
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी का ‘किलो’ वाला खेल: गांजा तस्करों पर मेहरबानी या बरामदगी का फर्जीवाड़ा?
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
- “महुली पुलिस का ‘जुगाड़’: तस्करों से यारी और कागजों में एक किलो की खानापूर्ति!”
- “क्या बस्ती मंडल में नशा माफिया कंगाल हो गए? पुलिस की एक किलो वाली बरामदगी पर उठे सवाल।”
- “बरामदगी का ‘सेटिंग’ वाला खेल: तस्कर जेल गया पर असली माल कहाँ गया?”
- “संतकबीरनगर पुलिस का ‘फोटो सेशन’ अभियान: बड़ी मछलियाँ साफ, प्यादे एक किलो के साथ गिरफ्तार!”
बस्ती/संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल में पुलिस और अपराधियों के बीच की लुका-छिपी अब किसी से छिपी नहीं है। ताजा मामला संतकबीरनगर जिले के महुली थाने का है, जहां पुलिस ने एक तथाकथित गांजा तस्कर को गिरफ्तार कर अपनी पीठ तो थपथपा ली है, लेकिन बरामदगी की ‘मात्रा’ ने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तस्कर बड़ा या पुलिस का दिल?
अखबारों की सुर्खियों में ‘बड़ी सफलता’ के नाम पर छपी खबर बताती है कि पुलिस ने एक तस्कर को दबोचा और उसके पास से महज 1 किलो गांजा बरामद हुआ। सवाल यह उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश में नशा माफिया इतने ‘गरीब’ हो गए हैं कि वे झोले में मात्र एक किलो गांजा लेकर तस्करी कर रहे हैं? या फिर यह पुलिस का वो पुराना और घिसा-पिटा ‘बरामदगी का खेल’ है, जिसमें आरोपी को जेल भी भेज दिया जाता है और ‘मोटा माल’ रास्ते में ही कहीं ‘एडजस्ट’ कर लिया जाता है?
‘सेट’ है सारा खेल!
जानकार बताते हैं कि पुलिस अक्सर भारी मात्रा में बरामदगी होने पर उसे कागजों में कम दिखाती है। 1 किलो की बरामदगी दरअसल पुलिस के लिए ‘सेफ गेम’ है। इससे न तो पुलिस पर बड़ी जांच का दबाव रहता है और न ही तस्कर को लंबे समय तक सलाखों के पीछे रहने का डर। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह ‘एक किलो’ की बरामदगी पुलिस और अपराधियों के बीच के मौन समझौते (Settings) की गवाही दे रही है।
तस्करी की जड़ पर प्रहार या सिर्फ खानापूर्ति?
बढ़या बाग जैसे व्यस्त इलाकों में पान की दुकानों के पास सरेआम गांजा बिक रहा है, और पुलिस को खबर तब लगती है जब उसे अपनी ‘मंथली रिपोर्ट’ चमकानी होती है। क्या पुलिस कप्तान संदीप कुमार मीणा इस बात की जांच कराएंगे कि मंडल में पकड़े जाने वाले हर दूसरे तस्कर के पास से ‘एक किलो’ का ही जादुई आंकड़ा क्यों निकलता है?
बड़ा सवाल: जब तक पुलिस बरामदगी के इस ‘किलो वाले खेल’ को बंद नहीं करेगी, तब तक बस्ती मंडल नशामुक्त कैसे होगा? जनता अब खाकी की इस घिसी-पिटी स्क्रिप्ट को समझने लगी है।
















