनुसार अन्न जल धन सोना आभूषण फल इत्यादि दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन दिन हिन भूखे जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र आदि भी दान करना शुभफलदायक होता है। वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि अक्षय तृतीया के दिन बद्रीनाथ धाम के कपाट भी खुलते हैं, और वृंदावन में बांकेबिहारी जी के चरणों के दर्शन वर्ष में एकबार होते हैं। अक्षय तृतीया की तिथि खेती किसानी के लिए भी अधिक शुभफलदायी मानी जाती है। अक्षय तृतीया पर भगवान विषणु और माता लक्ष्मी की संयुक्त रूप से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।


