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आस्था या आबकारी? काली माता मंदिर के पास शराब का ठेका, भड़के बस्तीवासी।

सिद्धपीठ की दहलीज पर छलकेगा जाम? महिलाओं ने डीएम से पूछा- कहाँ गया शासन का नियम?

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। आस्था पर ‘आबकारी’ का प्रहार: पुरानी बस्ती में माता के द्वार पर मदिरा का पहरा।

रविवार 18 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। एक तरफ सरकार धार्मिक स्थलों के सुंदरीकरण और उनकी गरिमा बनाए रखने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के कारिंदे चंद रुपयों के राजस्व के लिए जनभावनाओं को रौंदने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड स्थित ऐतिहासिक पौराणिक काली माता मंदिर का है, जहाँ मंदिर की चौखट के पास खुली शराब की दुकान ने श्रद्धालुओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

मानकों की धज्जियां, आस्था पर चोट

पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह वह पावन स्थल है जहाँ माता पार्वती की कनिष्ठा उंगली गिरी थी। इस सिद्ध पीठ पर चौबीसों घंटे साधु-संतों, महिलाओं और बच्चों का जमावड़ा रहता है। लेकिन प्रशासन की नाक के नीचे, नियमों को ताक पर रखकर मंदिर के महज 200 मीटर के दायरे में देशी शराब का ठेका खोल दिया गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि शराब की दुकान खुलने से मंदिर का शांत और आध्यात्मिक वातावरण दूषित हो रहा है। पियक्कड़ों के जमावड़े और अभद्र भाषा के प्रयोग से महिलाओं का मंदिर मार्ग से गुजरना दूभर हो गया है। सवाल यह उठता है कि क्या आबकारी विभाग को दुकान आवंटित करते समय मंदिर की दूरी और उसकी महत्ता दिखाई नहीं दी?

जिलाधिकारी की चौखट पर गुहार

आक्रोशित मोहल्लेवासियों ने जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्स्ना से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई। जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र में महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस ठेके को तुरंत स्थानांतरित नहीं किया गया, तो जन-आक्रोश बड़ा रूप ले सकता है। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि मंदिर परिसर की शुचिता से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

प्रार्थना पत्र देने वालों में मुख्य रूप से: प्रीती गुप्ता, पुष्पा देवी, पूनम गुप्ता, प्रर्मिला देवी, सुधा देवी, प्रीति कसौधन, राजमती देवी, आराधना गुप्ता, विमला देवी सहित भारी संख्या में मोहल्लेवासी शामिल रहे।

तीखा सवाल:

क्या प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? धार्मिक स्थलों के पास शराब की दुकानों पर पाबंदी के नियम क्या सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? अगर यह मंदिर ऐतिहासिक और पौराणिक है, तो इसके बगल में सुरा प्रेमियों का अड्डा खोलना जनहित में है या सिर्फ राजस्व का लालच?

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