
अजीत मिश्रा (खोजी)
“कुदरहा के जिम्मेदारों को बड़े हादसे का इंतज़ार? पुष्पा देवी पब्लिक स्कूल में मानकों की उड़ी धज्जियां।
”बड़ा खुलासा: बिना डिग्री के शिक्षक और बेसमेंट में स्कूल, बस्ती मंडल में शिक्षा माफिया बेखौफ!”
“अवैध स्कूल या मौत का पिंजरा? गनेशपुर में मकान के भीतर चल रहा फर्जीवाड़ा, कब जागेगा प्रशासन?”
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
मौत के ‘बेसमेंट’ में कैद मासूमों का भविष्य: बस्ती में शिक्षा विभाग की मिलीभगत से चल रहा अवैध धंधा!
बस्ती। जनपद के विकास खंड कुदरहा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो जिला शिक्षा विभाग के दावों की धज्जियां उड़ा रही है। यहाँ ‘श्रीमती पुष्पा देवी पब्लिक स्कूल, गनेशपुर (डेल्हवा पाऊं)’ के नाम पर शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाला एक “डेथ ट्रैप” चलाया जा रहा है।
बिना मान्यता, बिना मानक: अँधेरे में नौनिहाल
हैरानी की बात यह है कि यह तथाकथित स्कूल एक मकान के तंग बेसमेंट में संचालित हो रहा है। न तो स्कूल के पास वैध मान्यता है और न ही भवन का कोई सुरक्षा मानक। उमस और अंधेरे भरे इस बेसमेंट में बच्चों को ठूंसकर बिठाया जा रहा है, जो किसी भी अप्रिय घटना (जैसे आग या जलभराव) की स्थिति में काल का ग्रास बन सकता है। क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
अयोग्य शिक्षक, अंधकारमय भविष्य
सूत्रों की मानें तो इस विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के पास न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तक नहीं है। जिन्हें खुद अक्षर ज्ञान का सही बोध नहीं, वे बच्चों का भविष्य गढ़ने का ढोंग कर रहे हैं। यह सीधे तौर पर अभिभावकों की जेब और बच्चों के भविष्य पर डाका है।
तीखा सवाल: आखिर किसके संरक्षण में कुदरहा क्षेत्र में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है? क्या खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को इस अवैध बेसमेंट स्कूल की भनक नहीं है, या फिर जानबूझकर आँखों पर पट्टी बाँध ली गई है?
अब कार्रवाई का इंतज़ार
अवैध विद्यालयों की बाढ़ ने जिले की शिक्षा व्यवस्था को वेंटिलेटर पर ला खड़ा किया है। जनता अब जवाब मांग रही है:
क्या इस अवैध विद्यालय को तुरंत सील किया जाएगा?
बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले संचालकों पर FIR दर्ज होगी?
क्या उन अधिकारियों पर गाज गिरेगी जिनकी लापरवाही से यह दुकान चल रही है?
यदि समय रहते इस “शिक्षा माफिया” पर लगाम नहीं कसी गई, तो गनेशपुर का यह बेसमेंट किसी मासूम के लिए कब्रगाह भी साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कागजी घोड़े दौड़ाता है या धरातल पर कड़ा प्रहार करता है।























