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Sonbhadra news:दुर्गम खोखा में शिक्षा का दीप जला, हर बच्चे तक पहुंचा नामांकन का संदेश

प्रवेशोत्सव की रंगत और विदाई की भावुकता—विद्यालय बना प्रेरणा का केंद्र

दुद्धी सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_
विकास खण्ड दुद्धी के अति दुर्गम एवं वनांचल क्षेत्र में स्थित कंपोजिट विद्यालय, खोखा में शिक्षा के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता का अद्भुत संगम देखने को मिला। “शिक्षा का सबको अधिकार, कोई न छूटे अबकी बार” के प्रेरक नारे के साथ आयोजित भव्य प्रवेशोत्सव एवं विदाई समारोह ने पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार किया।    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अमर सिंह, प्रधानाचार्य, राजकीय हाई स्कूल बहेराडोल द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने अभिभावकों को जागरूक करते हुए कहा कि कक्षा 8 उत्तीर्ण करने वाले प्रत्येक छात्र-छात्रा का कक्षा 9 में अनिवार्य रूप से नामांकन कराया जाए, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्य धारा से वंचित न रह जाए। उन्होंने विशेष रूप से शाला त्यागी (ड्रॉप आउट) विद्यार्थियों को पुनः विद्यालय से जोड़ने का आह्वान किया।
विद्यालय परिवार द्वारा इस अवसर पर मेधावी एवं प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। प्रधानाचार्य अमर सिंह एवं सुबोधकांत वशिष्ठ ने बच्चों को सम्मानित कर उनके अंदर आगे बढ़ने की नई ऊर्जा भर दी। तालियों की गूंज के बीच बच्चों के चेहरों पर आत्मविश्वास और खुशी झलक उठी।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब विद्यालय की सेवा में वर्षों तक समर्पित रही रसोइया अतवरिया देवी को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। प्रधानाध्यापक द्वारा उन्हें माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं मिष्ठान भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षक, अभिभावक एवं बच्चे भावुक हो उठे और वातावरण कुछ पल के लिए भावनाओं से भर गया।
कार्यक्रम में शिक्षक रमेश यादव, सतीश मिश्रा, शिक्षामित्र लल्लन सिंह, सितारा पटेल सहित एसएमसी अध्यक्ष सुनील कुमार एवं अभिभावकगण—कामेश्वर, सुदेश्वर, सीता देवी, संतोष, दीपक, रोहित, आशुतोष समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।


अंत में प्रधानाध्यापक द्वारा सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया। यह आयोजन न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम रहा, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज की जिम्मेदारी और जागरूकता का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा, जिसने हर किसी के मन में यह संदेश छोड़ा—“अब कोई बच्चा शिक्षा से दूर नहीं रहेगा।”

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