
गिरौधपुरी की पावन धरा से मुख्यमंत्री के नाम भावनात्मक संदेश — गौ माता को ‘राज्य माता’ घोषित करने की मार्मिक अपील
गिरौधपुरी —
छत्तीसगढ़ की पावन, पवित्र और आस्था की धरोहर गिरौधपुरी धाम से एक अत्यंत भावनात्मक और संवेदनशील संदेश आज राज्य शासन के नाम प्रेषित किया गया। यह संदेश केवल किसी एक वर्ग, जाति या धर्म का नहीं, बल्कि समूचे समाज, मानवता और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है।
इस पावन स्थल से निवेदन किया गया कि गौ माता, जो भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सनातन परंपरा की आधारशिला हैं, उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य में ‘राज्य माता’ का दर्जा दिया जाए।
संदेश में कहा गया कि
> “गौ माता का सम्मान किसी एक धर्म का विषय नहीं, बल्कि यह सभी धर्मों, सभी जातियों और समाज के हर वर्ग के हित और कल्याण से जुड़ा विषय है। गौ माता में करुणा, पालन और जीवन का सार निहित है।”
दिनांक 12 दिसंबर से 18 दिसंबर तक यह शांतिपूर्ण, नैतिक और आध्यात्मिक आग्रह राज्य शासन के समक्ष रखा गया है।
वक्ताओं ने कहा कि यदि शासन इस अवधि में जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गौ माता को राज्य माता घोषित करता है, तो 14 दिसंबर से 17 दिसंबर 2025 के बीच आभार रैली निकालकर मुख्यमंत्री एवं शासन के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाएगी।
यह भी स्पष्ट किया गया कि यह आंदोलन अहिंसक, संवैधानिक और पूरी तरह शांतिपूर्ण है, जिसका उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि जन-आस्था की आवाज़ को लोकतांत्रिक तरीके से शासन तक पहुँचाना है।
आम जनता से भावनात्मक अपील करते हुए कहा गया—
> “यह विषय राजनीति से ऊपर है। यह संस्कृति, करुणा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ।”
निवेदन किया गया कि यह संदेश
फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, रील और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से साझा कर
सभी विधायक, सांसद, मंत्री एवं जनप्रतिनिधियों तक पहुँचाया जाए, ताकि जनभावनाओं की सच्ची तस्वीर शासन के समक्ष आ सके।
गिरौधपुरी की पावन भूमि से उठी यह आवाज़ आज केवल एक मांग नहीं, बल्कि
संवेदना, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर गूंज रही है।







