आगर-मालवा। परंपरागत खेती के बीच आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान किस तरह अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं, इसकी मिसाल विकासखंड नलखेड़ा के ग्राम बोरखेड़ी में देखने को मिली। यहां प्रगतिशील किसान शांतिलाल यादव ने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के सहारे पपीते की उन्नत खेती का मॉडल तैयार किया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना ने उनके खेत पहुंचकर आधुनिक खेती का अवलोकन किया और उत्पादन, लागत तथा बाजार में मिलने वाले भाव की जानकारी ली।
*700 पौधे, 10 से 11 लाख की सकल आय का अनुमान*
कृषक शांतिलाल यादव ने कलेक्टर को बताया कि उन्होंने अपने खेत में वीएनआर किस्म के पपीते के कुल 700 पौधे लगाए हैं। फसल में पानी की बचत और बेहतर उत्पादन के लिए ड्रिप सिंचाई के साथ मल्चिंग तकनीक अपनाई गई है। किसान के मुताबिक प्रत्येक पौधे से 50 से 70 किलोग्राम उत्पादन मिलने का अनुमान है। बाजार में पपीते का भाव 20 से 30 रुपये प्रति किलो रहने पर करीब 10 से 11 लाख रुपये की सकल आय संभावित है।
इस खेती पर लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये खर्च हुए हैं। ऐसे में किसान को करीब 7.5 से 8.5 लाख रुपये तक शुद्ध लाभ मिलने की उम्मीद है। आधुनिक तकनीक और बेहतर फसल प्रबंधन से खेती को लाभकारी बनाने का यह प्रयास क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणादायक बन सकता है।
*मिश्रित खेती से बढ़ेगी आमदनी, घटेगा जोखिम*
कलेक्टर डॉ. मीना ने जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक लाभ अर्जित करने के कृषक के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पपीते के साथ अमरूद और पुष्पों की मिश्रित खेती करने की सलाह देते हुए कहा कि इससे किसानों के पास आय के एक से अधिक स्रोत उपलब्ध होंगे और किसी एक फसल पर निर्भरता का जोखिम भी कम होगा।
अवलोकन के दौरान जिला पंचायत सीईओ बीएस सोलंकी, एसडीएम सुसनेर-नलखेड़ा श्रीमती देव कुंवर सोलंकी, उपसंचालक उद्यानिकी अर्जुन सिंह राजपूत सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।