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‘‘नोनी हा पढ़ही, तभे आगू बढ़ही‘‘ – कुबेरपुर में युवोदय स्वयंसेवकों की जागरूकता रैली से गूंजा बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प

बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए जिला प्रशासन सूरजपुर की प्रतिबद्धता एक बार फिर जमीनी स्तर पर दिखी। कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन के निर्देश के अनुपालन में एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के मार्गदर्शन में 30 मार्च को ब्लॉक ओड़गी की ग्राम पंचायत कुबेरपुर में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत एक प्रभावशाली जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। यूनिसेफ एवं एग्रिकोन फांउडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीण समाज में बाल विवाह उन्मूलन का एक सशक्त और स्थायी संदेश छोड़ा।

रैली की विशेष बात यह रही कि मीडिल स्कूल के नन्हे बच्चों ने बाल विवाह विरोधी विषयों पर भावपूर्ण चित्र बनाकर इस अभियान को एक नई ऊर्जा और जीवंतता प्रदान की। बच्चों की इस सृजनात्मक भागीदारी ने उपस्थित ग्रामीणों के मन पर गहरी छाप छोड़ी। ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं युवोदय स्वयंसेवकों ने मिलकर बाल विवाह मुक्त ग्राम बनाने की दृढ़ शपथ ली। रैली के दौरान स्पष्ट संदेश दिया गया कि कानूनन लड़की की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष तथा लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है और इससे कम आयु में विवाह करना एक दंडनीय अपराध है जो बाल विवाह की श्रेणी में आता है। युवोदय स्वयंसेवकों ने गाँव की गलियों में भ्रमण कर घर-घर तक यह जागरूकता पहुंचाई।

रैली के दौरान प्रतिभागियों के उत्साही नारों से पूरा कुबेरपुर गुंजायमान हो उठा। ‘नोनी हा पढ़ही, तभे आगू बढ़ही‘ ष्आओ मिलकर कदम बढ़ाएं, बाल विवाह पर रोक लगाएं‘ ‘हम सबने ठाना है, बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाना है‘ और ‘बंद हो, बंद हो – बाल विवाह बंद हो‘ जैसे नारों ने ग्रामीणों के मन में इस सामाजिक बुराई के विरुद्ध जागृति की नई लौ प्रज्वलित की। कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थित जनों को बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की सामूहिक शपथ दिलाने के साथ हुआ।

  1.               इस सफल आयोजन में यूनिसेफ के जिला समन्वयक श्री हितेश निर्मलकर, ब्लॉक समन्वयक सुश्री बेलासो प्रजापति, ग्राम पंचायत कुबेरपुर की सरपंच श्रीमती सुरज लाल, सचिव श्री राम कीसुन बैंस, आंगनबाड़ी पर्यवेक्षक सुश्री सत्यवती तथा युवोदय स्वयंसेवकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भूमिका रही। इन सभी के सामूहिक प्रयास ने इस अभियान को ग्राम स्तर पर वास्तविक जन-आंदोलन का स्वरूप दिया।
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