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अपर जिला जज ने किया कारागार का साप्ताहिक भ्रमण

 <img src="https://vandebharatlivetvnews.com/wp-content/uploads/2025/07/FB_IMG_1752720835075.jpg" alt="" width="640" height="480" class="alignnone size-full wp-image-539155" />      

उरई (जालौन)उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार अपर जिला जज, सचिब /जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती पारुल पँवार ने दिनांक 16.07.2025 को जिला कारागार उरई का साप्ताहिक भ्रमण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया। उन्होंने विभिन्न बैरकों का भ्रमण किया और वहां निरूद्ध बन्दियों से पूछ-तांछ करते हुये उनकी समस्यों को जाना समझा तथा जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। इस मौके पर जेल प्रशासन के अधिकारीगण मौजूद थे।
निरीक्षण में सचिव/अपर जिला जज, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती पारुल पँवार ने जिन बन्दियों की जमानत सक्षम न्यायालय से हो चुकी हैं किन्तु जमानतगीर न होने के कारण रिहा नहीं हो पा रहे हैं, उनकी सूची अविलम्ब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के कार्यालय में प्रेषित किये जाने हेतु जेल प्रशासन को निर्देशित किया, जिससे कि उन बन्दियों के सम्बन्ध में प्रभावी पैरवी कर उन्हे शीघ्रता से कारागार से रिहा करवाया जा सकें एवं जिन बन्दियों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हैं उनकी जमानत राज्य की ओर से जिला अधिकार प्राप्त समिति जालौन के माध्यम से करवायी जा सकें। बन्दियों के मुकदमों की पैरवी, उनको दी जाने वाली विधिक सहायता/सलाह और महिला बन्दी व उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा व खान-पान इत्यादि के बारे में जाना-परखा। उन्होंने कई बन्दियों से अलग-अलग जानकारी ली एवं जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि कोई भी ऐसा बन्दी जिसका निजी अधिवक्ता न हो अथवा विधिवत् ढंग से न्यायालयों में पैरवी न हो पा रही हो, को विधिक सहायता दिलाये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें। यदि किसी विचाराधीन बन्दी को पैरवी हेतु सरकारी खर्चे पर अधिवक्ता की आवश्यकता हो तो सम्बन्धित न्यायालय में बन्दी की ओर से प्रार्थनापत्र दिलवाया जाना सुनिश्चित करें ताकि एमाइकस क्यूरी (न्यायमित्र) की सुविधा उपलब्ध हो सके। इसीप्रकार जो बन्दी दोषसिद्ध हो चुके हैं, की अपील न हो पाने की स्थिति में नियमानुसार जेल अपील करायी जाये। इसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से आवश्यक समन्वय बनाकर ऐसे प्रकरणों का निर्धारित समयावधि में निस्तारण किया जाये ताकि अपील की मियाद समाप्त न होने पाये। जेल अपील कराये जाने में यदि कोई विधिक समस्या आ रही है तो उसको जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संज्ञान में लाते हुये द्वारा उचित माध्यम माननीय उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति से यथा आवश्यक पत्राचार किया जाये।
इसके उपरान्त विधिक साक्षरता शिविर की अध्यक्षता करते हुये सचिव/अपर जिला जज श्रीमती पारुल पँवार ने शिविर का शुभारम्भ किया। इसके उपरान्त असिस्टेंट, लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल सिस्टम श्री प्रतीक सिंह ने बताया कि भारतीय संविधान की उद्देशिका के तहत भारत के समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय की बात की गयी है। समाज के सभी वर्गों को भारतीय न्यायिक प्रणाली में न्याय पाने का समुचित एवं सामान अवसरमिले, इसलिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39 A भारत देश के ग़रीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करता है। निःशुल्क क़ानूनी सहायता का मतलब है किअभियुक्त या प्रार्थी को वक़ील की सेवाएं मुहैया करवाना। सीधे शब्दों में कहा जाये तो अपने देश में ज़्यादातर लोग जो जेलों में बंद हैं और जिनके ऊपर कोर्ट की कार्यवाही चल रही है, वह ग़रीब,अशिक्षित एवं अति पिछड़े वर्ग के लोग हैं। जिनको अपने अधिकारों के बारे में नहीं पता है। जिसकी वजह से वह जेल की यातनाओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि उनको उनके अधिकारों के बारे में न ही सिर्फ बताया जाये बल्कि क़ानूनी सहायता भी प्रदान की जाये।
इस अवसर पर प्रभारी जेल अधीक्षक श्री प्रदीप कुमार, चिकित्साधिकारी डॉ0 राहुल बर्मन, उपकारापाल श्री अमर सिंह तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के लिपिक श्री शुभम् शुक्ला उपस्थित रहे।
इसके उपरान्त कलेक्ट्रेट परिसर स्थित वन स्टॉप सेन्टर उरई में आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय प्रबन्धक श्रीमती अंजना यादव व स्टॉप नर्स श्रीमती शारदा सहित स्टॉफ उपस्थित मिला। प्रबन्धक श्रीमती अंजना यादव द्वारा बताया गया कि काउन्सलर श्रीमती रागिनी व केस वर्कर श्रीमती प्रवीणा ट्रेनिंग हेतु मुख्यालय से बाहर गयी हुयी हैं। सेन्टर का समस्त व्यवस्थाओं को जांचा जिसमें व्यवस्थायें सन्तोषजनक पायी गयी। निरीक्षण के समय वन स्टॉप सेन्टर पर कोई भी महिला पीड़िता उपस्थित नहीं पायी गयी।

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