आगर-मालवा। ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का कानूनी मालिकाना हक दिलाने वाली स्वामित्व योजना में जिले की रजिस्ट्री प्रक्रिया की रफ्तार अभी भी धीमी बनी हुई है। जिले में 482 गांवों के 70,574 भूखंडों पर 87,976 हितग्राहियों को अधिकार देने का लक्ष्य है, लेकिन अब तक केवल 16,298 रजिस्ट्री ही पूरी हो सकी हैं। यानी कुल लक्ष्य के मुकाबले महज 23.09 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। तहसीलवार समीक्षा में सुसनेर ने बाजी मारते हुए पहला स्थान हासिल किया, जबकि आगर और बड़ौद की धीमी प्रगति पर कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना ने नाराजगी जताई।
मंगलवार को आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री निष्पादन की स्थिति का तहसीलवार जायजा लिया। आंकड़ों में सुसनेर तहसील 32.40 प्रतिशत प्रगति और 3,722 पूर्ण रजिस्ट्रियों के साथ जिले में पहले स्थान पर रही। सोयतकलां तहसील 31.21 प्रतिशत और 2,326 रजिस्ट्रियों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
**आगर सबसे पीछे, बड़ौद की स्थिति भी चिंताजनक**
समीक्षा में नलखेड़ा तहसील में 24.23 प्रतिशत यानी 3,783 रजिस्ट्रियां पूरी होना सामने आया। वहीं बड़ौद में 18.11 प्रतिशत के साथ 3,081 और आगर तहसील में सबसे कम 17.81 प्रतिशत के साथ 3,386 रजिस्ट्रियां पूर्ण हुई हैं। कम प्रगति वाली तहसीलों, विशेषकर आगर और बड़ौद के राजस्व अधिकारियों को कलेक्टर ने काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
**अभी इन स्तरों पर अटकी हैं रजिस्ट्रियां**
जिले में रजिस्ट्री निष्पादन की प्रक्रिया में 1,702 प्रकरण प्रारंभिक स्तर पर हैं, जबकि 1,888 पटवारी सत्यापन स्तर पर लंबित हैं। इसके अलावा 270 प्रकरण सबमिटेड और 48 पंजीयन प्रक्रिया में हैं। इन सभी प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण करने पर जोर दिया गया।
**रोजाना लक्ष्य तय कर पूरा करें काम**
कलेक्टर डॉ. मीना ने कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीण आबादी को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार देने वाली महत्वपूर्ण योजना है। इससे ग्रामीण अपनी संपत्ति के आधार पर बैंक ऋण सहित अन्य आर्थिक सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। इसलिए इस कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी तहसीलदारों और पटवारियों को प्रतिदिन लक्ष्य निर्धारित कर रजिस्ट्री निष्पादन का काम पूरा करने के निर्देश दिए।