
मनरेगा संविदा कर्मचारियों का आक्रोश – जामखेड के कर्मचारियों ने विधान परिषद सभापति प्रो. राम शिंदे को सौंपा ज्ञाप
अहिल्यानगर / जामखेड :
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत संविदा अधिकारी एवं कर्मचारियों पर हो रहे अन्याय के विरोध में पूरे राज्य में असंतोष व्याप्त है। इसी पृष्ठभूमि में अहिल्यानगर जिले के जामखेड तालुका के मनरेगा संविदा अधिकारी एवं कर्मचारी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए तथा उन्होंने विधान परिषद के सभापति माननीय प्रो. राम शिंदे को ज्ञापन सौंपकर अपनी न्यायसंगत मांगों की ओर ध्यान आकृष्ट किया।
ज्ञापन के माध्यम से मनरेगा संविदा कर्मचारियों की कई वर्षों से लंबित गंभीर समस्याओं को सामने रखा गया। कर्मचारियों ने अल्प मानदेय, सेवा सुरक्षा का अभाव, “समान कार्य – समान वेतन” का लाभ न मिलना, भविष्य निधि (PF), बीमा सुविधा तथा नियमितीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के लंबित होने पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की।
इस अवसर पर S-2 Infotech नामक निजी कंपनी के माध्यम से की जा रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई। कर्मचारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया से वर्तमान कार्यरत कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है। अतः शासन से मांग की गई कि इस भर्ती प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए तथा मनरेगा संविदा कर्मचारियों के लिए अलग, पारदर्शी और न्यायपूर्ण सेवा नियमावली तैयार की जाए।
ज्ञापन सौंपते समय समीर शेख, प्रदीप निमकर, शिवराज जगताप, परशुराम उतेकर, दीपक बोराडे, संभाजी ढोले, महेश पेचे सहित जामखेड तालुका के अन्य मनरेगा कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
ज्ञापन स्वीकार करते हुए विधान परिषद सभापति माननीय प्रो. राम शिंदे ने कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने तथा संबंधित विभाग से चर्चा कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, ऐसा कर्मचारियों ने बताया।
इस बीच, यदि मांगों पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 23 जनवरी 2026 से जामखेड सहित संपूर्ण महाराष्ट्र में आंदोलन और अधिक तीव्र किया जाएगा, ऐसा चेतावनी भरा संकेत मनरेगा संविदा अधिकारी एवं कर्मचारी संगठनों की ओर से दिया गया है।





