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एकलव्य फाउंडेशन बीजाडांडी द्वारा चकमक क्लब के रिसोर्स बच्चों का एक दिवसीय प्रशिक्षण

चकमक क्लबों के 37 रिसोर्स बच्चों का एक दिवसीय प्रशिक्षण एकलव्य ऑफिस बीजाडांडी में सम्पन्न हुआ।

एकलव्य फाउंडेशन बीजाडांडी द्वारा ओरेकल इंडिया के वित्तीय सहयोग से ब्लॉक के 10 गाँवों — बरवाही, बरौंची, सोधन पिपरिया, कुरकुटी, घुघरी, उदयपुर, पिपरिया (बुदरा), बेरपानी-1, बेरपानी-2 और बुदरा में संचालित चकमक क्लबों के 37 रिसोर्स बच्चों का एक दिवसीय प्रशिक्षण एकलव्य ऑफिस बीजाडांडी में सम्पन्न हुआ।IMG 20250911 WA0015 1

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कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों के बीच आपसी परिचय की गतिविधि से हुई। इसके बाद सामूहिक गीत “मैं तुमको विश्वास दूँ, तुम मुझको विश्वास दो” गाकर बच्चों ने आपसी भरोसे और सहयोग का संदेश सांझा किया। चकमक क्लबों में अब तक हुए कार्यों की समीक्षा और रिसोर्स बच्चों की जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सत्र के दौरान बच्चों को जेंडर समाजीकरण के विषय पर संवाद में शामिल किया गया। चर्चा में बच्चों ने बताया कि लिंग की पहचान डॉक्टर, माता-पिता या जन्म के समय लिंग देखकर की जाती है। किस प्रकार समाज में लिंग के आधार पर कार्य और भूमिकाओं का विभाजन किया जाता है।
इसी क्रम में किशोरावस्था में लड़के और लड़कियों में होने वाले बदलावों पर चर्चा की गई। इस दौरान एकलव्य द्वारा प्रकाशित “बेटी करे सवाल” और “बेटा करे सवाल” पुस्तकों का संदर्भ लेते हुए बच्चों को पुस्तकों से महत्वपूर्ण विचार सांझा किए गए। तथा सभी केंद्रों में यह किताबों का सेट भी दिया गया। इसके उपरांत सामूहिक गीत “मुंह सी के अब जी न पाउंगी जरा सब से ये कह दो” को गाने के बाद इनके शब्दों की गहराई को समझा गया | साथ ही बच्चों को वीडियो के माध्यम से माहवारी से जुड़ी वैज्ञानिक समझ दी गई तथा समाज में प्रचलित धारणाओं और मान्यताओं पर विमर्श हुआ। प्रशिक्षण को रोचक बनाने के लिए बच्चों ने मैदानी खेल जैसे डोज बॉल, घघरी रिले, कंगारू रिले और बर्फ-पानी खेल में उत्साहपूर्वक भागीदारी की। कार्यक्रम के अगले चरण में अंधविश्वास और सामाजिक मान्यताओं पर चर्चा हुई। चंद्रग्रहण से जुड़ी परंपरागत मान्यताओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की तुलना करते हुए बच्चों को तार्किक सोच के लिए प्रेरित किया गया।
यह एक दिवसीय प्रशिक्षण बच्चों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि इसमें उनकी सक्रिय भागीदारी और उत्साहजनक उपस्थिति ने इसे और भी सार्थक बना दिया। हमारी कोशिश रही कि बच्चों को पाठयपुस्तक के अलावा अन्य माध्यमों से भी सीखने समझने का अवसर मिले। जिससे बच्चों में 21वीं सदी के कौशलों का विकास हो सके | इस वर्कशॉप के दौरान एकलव्य बीजाडांडी से अभिलाष यादव, शिव मरकाम, सुरेश पाल, रामकुमार धुर्वे, माधुरी, नेहा, अजय हनोते, खेमप्रकाश यादव, सूरज धुर्वे उपस्थित रहे |

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