

🗳️ बड़ी खबर: सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशन चुनाव 2026–27 में सियासी सरगर्मी चरम पर, पुंडीर ग्रुप की प्रत्याशी फौजिया फरहत को मिल रहा ज़बरदस्त समर्थन
सहारनपुर।
सहारनपुर सिविल कोर्ट परिसर इन दिनों अधिवक्ता राजनीति का केंद्र बन चुका है, जहां आगामी 16 जनवरी 2026 को होने वाले सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव 2026–27 को लेकर जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। यह चुनाव केवल पदों की औपचारिक प्रक्रिया भर नहीं है, बल्कि इसे अधिवक्ताओं के सम्मान, अधिकार, सुविधाओं और संगठन के भविष्य की दिशा तय करने वाला निर्णायक चुनाव माना जा रहा है। इसी कारण कोर्ट परिसर में सुबह से शाम तक चर्चाओं, बैठकों, समर्थन अभियानों और रणनीतिक मुलाकातों का दौर लगातार जारी है।
इस चुनाव में जूनियर गवर्निंग काउन्सिल जैसे अहम पद को लेकर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। इस पद के लिए ठाकुर विश्वंभर सिंह पुंडीर ग्रुप की प्रत्याशी एडवोकेट फौजिया फरहत को अधिवक्ताओं का व्यापक, संगठित और मजबूत समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। कोर्ट परिसर में यह चर्चा आम है कि फौजिया फरहत इस बार एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आई हैं और उनका चुनावी अभियान लगातार गति पकड़ता जा रहा है।
फौजिया फरहत को खासतौर पर युवा और महिला अधिवक्ताओं के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल है। समर्थकों का कहना है कि वे लंबे समय से अधिवक्ताओं की समस्याओं को लेकर गंभीर रही हैं और हर मंच पर अधिवक्ता हितों की बात मजबूती से उठाती रही हैं। चैंबर, लाइब्रेरी, बैठने की व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं की कमी और नवागत अधिवक्ताओं की परेशानियों जैसे मुद्दों पर उनका रुख स्पष्ट और मुखर रहा है, जिससे अधिवक्ताओं के एक बड़े वर्ग में उनके प्रति भरोसा बढ़ा है।
ठाकुर विश्वंभर सिंह पुंडीर ग्रुप का अधिवक्ता एसोसिएशन में वर्षों पुराना अनुभव भी फौजिया फरहत की दावेदारी को मजबूती प्रदान कर रहा है। यह ग्रुप पूर्व में भी एसोसिएशन में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है और अधिवक्ताओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन से संवाद, संघर्ष और समाधान की राजनीति के लिए जाना जाता है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि संगठनात्मक अनुभव और मजबूत टीम के साथ पुंडीर ग्रुप एक बार फिर एसोसिएशन को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।
हलचल इंडिया न्यूज़ से बातचीत में प्रत्याशियों और समर्थक अधिवक्ताओं ने बताया कि यदि उन्हें अधिवक्ताओं का समर्थन मिलता है तो उनकी प्राथमिकताओं में सबसे पहले अधिवक्ताओं के लिए बेहतर और सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही कोर्ट प्रशासन और जिला प्रशासन से बेहतर समन्वय स्थापित करना, अधिवक्ताओं की समस्याओं को समयबद्ध तरीके से उठाना और संगठन की गरिमा को बनाए रखना भी उनके एजेंडे में शामिल है। प्रत्याशियों ने यह भी स्पष्ट किया कि युवा और नवागत अधिवक्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, आधुनिक लाइब्रेरी व्यवस्था, डिजिटल संसाधनों की सुविधा और मार्गदर्शन प्रणाली को मजबूत करना उनकी विशेष प्राथमिकता रहेगी।
चुनावी माहौल को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ-साथ युवा अधिवक्ताओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। सिविल कोर्ट परिसर में समूहों में बैठकर चुनावी समीकरणों पर चर्चा हो रही है और मतदाता यह तय करने में जुटे हैं कि संगठन को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए। कई अधिवक्ताओं का मानना है कि यह चुनाव एसोसिएशन की एकजुटता, पारदर्शिता और प्रभाव को नए सिरे से परिभाषित करेगा।
मतदान को लेकर अधिवक्ता समुदाय से लगातार अपील की जा रही है कि वे अधिक से अधिक संख्या में 16 जनवरी 2026 को मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करें। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि मजबूत मतदान प्रतिशत ही संगठन को वास्तविक प्रतिनिधित्व और वैधता प्रदान करता है। यह चुनाव केवल नई कार्यकारिणी का गठन नहीं करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में अधिवक्ता एसोसिएशन की नीतियों, कार्यशैली और प्रशासन के साथ उसके संबंधों को भी तय करेगा।
कुल मिलाकर सहारनपुर सिविल कोर्ट परिसर का चुनावी माहौल यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि यह मुकाबला न केवल रोचक होने वाला है, बल्कि अधिवक्ता संगठन के भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण भी साबित होगा। अब सभी की निगाहें 16 जनवरी 2026 पर टिकी हैं, जब अधिवक्ता अपने मत के माध्यम से यह तय करेंगे कि संगठन की कमान किस दिशा और किस सोच को सौंपी जाए।
📰 रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक / ब्यूरो चीफ – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ / हलचल इंडिया न्यूज़
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