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गलत तरीके से जाँच काउंसिलिंग करने वाले महिला सेल प्रभारी तरुणा मदनाकर के विरुध्द एफआईआर दर्ज करने की माँग

महासमुन्द:- मामला छत्तीसगढ़ के जिला महासमुन्द का है। एक पारिवारिक मामले में जांच काउंसिलिंग करने वाले परिवार परामर्श केन्द्र व महिला सेल प्रभारी तरुणा मदनाकार के विरुद्ध अनेकों उच्चाधिकारियों, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को एफआईआर दर्ज कराने हेतु शिकायत आवेदन प्रेषित किया गया है। बता दें कि कुछ महिनें पहले इन्द्रजीत प्रधान के विरुध्द उसकी पत्नी ने थाना सांकरा में शिकायत किया था, चूंकि मामला पारिवारिक होने के कारण माननीय न्यायालय के गाइडलाइंस के अनुसार पहले परिवार परामर्श केन्द्र में काउंसिलिंग होना था। काउंसिलिंग के लिए थाना सांकरा व्दारा परिवार परामर्श केन्द्र व महिला सेल महासमुन्द को शिकायत आवेदन में जाँच काउंसिलिंग करने के लिए आवेदन को स्थानांतरित कर दिया। परिवार परामर्श केन्द्र प्रभारी तरुणा मदनकार व्दारा इसकी जाँच काउंसिलिंग किया जा रहा था। तरुणा मदनकार के विरुध्द शिकायतकर्ता इन्द्रजीत प्रधान के आवेदन के अनुसार आरोप है कि जाँच काउंसिलिंग मनमानी, पक्षपात व विद्वेष पूर्ण तरीके से किया जा रहा है। शिकायतकर्ता इन्द्रजीत प्रधान जो पेशे से अधिवक्ता भी है उनका आरोप है कि तरुणा मदनकार के जाँच काउंसिलिंग की भूमिका संदेहास्पद है इसकी भूमिका की जाँच होनी चाहिए। तरुणा मदनकार के व्दारा निष्पक्ष जाँच काउंसिलिंग नहीं किया जा रहा है। मेरी पत्नी का बयान तरुणा मदनकार के व्दारा तीन-चार दिन तक अलग-अलग लिया गया जो विधिवत नहीं है। झूठा मामला बनाने एवं इन्द्रजीत प्रधान को क्षति कारित करने के उद्देश्य गलत तरीके से पक्षपात पूर्ण जांच काउंसिलिंग कर थाना सांकरा को इन्द्रजीत प्रधान के विरुध्द मामला दर्ज करने हेतु प्रतिवेदन भेज दिया गया था। यहां प्रश्न उठता है कि अगर तरुणा मदनकार की जाँच काउंसिलिंग सहीं था तो कार्यालय पुलिस अधीक्षक जिला महासमुन्द के व्दारा स्कूटनी में त्रुटि क्यों पाई गई और पुनः जाँच काउंसिलिंग के लिए क्यों भेजा गया और इन्द्रजीत प्रधान को बचाव साक्ष्य व गवाह प्रस्तुत करने का अवसर नहीं देकर तरुणा मदनकार के व्दारा जाँच काउंसिलिंग प्रतिवेदन बनाकर थाना सांकरा इन्द्रजीत प्रधान के विरुध्द मामला दर्ज करने के लिए प्रतिवेदन भेज दिया। इसकी जानकारी लगने पर इन्द्रजीत प्रधान ने तरुणा मदनकार के विरुध्द नियम विरुद्ध जाँच काउंसिलिंग करने का पुलिस अधीक्षक महासमुन्द और उच्चाधिकारियों को इसकी शिकायत की। जिसमें कार्यालय पुलिस अधीक्षक जिला महासमुन्द के व्दारा उक्त जाँच काउंसिलिंग प्रतिवेदन रिपोर्ट को जांच करने पर त्रुटि पाई गई। कार्यालय पुलिस अधीक्षक जिला महासमुन्द के व्दारा पुनः जाँच काउंसिलिंग करने एवं इन्द्रजीत प्रधान को साक्ष्य, गवाह प्रस्तुत करने का अवसर देने के लिए तरुणा मदनकार को आदेशित किया। उक्त रिपोर्ट को मांगने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत् आवेदन किया गया तो तरुणा मदनकार ने सूचना का अधिकार आवेदन लेने से मना कर दिया। इन्द्रजीत प्रधान ने बताया कि तरुणा मदनकार के पास जांच काउंसिलिंग फाइल पहले थाना सांकरा भेजा गया जिसमें त्रुटि पूर्ण जांच काउंसिलिंग करना पाया, अगर इस तरुणा मदनकार के विरुध्द एफआईआर दर्ज होकर विवेचना होता है तो विवेचना अधिकारी के व्दारा इसके जाँच काउंसिलिंग फाइल देखने पर सारा मामला और खामियां पकड़ा जाएगा क्योकिं ग़लत तरीके से और विद्वेष पूर्ण किसी को फंसाने या झूठा मामला बनाने के उद्देश्य से जांच काउंसिलिंग करना कानूनन अपराध है। इस गलत व मनमानी पूर्ण तरीके से जांच काउंसिलिंग करने वाले तरुणा मदनकार के विरुध्द इन्द्रजीत प्रधान ने थाना सरायपाली, थाना सिटी कोतवाली महासमुन्द, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) महासमुन्द, उप पुलिस अधीक्षक महासमुन्द, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर, महानिरिक्षक, आयुक्त, पुलिस महानिदेशक, अवर मुख्य सचिव गृह एवं जेल विभाग, मुख्य सचिव, मानवाधिकार आयोग, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), केन्द्रीय मानवाधिकार आयोग, केबिनेट सचिव भारत सरकार, केन्द्रीय गृहमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को शिकायत आवेदन तरुणा मदनकार के विरुध्द एफआईआर दर्ज कराने के लिए मांग किया गया है।

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