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मायसेम सीमेंट फैक्ट्री नरसिंहगढ़ में स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिए जाने को लेकर दमोह जिले के बेरोजगार युवाओं का आक्रोश

मायसेम सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ बेरोजगार युवाओं का अल्टीमेटम, 15 दिन में मांगें नहीं मानी तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

नरसिंहगढ़। मायसेम सीमेंट फैक्ट्री नरसिंहगढ़ में स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिए जाने को लेकर दमोह जिले के बेरोजगार युवाओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को बेरोजगार युवा यात्रा के समापन पर युवाओं ने फैक्ट्री प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते हुए 15 दिन के भीतर मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर अनिश्चितकालीन धरना और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

युवाओं का कहना है कि फैक्ट्री स्थानीय जमीन पर स्थापित है और यहीं से पत्थर का दोहन किया जा रहा है, इसके बावजूद दमोह जिले के युवाओं को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है, जो अन्यायपूर्ण है।

6 से 12 जनवरी तक निकाली गई बेरोजगार युवा यात्रा
बेरोजगार युवाओं ने बताया कि 6 जनवरी से 12 जनवरी तक बेरोजगार युवा यात्रा निकाली गई, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और फैक्ट्री प्रबंधन तक अपनी बात पहुंचाना था। यात्रा के समापन पर सोमवार को मायसेम सीमेंट फैक्ट्री के मुख्य प्रबंधक को यह ज्ञापन सौंपा गया।

युवाओं ने स्पष्ट कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह स्थानीय हित, रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़ी हैं। यदि फैक्ट्री प्रबंधन ने मांगों को नजरअंदाज किया, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

युवाओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कुल 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं।

1 फैक्ट्री में बड़ी पोस्टों पर दमोह जिले के शिक्षित युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर भर्ती दी जाए।

2 फैक्ट्री में लेबर कार्य के लिए केवल दमोह जिले के मजदूरों को अवसर दिया जाए।

3 फैक्ट्री में इंटर्नशिप कर रहे युवाओं को स्थायी रोजगार प्रदान किया जाए।

4 फैक्ट्री में कार्य के दौरान दुर्घटना में मृत वर्करों के बच्चों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।

5 जिन गांवों की जमीन फैक्ट्री द्वारा ली गई है, वहां पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाए।

6 फंसिया नाला में एक शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाए।

7 फैक्ट्री की पत्थर ब्लास्टिंग से जिन घरों में दरारें और नुकसान हुआ है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।

8 फैक्ट्री की डस्ट से खराब हो रही फसलों के लिए किसानों को मुआवजा दिया जाए।

9 फैक्ट्री में कार्यरत छोटी-बड़ी सभी पोस्टों पर कर्मचारियों की संख्या और उनमें दमोह जिले के लोगों की वास्तविक भागीदारी की जानकारी सार्वजनिक की जाए।

10 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की ग्रेड और वेतन में बढ़ोतरी की जाए।

“15 दिन में जवाब नहीं मिला तो उग्र आंदोलन”

युवाओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा लिखित आश्वासन नहीं दिया गया, तो वे फैक्ट्री गेट पर विशाल, उग्र और अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी फैक्ट्री प्रबंधन की होगी।

स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश

इस पूरे मामले को लेकर आसपास के गांवों के किसानों और मजदूरों में भी रोष देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण, ब्लास्टिंग और रोजगार की अनदेखी ने उनका जीवन प्रभावित किया है, लेकिन उनकी समस्याओं पर अब तक गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।
ज्ञापन में जिला पंचायत सदस्य दृगपाल लोधी, कवि चन्द्रभान सिंह लोधी, एडवोकेट नरेंद्र प्रताप सिंह, मुकेश पटेल, विक्रम सिंह, गुड्डू सिंह, देवकीनंदन पटेल, बलीराम चौधरी, अरविंद सिंह, नीलेश सिंह, रोहित सिंह, उत्तम रैकवार, अरमान पटेल, राजा खान, वीर पटेल, लखन रैकवार, दीपक विश्वकर्मा, मदन ठाकुर, हरीश सेन, मोनू अहिरवार, राजेंद्र सिंह सहित हजारों की संख्या में बेरोजगार युवा मौजूद रहे।

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