
अजीत मिश्रा (खोजी)
वर्दी पर लगा ‘रक्त’ और ‘रिश्वत’ का दाग: पुलिस की वसूली ने ली युवक की जान?
मंडल ब्यूरो चीफ – बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
- विक्रमजोत पुलिस का ‘खूनी’ चेहरा: न्याय के बदले मांगी रिश्वत, अब मिला युवक का शव।
- शर्मनाक! रिपोर्ट लिखने के बजाय बाप को बनाया बंधक, अगले दिन मिली लापता बेटे की लाश।
- बस्ती मंडल में पुलिसिया तांडव: आधी रात दबिश, अवैध वसूली और फिर एक सनसनीखेज हत्या।
- वर्दी के पीछे छिपी वसूली की भूख: क्या अब पुलिस की चौकियों पर तय होगी जान की कीमत?
- दहशत में ग्रामीण: विक्रमजोत चौकी प्रभारी पर हत्या और लापरवाही के सीधे आरोप।
- अयोध्या रिंग रोड किनारे मिली जली हुई लाश, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सुलगते सवाल।
- बिना FIR आधी रात को दबिश क्यों? चौकी प्रभारी शशि शेखर सिंह के ‘रसूख’ पर उठे सवाल।
बस्ती। उत्तर प्रदेश में सुशासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच बस्ती जिले से पुलिसिया कार्यप्रणाली को शर्मसार करने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने खाकी के मानवीय चेहरे को बेनकाब कर दिया है। विक्रमजोत चौकी क्षेत्र के रमहटिया गांव के पास अयोध्या रिंग रोड किनारे संदिग्ध हालात में लापता हुए युवक गया प्रसाद वर्मा की जली हुई लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। यह महज एक हत्या नहीं, बल्कि पुलिस की संवेदनहीनता, अवैध वसूली और घोर लापरवाही का वह चरम है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया।
रक्षक ही जब भक्षक बन जाए!
मृतक युवक के परिजनों ने जो आरोप लगाए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। आरोप है कि जब गया प्रसाद संदिग्ध हालात में लापता हुआ, तो विक्रमजोत चौकी प्रभारी शशि शेखर सिंह ने FIR दर्ज करने के बजाय ‘रंगदारी’ का खेल शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मदद के नाम पर पीड़ित पिता को ही चौकी में बैठा लिया और युवक की बरामदगी के बदले 50 हजार रुपये की मोटी मांग की। सवाल उठता है कि क्या अब न्याय की कीमत उत्तर प्रदेश पुलिस की चौकियों पर तय होगी?
आधी रात की दबिश और लाश का मिलना: गहरे सवाल
मामला तब और संदिग्ध हो जाता है जब परिजनों ने बताया कि चौकी प्रभारी ने बिना किसी FIR के आधी रात को मृतक के घर दबिश दी। जब युवक नहीं मिला, तो उसके लाचार पिता को उठाकर चौकी ले आए और दिनभर अवैध तरीके से बैठाए रखा। आखिर पुलिस की यह कौन सी जांच प्रक्रिया है जहां पीड़ित को ही प्रताड़ित किया जाता है? जिस युवक की तलाश के लिए पुलिस को जमीन-आसमान एक कर देना चाहिए था, अगले ही दिन उसकी लाश अयोध्या रिंग रोड किनारे जली हुई हालत में मिली। शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ के निशान साफ गवाही दे रहे हैं कि हत्या कितनी बर्बरता से की गई है।
आक्रोश की आग में जलता विक्रमजोत
शव मिलने की खबर जैसे ही फैली, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। विक्रमजोत CHC पर भारी भीड़ जमा हो गई और ‘खाकी’ के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सर्किल के कई थानों की फोर्स को मौके पर बुलाना पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों का सीधा आरोप है कि चौकी प्रभारी शशि शेखर सिंह की लापरवाही और अवैध वसूली की भूख ने एक जान ले ली।
चौकी प्रभारी: विवादों का पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब विक्रमजोत और घघौवा पुलिस सुर्खियों में है। चर्चा है कि चौकी प्रभारी शशि शेखर सिंह पर पहले भी अवैध धंधों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर किसके रसूख के चलते इन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई? क्या पुलिस की इसी ढिलाई और संरक्षण ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं?
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
सीओ स्वर्णिमा सिंह के समझाने-बुझाने पर परिजन शांत तो हुए हैं, लेकिन इलाके में आक्रोश की चिंगारी अभी भी सुलग रही है। लोग पूछ रहे हैं कि:
- बिना किसी मुकदमे के आधी रात को दबिश किसके आदेश पर दी गई?
- पीड़ित पिता को चौकी में बैठाकर 50 हजार की मांग करने वाले ‘वर्दीधारी अपराधियों’ पर मुकदमा कब दर्ज होगा?
- क्या जिले के आला अधिकारी इस ‘खाकी के दाग’ को धोने की हिम्मत दिखाएंगे?
अगर इस मामले में निष्पक्ष जांच और आरोपी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का पुलिस से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा। अब देखना यह है कि बस्ती पुलिस प्रशासन इस हत्याकांड और वसूली के आरोपों पर क्या रुख अपनाता है।
















