
अजीत मिश्रा (खोजी)
भ्रष्टाचार और लापरवाही पर ‘इंसाफ’ का मखौल: वसूलीबाज ANM को ‘सजा’ या ‘पुरस्कार’?
- खैरा एएनएम सेंटर में भ्रष्टाचार का खेल: जांच में दोषी मिली सरिता कुमारी, बर्खास्तगी के बजाय सिर्फ ब्लॉक बदला
- सीएमओ साहब जवाब दें! इंजेक्शन के नाम पर 3 हजार वसूलने वाली एएनएम पर इतनी ‘नरमी’ क्यों?
- “बच्चे ने गंदा पानी पिया है…” कहकर डराया और वसूले पैसे, आरोपी एएनएम को बचाने में जुटा बस्ती स्वास्थ्य महकमा!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
बस्ती। जनपद के स्वास्थ्य महकमे में न्याय की परिभाषा शायद बदल चुकी है। जहाँ एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दम भरती है, वहीं बस्ती के खैरा एएनएम सेंटर में मानवता को शर्मसार करने वाली करतूत सामने आने के बाद जो कार्रवाई हुई है, उसने सिस्टम की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या नवजात की जान से खिलवाड़ और खुलेआम धनउगाही जैसे जघन्य अपराध की सजा सिर्फ एक ‘ट्रांसफर’ है? क्या स्थानांतरण इतनी बड़ी लापरवाही के लिए उचित न्याय है?
मामला: इलाज के नाम पर वसूली और ‘गंदा पानी’ का डर
पूरा मामला भानपुर तहसील के खैरा एएनएम सेंटर का है। पीड़ित गोपाल सिंह लोधी ने आरोप लगाया था कि प्रसव के बाद एएनएम सरिता कुमारी ने उनसे 5000 रुपये की मांग की। हद तो तब हो गई जब ममता के इस केंद्र को व्यापार का अड्डा बना दिया गया। प्रसव के बाद बच्चे की नाजुक स्थिति का फायदा उठाते हुए एएनएम ने डराया कि “बच्चे ने गंदा पानी पी लिया है” और इंजेक्शन लगाने के नाम पर 3000 रुपये की अतिरिक्त डिमांड की।
एक गरीब पिता से खुशी के मौके पर इस तरह की अवैध वसूली न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के चेहरे पर कालिख पोतने जैसा है।
जांच में सच साबित हुए आरोप, फिर भी ‘नरम’ कार्रवाई
पीड़ित ने हार नहीं मानी और मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) तक गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए ACMO डॉ. अशोक चौधरी ने जांच की। जांच में पीड़ित द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सीएमओ बस्ती ने कार्रवाई तो की, लेकिन वह ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसी साबित हुई। आरोपी एएनएम सरिता कुमारी को भानपुर से हटाकर साउघाट ब्लॉक भेज दिया गया।
तीखे सवाल: क्या साउघाट में बदल जाएगी फितरत?
सवाल नंबर 1: क्या ट्रांसफर कोई सजा है? क्या विभाग यह मान चुका है कि भानपुर के लिए जो ‘जहर’ थी, वह साउघाट के लिए ‘अमृत’ साबित होगी?
सवाल नंबर 2: जिस एएनएम ने नवजात की जान का सौदा किया, उसे बर्खास्त करने के बजाय सिर्फ स्थान परिवर्तन कर विभाग क्या संदेश देना चाहता है?
सवाल नंबर 3: क्या स्वास्थ्य विभाग ऐसे लापरवाह और भ्रष्ट कर्मियों को संरक्षण दे रहा है?
निष्कर्ष: > सरकारी अस्पतालों में गरीब आदमी इस उम्मीद में जाता है कि उसे मुफ्त और बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन खैरा जैसे केंद्रों पर बैठे ‘सफेदपोश लुटेरे’ सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं। अगर ऐसे गंभीर मामलों में सिर्फ तबादला ही अंतिम न्याय है, तो आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठना लाजमी है। उच्चाधिकारियों को चाहिए कि इस मामले में कठोर विभागीय कार्रवाई और रिकवरी सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में कोई दूसरा स्वास्थ्यकर्मी किसी नवजात की जान का सौदा न कर सके।























