*जनजाती*भगवान बिरसा मुंडाजी की 150वीं जयंती के अवसर पर नगरीय विकास एवं गृह मंत्री श्री दर्शनाबेन वाघेला की प्रेरक उपस्थिति में श्री राम पार्टी प्लॉट दाहोद में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया
*जनजातीय गौरव वर्ष महोत्सव* 0000000 *भगवान बिरसा मुंडाजी की 150वीं जयंती के अवसर पर नगरीय विकास एवं गृह मंत्री श्री दर्शनाबेन वाघेला की प्रेरक उपस्थिति में श्री राम पार्टी प्लॉट दाहोद में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया* 0000000 *भगवान बिरसा मुंडाजी 'धरती आबा' का गौरवशाली एवं दुर्लभ इतिहास आने वाली कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेगा* *मंत्री श्री दर्शनाबेन वाघेला* 00000000 *गणमान्य व्यक्तियों के हाथों सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ वितरित किया गया* 0000000 *जिले के आदिवासी समुदाय के खिलाड़ियों एवं मेधावी विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया* 0000000 दाहोद:- भारत के गौरवशाली एवं दिव्य इतिहास में धरती आबा के रूप में विशिष्ट स्थान प्राप्त करने वाले एवं अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले इस वर्ष को 'जनजातीय गौरव' के रूप में मनाया जा रहा है। भगवान बिरसा मुंडाजी की 150वीं जयंती के अवसर पर, जिन्होंने एक महान संघर्ष किया, पूरे भारत में 'वर्ष' मनाया जा रहा है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी ने इसे 'जनजाति गौरव दिवस' के रूप में मनाने की परंपरा शुरू करके समस्त आदिवासी समुदाय को गौरवान्वित किया है। आज, जिला प्रशासन द्वारा दाहोद श्री राम पार्टी प्लॉट, दाहोद में भगवान बिरसा मुंडाजी की 150वीं जयंती के अवसर पर शहरी विकास एवं शहरी आवास मंत्री श्री दर्शनाबेन वाघेला की प्रेरक उपस्थिति में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें विधायक श्री कन्हैयालाल किशोरी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस कार्यक्रम के दौरान, मंत्री श्री एवं गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना सहित सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ वितरित किया गया। इस अवसर पर, सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मंत्री श्री दर्शनाबेन वाघेला ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडाजी ने जल, जंगल और ज़मीन को बचाने और अपने सम्मान की रक्षा के लिए छोटी सी उम्र में ही अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उनकी लड़ाई इतनी प्रचंड थी कि अंग्रेजों को जल, जंगल और ज़मीन के साथ-साथ आदिवासियों के हक और अधिकार के लिए नीति बनाने पर मजबूर होना पड़ा। भगवान बिरसा मुंडाजी 'धरती आबा' का गौरवशाली और दुर्लभ इतिहास आने वाली कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेगा। इसके अलावा, मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं ताकि सभी लाभ उन्हें मिलें, और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को पहली पंक्ति में लाया जा सके। आज हम सभी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। मात्र 25 वर्ष की आयु में अपने प्राण त्यागने वाले भगवान बिरसा मुंडा के विचार आज भी उतने ही आदर्श हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुरी आदतों को छोड़ने के उनके विचार आज भी हमें राह दिखाते हैं। सरकार उनके विचारों को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास कर रही है। भगवान बिरसा मुंडा की आज 150वीं जयंती मनाई जा रही है। सरकार आदिवासियों के लिए बहुत ही नेक काम कर रही है। भगवान बिरसा मुंडा ने उस समय अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उसी लड़ाई में शहीद हो गए। उनका जीवन सभी आदिवासी समुदायों के लिए प्रेरणा बन रहा है। आज सरकार छोटे से छोटे आदिवासी व्यक्ति को भी बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित कर रही है। अपने संबोधन में उन्होंने आदिवासियों पर अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों को भी याद किया। आज हम शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य जैसे सभी क्षेत्रों में अग्रणी हैं। विधायक श्री कन्हैयालाल किशोरी ने इस अवसर पर संबोधन देते हुए कहा कि बिरसा मुंडा जी ने हमारे लिए जो किया है उसे कभी न भुलाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। हमें अपने पूर्वजों द्वारा देश के लिए दिए गए बलिदानों को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी देश के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने बहुत कुछ किया है। आज भी, इस देश को विश्व मानचित्र पर नंबर एक बनाने के लिए उनके मिशन मोड में अथक प्रयास किए जा रहे हैं। भगवान बिरसा मुंडाजी की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला पुलिस अधीक्षक श्री रविराजसिंह जाडेजा, परियोजना प्रशासक श्री देवेंद्र मीणा, नगराध्यक्ष श्री नीरज देसाई, प्रांताधिकारी श्री मिलिंद दवे, मुख्याधिकारी श्री दीपसिंह हठीला, पथप्रदर्शक श्री अभिषेकभाई मेड़ा सहित पदाधिकारी, मामलतदार श्री प्रदीपसिंह गोहिल सहित अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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*मैहर की धरती, कटनी का नाम : झुकेही क्षेत्र में धूल-धुएँ के बीच दम तोड़ती ज़िंदगियाँ* मैहर जिले का झुकेही क्षेत्र आज विकास और विनाश के बीच फंसा हुआ है। यहाँ की धरती से निकल रही छूही और चुना पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हो सकते थे, लेकिन हकीकत इसके उलट है। यहाँ उत्पादन मैहर में, प्रदूषण मैहर में, बीमारी मैहर में, और जब बात मुनाफ़े व पहचान की आती है तो नाम लिया जाता है—कटनी का। झुकेही क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चल रहे छूही एवं चुना भट्ठों से निकलने वाला धूल और धुआँ स्थानीय लोगों के लिए अभिशाप बन चुका है। दिन के समय कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि सड़क तक दिखाई नहीं देती। सांस लेना दूभर हो जाता है, लेकिन इस धुएँ को नापने, रोकने या नियंत्रित करने वाला कोई नजर नहीं आता। बीमार होती आबादी, बेपरवाह सिस्टम स्थानीय नागरिकों के अनुसार क्षेत्र में सांस, आंखों और त्वचा से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसके बावजूद न तो कभी स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं, न कोई नियमित चिकित्सकीय जांच कराई जाती है। भट्ठों में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति और भी चिंताजनक है। बिना मास्क, बिना सेफ्टी किट, बिना किसी सुरक्षा मानक के वे दिन-रात धूल और धुएँ में काम करने को मजबूर हैं। पेट की मजबूरी उन्हें सवाल पूछने नहीं देती, और सिस्टम की चुप्पी उनकी जिंदगी को और असुरक्षित बना देती है। नियम कागज़ों में, ज़मीनी हकीकत अलग प्रदूषण नियंत्रण, खनन विभाग और श्रम विभाग जैसे जिम्मेदार तंत्रों की भूमिका इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। न खदानों की गंभीर जांच दिखाई देती है, न भट्ठों के प्रदूषण स्तर की निगरानी। नियम और कानून मानो सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गए हैं। क्षेत्रवासियों के बीच यह चर्चा आम है कि रुपयों के दम पर सब कुछ “मैनेज” कर लिया गया है। यही कारण है कि नियमों पर कार्रवाई की जगह खामोशी देखने को मिलती है। सबसे बड़ा सवाल : मैहर का माल, कटनी के नाम से क्यों? जब चुना और छूही का उत्पादन झुकेही क्षेत्र में हो रहा है, तो बाजार में इसकी पहचान कटनी के नाम से क्यों कराई जा रही है? यह केवल व्यापार का सवाल नहीं, बल्कि मैहर की पहचान और अधिकार का मुद्दा है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी इस पूरे विषय पर सबसे अधिक निराशाजनक है मैहर के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी। जिन पर जनता की आवाज़ बनने की जिम्मेदारी है, वे इस गंभीर समस्या पर मौन साधे हुए हैं। यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। अब इंतज़ार नहीं, कार्रवाई चाहिए झुकेही क्षेत्र के लोग आज प्रशासन की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। सवाल साफ है— क्या इन बेलगाम चुना-छूही भट्ठों पर नियंत्रण लगेगा? क्या मजदूरों को सुरक्षा और क्षेत्रवासियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा? यह मुद्दा सिर्फ झुकेही का नहीं, पूरे मैहर जिले के भविष्य से जुड़ा है। अब वक्त है कि धूल और धुएँ के इस सच पर पर्दा नहीं, कार्रवाई की रोशनी डाली जाए। ✍️ *लेखक : गोवर्धन गुप्ता* 📍 *स्थान : मैहर,* मध्यप्रदेश
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